क्या केदारनाथ में जारी पुनर्निर्माण कार्य डाल रहे हैं एक और आपदा की बुनियाद?

वैज्ञानिकों की सलाह थी कि केदारघाटी में किसी तरह का निर्माण कार्य न किया जाए क्योंकि यह पूरी जगह बेहद संवेदनशील है.

News18 Uttarakhand
Updated: May 18, 2018, 4:30 PM IST
क्या केदारनाथ में जारी पुनर्निर्माण कार्य डाल रहे हैं एक और आपदा की बुनियाद?
केदारनाथ में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण कार्य जारी हैं.
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Updated: May 18, 2018, 4:30 PM IST
केदारनाथ धाम  में हो रहे पुनर्निर्माण कार्य केदारनाथ और वहां के बेहद संवेदनशील पर्यावरण की सेहत के लिए ठीक नहीं है. वैज्ञानिकों का कहना है कि 2013 की त्रासदी एक सबक थी लेकिन इससे सीखा नहीं गया बल्कि ठीक इसके उलट एक और बड़ी त्रासदी की बुनियाद फिर डाली जा रही है.

कभी आपदा, तो कभी पुनर्निर्माण कार्यो को लेकर चर्चा में रहा केदारनाथ धाम इस बार इसलिए चर्चा में है कि आखिर केदारनाथ धाम और घाटी में इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य का आधार क्या है? क्या केदरापुरी का पुनर्निर्माण वैज्ञानिक सलाह के आधार पर किया जा रहा है? इसका जवाब है नहीं.

केदारनाथ आपदा के बाद भारत सरकार ने एक कमेटी बनाई थी जिसने केदारनाथ आपदा के सभी तथ्यों का अध्ययन कर भारत सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी. इसमें पुनर्निर्माण कार्यों पर भी सलाह दी गई थी  लेकिन केदारपुरी पुनर्निर्माण में न तो उस रिपोर्ट की सिफ़ारिशों को धयान रखा गया और न ही  पर्यावरण के मानकों का.

pradeep shriwastava scientist wadia
वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रदीप श्रीवास्तव


कमेटी के सदस्य और वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रदीप श्रीवास्तव के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया था कि सोनप्रयाग से केदारनाथ तक के इलाके को निर्माण कार्यों से पूरी तरह अछूता रखा जाए, प्राकृतिक रूप में रहने दिया जाए. वह इसकी वजह बताते हैं कि केदारघाटी पूरी ग्लेशियर के मोरेन और ढीली मिट्टी पर है इसलिए वहां किसी भी तरह का मानवीय निर्माण नहीं होना चाहिए.

प्रदीप श्रीवास्तव ने कहते हैं कि केदार घाटी में जो निर्माण चल रहे हैं अभी उन्होंने जाकर देखे तो नहीं हैं लेकिन यह रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया गया था कि वहां निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह प्रकृति के खिलाफ़ जा रहा है. वह कहते हैं कि स्मार्ट विकास का अर्थ होना चाहिए ऐसा विकास को प्रकृति से तारतम्य बैठाते हुए हो दिल्ली और मुंबई जैसे क्षेत्रों की तरह नहीं. वहां की भौगोलिक स्थितियां उत्तराखंड और केदार घाटी से बिल्कुल अलग हैं.

Professor Talat Ahmed, VC jamia
प्रोफ़ेसर तलत अहमद केदारनाथ आपदा के बाद कारणों की पड़ताल और पुनर्निर्माण की सलाह देने वाली समिति के अध्यक्ष थे.


केदारनाथ आपदा के बाद बनी कमेटी के चेयरमैन और वर्तमान में जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफ़ेसर तलत अहमद भी इस बाद की तस्दीक करते हैं. वह कहते हैं कि ऐसी जगह निर्माण कार्य नहीं होने चाहिए जो पहले ही संवेदनशील हैं. प्रोफ़ेसर अहमद कहते हैं कि अगर निर्माण या पुनर्निर्माण कार्य किया जाना बेहद ज़रूरी है भी तो पर्याप्त अध्ययन के बिना नहीं करना चाहिए.

(किशोर रावत की रिपोर्ट)
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