Rishikesh : छह महीने बाद फिर चौरासी कुटिया में जुटने लगी पर्यटकों की भीड़

लगभग छह महीने बाद कोराना यह विरासत आम आदमी के लिए खोल दी गई है.
लगभग छह महीने बाद कोराना यह विरासत आम आदमी के लिए खोल दी गई है.

महर्षि महेश योगी (Maharishi Mahesh Yogi) की चौरासी कुटिया को ऋषिकेश (Rishikesh) में योग का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां से निकल कर योग पूरे विश्व में फैला था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 4:44 PM IST
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ऋषिकेश. राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट (Rajaji Tiger Reserve Forest) स्थित महर्षि महेश योगी (Maharishi Mahesh Yogi) की कर्मस्थली चौरासी कुटिया (Chaurasi Kutia) के दीवाने पूरे विश्व में हैं. कोराना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के चलते छह महीने से बंद पड़ी चौरासी कुटिया पर्यटकों के लिए फिर से खुल गई है. इसके बाद पर्यटक इसका दीदार करने के लिए पहुंचने लगे हैं.

देसी-विदेशी पर्यटकों का आकर्षण केंद्र

विश्वभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही महर्षि महेश योगी की चौरासी कुटिया को ऋषिकेश में योग का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां से निकल कर योग पूरे विश्व में फैला था. यह आश्रम उत्तराखंड में एक ऐसी धरोहर है, जिसके दीवाने पूरे विश्व में फैले हुए हैं. विदेशियों की जुबान पर ऋषिकेश के बीटल्स आश्रम का नाम एक आम बात है. लगभग छह महीने बाद कोराना यह विरासत आम आदमी के लिए खोल दी गई है और सरकार की ओर से जारी कोरोना गाइडलाइन का पूरा पालन किया जा रहा है.



60 के दशक में बसी थी
साठ के दशक में बसाए गए शंकराचार्य नगर चौरासी कुटिया को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. लेकिन सरकार की नीतियों में उपेक्षित रहने की वजह से चौरासी कुटिया अब खंडहर में तब्दील होती जा रही है. नतीजतन यहां पहुंचकर भी दर्शकों को सिर्फ खंडहरों के ही दर्शन हो पाते हैं. यहां पहुंचने वाले पर्यटक अब सरकार से इस विरासत को संभालने की मांग कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग को पहचान दिलाने वाली है नगरी आने वाली पीढ़ी को अतीत की याद दिला सके. यहां का आध्यातिक वातावरण यहां पहुंचने वालो को अलग सुकून देता है. पहले पर्यटक के रूप में दिल्ली से आए अनुराग गुप्ता और डॉक्टर अनामिका का कहना है कि महर्षि महेश योगी के आश्रम शंकराचार्य नगर की बात ही कुछ और है. यह एक ऐसी विरासत है जिसका दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान आते हैं. अगर सरकार इस ओर ध्यान दे तो आने वाले दिनों में विदेशी पर्यटक भी अतीत के इस विरासत का मजा ले सकते हैं.
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