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कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में जल्द विचरते नज़र आ सकते हैं गैंडे... बंदर को किया जाएगा पीड़क घोषित

News18 Uttarakhand
Updated: November 26, 2019, 4:00 PM IST
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में जल्द विचरते नज़र आ सकते हैं गैंडे... बंदर को किया जाएगा पीड़क घोषित
गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन के संबंध में प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां गैण्डे के अनुकूल है.

राज्य वन्य जीव बोर्ड (state wild life board) की बैठक में मानव-वन्य जीव संघर्ष (man-wild conflict) से प्रभावित गांवों में वॉलण्टरी विलेज प्रोटेक्शन फोर्स की स्थापना जल्द से जल्द करने का फ़ैसला किया गया.

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देहरादून. कार्बेट टाइगर रिज़र्व में जल्द ही फिर गैंडे विचरते नज़र आ सकते हैं. राज्य वन्य जीव बोर्ड ने प्रायोगिक तौर पर गैण्डे का रिइन्ट्रोडक्शन करने का फ़ैसला किया है. देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्य जीव बोर्ड की 14वीं बैठक में हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर बंदरों को पीड़क घोषित करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने का फ़ैसला किया गया. इसके अलावा मानव-वन्य जीव संघर्ष से प्रभावित गांवों में वॉलण्टरी विलेज प्रोटेक्शन फोर्स की स्थापना जल्द से जल्द करने का फ़ैसला किया गया.

कार्बेट गैंडे के लिए अनुकूल 

बैठक में यह भी फ़ैसला किया गया कि गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में गरतांग गली ट्रेल में रास्ते का निर्माण उसके प्राचीन स्वरूप को बनाए रखते हुए किया जाए. मछलियों को पकड़ने में अवैधानिक तरीकों के प्रयोग को रोकने के लिए युवक मंगल दलों, महिला मंगल दलों, वन पंचायतों का सहयोग लेने का फ़ैसला किया गया है.

गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन के संबंध में प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां गैण्डे के अनुकूल है. गैण्डे के मानव के साथ संघर्ष की सम्भावना शून्य होती है और यह अन्य जीवों के लिए भी सहायक होता है. इससे राज्य में पर्यटन गतिविधियां भी बढ़ने की उम्मीद है. बोर्ड ने कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में प्रायोगिक तौर पर गैण्डे का रिइन्ट्रोडक्शन पर सहमति दे दी है.

संरक्षित क्षेत्रों से जुड़े मामलों पर स्वीकृति 

राज्य वन्य जीव बोर्ड द्वारा संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत व संरक्षित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर परिधि में आने वाली वन भूमि के हस्तांतरण और अन्य प्रकरणों पर स्वीकृति प्रदान की गई है. इनमें लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण के लिए अधिगृहित भूमि की राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड से अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजने, रुद्रप्रयाग के उखीमठ नगर पंचायत में पेयजल योजना के लिए पाइप लाइन बिछाने की अनुमति, जनपद अल्मोड़ा में एनटीडी-कफड़खान मोटरमार्ग के 2 किमी से ग्राम भूल्यूड़ा सब्जी उत्पादन क्षेत्र हेतु मोटरमार्ग का नवनिर्माण, रामनगर-लालढांग मोटर मार्ग के 9 किमी व 13 किमी में सेतु का निर्माण, सोनप्रयाग से त्रिजुगीनारायण व कोठियालसैण से ऊषाड़ा तक मोटरमार्ग के किनारे ओएफसी लाईन बिछाए जाने की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजना प्रमुख हैं.

अधिकार कायम रहें 
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प्रदेश में संरक्षित क्षेत्रों के निकट स्थित टोंगिया और अन्य गांवों में सोलर लाइट, शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं नियमानुसार उपलब्ध करवाने के काम प्राथमिकता से किए जाएं. यह भी कहा गया कि संरक्षित क्षेत्रों से दूसरे स्थानों पर बसाए जाने पर वन्य ग्रामों के लोगों को भूमि संबंधी वही अधिकार मिलने चाहिए जो उन्हें अपनी पहले की भूमि पर प्राप्त थे. इसके लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजने का फ़ैसला किया गया.

बैठक में वन मंत्री डॉक्टर हरक सिंह रावत, विधायक सुरेश राठौर, दीवान सिंह बिष्ट, प्रमुख सचिव आनंद वर्द्धन, मुख्य वन संरक्षक जयराज, डीजी लॉ एंड ऑर्डर अशोक कुमार सहित वन विभाग के अधिकारी और राज्य वन्य जीव परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित थे.

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First published: November 26, 2019, 4:00 PM IST
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