COVID-19: प्रवासियों को लाने दिल्ली गई रोडवेज बसें 3 दिन खड़ी रहीं, आखिर में खाली लौटीं
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COVID-19: प्रवासियों को लाने दिल्ली गई रोडवेज बसें 3 दिन खड़ी रहीं, आखिर में खाली लौटीं
देहरादून से गई 22 बसें 24 मई तारीख से 27 तारीख तक दिल्ली में खाली पड़ी रहीं. इन बसों में कोई भी प्रवासी नहीं आया.

प्रवासियों को लाने देहरादून से गई 22 बसें 24 मई से 27 तारीख तक दिल्ली में खाली खड़ी रहीं. लेकिन इन बसों में कोई भी प्रवासी वापस नहीं आया. तीन दिन इंतजार करने के बाद यह 22 बसें वापस 27 मई की रात खाली देहरादून लौट आईं

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देहरादून. लॉकडाउन (Lockdown) में देश के अन्य राज्यों में फंसे प्रवासियों को उत्तराखंड (Uttarakhand) लाने के लिए सरकार ने  उत्तराखंड रोडवेज (Uttarakhand Roadways) की बसें लगा रखी हैं. इस काम के लिए नियुक्त विशेष अधिकारियों को अन्य राज्यों के अधिकारियों से तालमेल बिठा कर सभी प्रवासियों को नियमानुसार लाना सुनिश्चित करना है. उत्तराखंड के अधिकारी कितना शानदार काम रह रहे हैं यह इससे समझिए कि उत्तराखंड परिवहन की 22 बसें दिल्ली में चार दिन इंतजार करती रहीं और फिर खाली ही वापस आ गईं. रोडवेज कर्मचारियों में इसे लेकर रोष है क्योंकि इसकी वजह से न सिर्फ रोडवेज को नुकसान हुआ है बल्कि कर्मचारी भी इससे परेशान हुए हैं.

क्या तालमेल है?

दरअसल, उत्तराखंड रोडवेज की 100 बसें बीते 24 मई को दिल्ली में प्रवासियों को लाने गई थीं. दिल्ली से कुमाऊं के प्रवासियों को लेकर बसें वापस उत्तराखंड आ गईं लेकिन देहरादून से गई 22 बसें 24 मई से 27 तारीख तक दिल्ली में खाली खड़ी रहीं. इन बसों में कोई भी प्रवासी वापस नहीं आया. तीन दिन इंतजार करने के बाद यह 22 बसें वापस 27 मई की रात खाली देहरादून लौट आईं.



यह दर्शाता है कि दोनों राज्य के अधिकारी किस तालमेल के साथ काम कर रहे थे. कोरोना संकट के समय जब आर्थिक और सामाजिक संकट पैदा हो रहे हैं तब इतनी लापरवाही? रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री दिनेश पंत का कहना है परिवहन निगम को कहा गया था कि दिल्ली  में प्रवासियों को लेने के लिए 100 बसें भेजी जानी है और इसीलिए ये बसें भेजी गईं. अधिकारियों की लापरवाही और गलती की सजा भुगतनी पड़ी इन बसों के ड्राइवरों और कंडक्टरों को.



परेशान रहे ड्राइवर और कंडक्टर

पंत के मुताबिक बसों के ड्राइवरों और कंडक्टरों को किसी तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई. दिल्ली की भयंकर गर्मी में ड्राइवर और कंडक्टर वहां चुपचाप पड़े रहे. रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि जब 24 से 27 मई तक बसें खाली खड़ी रहीं तो उन्हें वापस बुलाया गया.

अब इन बसों के 44 ड्राइवर, कंडक्टर का मेडिकल चेकअप किया जा रहा है जिसके बाद उन्हें क्वारंटाइन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों का आपस में कोई तालमेल नहीं है जिसकी वजह से रोडवेज की बसें और उनके कर्मचारी दिल्ली में खाली बैठे रहे. ऐसे में न सिर्फ संसाधनों पर खर्च हुआ बल्कि ड्राइवर और कंडक्टर भी दिल्ली में परेशान होते रहे.

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