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देहरादून में ऋषिकेश रिपीट करने की तैयारी… विभाग करे अतिक्रमण, कीमत चुकाएं लोग

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: October 15, 2019, 1:22 PM IST
देहरादून में ऋषिकेश रिपीट करने की तैयारी… विभाग करे अतिक्रमण, कीमत चुकाएं लोग
देहरादून में मसूरी बाइपास से लगती 6 नंबर पुलिया पर वेंडिंग ज़ोन को लेकर देहरादून नगर निगम और सिंचाई विभाग आमने-सामने हैं.

सिंचाई विभाग (Irrigation Department) ने नगर निगम (Dehradun Municipal Corporation) को एक नोटिस जारी कर कहा है कि नगर निगम ने बिना उसकी अनुमति के उसकी ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़ा (Encroachment) किया है.

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देहरादून. उत्तराखंड में अफ़सरशाही कितनी लापरवाही से काम करती है इसकी बानगी ऋषिकेश (Rishikesh) में टिहरी विस्थापितों (Tehri Migrants) की कॉलोनी में हाल ही में देखने को मिली थी. उत्तराखंड पुनर्वास निदेशालय (Uttarakhand Rehabilitation Directorate) ने टिहरी बांध (Tehri Dam) से विस्थापित हुए लोगों को ज़मीन का आवंटन (Land Allocation) ऋषिकेश में किया था. कमाल की बात यह है कि निदेशालय ने पशुपालन विभाग (Animal husbandry department) की ज़मीन पर भूमि पर आवंटन कर दिया था, बिना भूमि ट्रांस्फ़र करवाए और बिना की इजाज़त लिए. पशुपालन विभाग हाईकोर्ट गया और वहां से केस जीत गया. इसके बाद टिहरी विस्थापतों को उस ज़मीन से बेदखल कर दिया गया जो उन्हें पुनर्वास निदेशालय ने आवंटित की थी. अब उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून (Dehradun) में भी ऐसा ही खेल चल रहा है.

ऋषिकेश का वायरल वीडियो

ऋषिकेश का मामला इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि पुलिसकर्मियों ने टिहरी विस्थापितों वीवीआईपी  कॉलोनी में कब्ज़ा हटाने के लिए पशुपालन विभाग की टीम के साथ पहुंचे पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ गाली-गलौच की और एक किशोर की पिटाई कर दी थी. अगर ऐसा न होता तो शायद उत्तराखंड पुनर्वास निदेशालय के अफ़सरों की आपराधिक लापरवाही ख़बरों में भी न आती.

देहरादून नगर निगम भी पुनर्वास निदेशालय के ही नक्शे-कदम पर चल रहा है. देहरादून नगर निगम ने शहर के एक प्रमुख मार्ग पर सिंचाई विभाग की ज़मीन पर कब्ज़ा कर उस पर वेंडिंग ज़ोन का निर्माण शुरु कर दिया है. नगर निगम ने इसके लिए चंद दुकानदारों से पैसे भी वसूल लिए हैं और पांच साल के लिए वेंडिंग ज़ोन में दुकानें आवंटित कर दी हैं.

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ऋषिकेश मेें टिहरी विस्थापितों को पुनर्वास आयोग ने पशुपालन विभाग की ज़मीन आवंटित कर दी थी. उस हटाने गई टीम के पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ बदतमीजी कर दी थी. (फ़ाइल फ़ोटो) 


सिंचाई विभाग का नोटिस

न्यूज़ 18 पर ख़बर छपने के बाद सिंचाई विभाग को नगर निगम के अपनी ज़मीन पर कब्ज़ा किए जाने के बारे में पता चला और इसके बाद विभाग ने नगर निगम को एक नोटिस जारी किया. देहरादून नगर निगम के मुख्य नगर अधिकारी को संबोधित इस नोटिस में लिखा गया है कि नगर निगम ने बिना सिंचाई विभाग की अनुमति के उसकी ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़ा किया है.
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5 अक्टूबर को जारी इस नोटिस में नगर-निगम को तीन दिन में जवाब देने को कहा गया है. इस नोटिस की अवधि समाप्त होने के बारे में पूछे जाने पर देहरादून के ज़िलेदार मोहम्मद युसुफ़ ने न्यूज़ 18 को कहा कि चूंकि अभी सभी लोग पंचायत चुनाव में व्यस्त थे इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई. 16 तारीख को तीसरे चरण के मतदान के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

irrigation department's notice to dehradun municipal corporation, सिंचाई विभाग ने 5 अक्टूबर को नगर-निगम को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया था.
सिंचाई विभाग ने 5 अक्टूबर को नगर-निगम को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया था.


 

मिल गई एनओसी !

इस बीच देहरादून के नगरायुक्त विनय शंकर पांडे ने दावा किया है कि सिंचाई विभाग देहरादून नगर निगम को वेंडिंग ज़ोन के लिए एनओसी देने जा रहा है. न्यूज़ 18 से बातचीत में उन्होंने कहा, “सालों से उस जगह पर रेहड़ियां लग रही थीं तब किसी ने ऐतराज़ क्यों नहीं किया. अब तक नगर निगम चीज़ों को स्ट्रीमलाइन कर रहा है तो मीडिया को क्यों ऐतराज़ हो रहा है.”

न्यूज़ 18 ने इस संबंध में सिंचाई विभाग का पक्ष जानने की भी कोशिश की लेकिन देहरादून सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता से बात नहीं हो सकी है. जैसे ही उनसे बात होगी हम उनका पक्ष रखेंगे.

लोगों के साथ छल

हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र शेखर तिवारी कहते हैं कि कैबिनेट की अनुमति के बिना एक विभाग दूसरे को ज़मीन का हस्तांतरण कर ही नहीं सकता. अगर सिंचाई विभाग नगर निगम को अपनी ज़मीन इस्तेमाल करने की अनुमति दे भी देता है तो नगर निगम उसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकता.

dehradun, 6 number pulia, vending zone, देहरादून के प्रमुख मार्ग पर बनाए जा रहे इस वेंडिंग ज़ोन से सड़क संकरी हो गई है और सुबह-शाम भारी जाम लगता है.
देहरादून के प्रमुख मार्ग पर बनाए जा रहे इस वेंडिंग ज़ोन से सड़क संकरी हो गई है और सुबह-शाम भारी जाम लगता है.


 

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी और बीजेपी नेता रविंद्र जुगरान इसे लोगों के साथ छल बताते हैं. वह कहते हैं कि ऋषिकेश में टिहरी विस्थापितों के साथ जो हुआ उसके लिए राज्य की अफ़सरशाही और नेता ज़िम्मेदार हैं. ऐसा ही देहरादून में किया जा रहा है. ऐसे केस हाईकोर्ट में बिल्कुल नहीं टिकते और इसमें छले जाते हैं वह लोग जो सरकारी विभागों की बातों में आकर फंस जाते हैं.

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First published: October 15, 2019, 1:22 PM IST
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