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जनरल-ओबीसी कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म... अब एससी-एसटी कर्मचारी आंदोलन की राह पर, धर्मांतरण पर भी विचार

जनरल-ओबीसी कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म... अब एससी-एसटी कर्मचारी आंदोलन की राह पर, धर्मांतरण पर भी विचार

एससी-एसटी इंप्लाइज़ फेडरेशन ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का ऐलान किया है. (फ़ाइल फ़ोटो)

एससी-एसटी इंप्लाइज़ फेडरेशन ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का ऐलान किया है. (फ़ाइल फ़ोटो)

त्रिवेंद्र रावत सरकार के प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने के फ़ैसले से एससी-एसटी कर्मचारी ख़फ़ा हो गए हैं और इसे उनके साथ धोखा करार दिया है.

देहरादून. अपने तीन साल पूरे होने के मौके पर त्रिवेंद्र रावत सरकार ने प्रमोशन पर रोक हटाने के फ़ैसला किया तो 2 मार्च से हड़ताल कर रहे जनरल-ओबीसी कर्मचारियों ने भी हड़ताल ख़त्म करने का ऐलान कर दिया. लेकिन प्रमोशन में आरक्षण खत्म किए जाने से एससी-एसटी कर्मचारी ख़फ़ा हो गए हैं और इसे उनके साथ धोखा करार दिया है. एससी-एसटी इंप्लाइज़ फेडरेशन ने ऐलान कर दिया है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन और धर्मांतरण जैसा कोई भी कदम उठा सकते हैं.

आदेश जारी, हड़ताल ख़त्म 

प्रमोशन में आरक्षण को खारिज किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने को लेकर जनरल-ओबीसी कर्मचारी इसी महीने की 2 तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे. कोरोना को प्रदेश में महामारी घोषित किए जाने का भी इस आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ रहा था बल्कि यह दिनोंदिन उग्र ही हो रहा था.

आज त्रिवेंद्र रावत सरकार के तीन साल पूरे होने पर कार्यक्रम के बाद जनरल-ओबीसी कर्मचारियों की मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से बात हुई. उसके बाद मुख्य सचिव ने पिछले साल सितंबर में जारी प्रमोशन पर रोक के शासनादेश को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया. मांग पूरी होने पर जनरल-ओबीसी कर्मचारियों ने भी हड़ताल ख़त्म करने का ऐलान कर दिया.

एकतरफ़ा फ़ैसला 

राज्य सरकार के इस फ़ैसले को उत्तराखंड एससी-एसटी इंप्लाइज़ फ़ेडरेशन ने पक्षपातपूर्ण बताया है. फ़ेडरेशन के अध्यक्ष करम राम ने न्यूज़ 18 से बात करते हुए इसे ड्रामा बताया और कहा कि यह शर्मनाक है कि सरकार ने राज्य सरकार ने उनका पक्ष सुनने की औपचारिकता तक पूरी करने की ज़रूरत नहीं समझी.

करम राम ने कहा कि राज्य सरकार ने जानबूझकर यह सब और वह लगातार इसी दिशा में काम कर रही थी. कोरोना के महामारी घोषित किए जाने के बाद भी ये लोग लगातार सरकार के आदेशों की अवहेलना कर रही थी और सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी.

धर्मांतरण पर भी विचार 

करम राम ने कहा कि उन्होंने फ़ेडरेशन की कार्यकारिणी की बैठक बुला ली है और जल्द ही इस फ़ैसले के विरोध के तरीके के बारे में फ़ैसला किया जाएगा. बता दें कि एससी-एसटी इंप्लाइज़ फ़ेडरेशन ने पहले ही आशंका जताई थी कि उत्तराखंड सरकार जनरल-ओबीसी कर्मचारियों के दबाव में कोई फ़ैसला ले सकती है और चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा होता है तो एससी-एसटी कर्मचारी सामूहिक धर्मांतरण कर लेंगे.

इस बारे में न्यूज़ 18 के सवाल के जवाब में करम राम ने कहा कि अपने अधिकारो की रक्षा के लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं. भले ही उन्हें उग्र आंदोलन करना पड़े या फिर धर्मांतरण जैसा फ़ैसला, सारे विकल्प खुले हैं. कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन का स्वरूप तय किया जाएगा.

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Tags: Caste Reservation, Dehradun news, Government jobs, Uttarakhand news

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