मुझे मेरी बीवी से बचाओ! पत्नियों से पीड़ित पुरुष लगा रहे हैं महिला हेल्पलाइन में मदद की गुहार
Dehradun News in Hindi

 मुझे मेरी बीवी से बचाओ! पत्नियों से पीड़ित पुरुष लगा रहे हैं महिला हेल्पलाइन में मदद की गुहार
महिला हेल्पलाइन में ऐसे भी मामले आ रहे हैं जिसमें पति अपनी पत्नी द्वारा उत्पीड़न की शिकायतें कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ढाई साल में महिला हेल्पलाइन (Women's Helpline) में पुरुषों ने अपनी पत्नियों के ख़िलाफ 900 से ज्‍यादा शिकायतें की हैं.

  • Share this:
देहरादून. भारतीय समाज में आम धारणा महिला के साथ बराबरी का बर्ताव न किए जाने की है और इसलिए पिछले कुछ दशकों से महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार, समाज के स्तर पर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं. लेकिन देहरादून के महिला हेल्पलाइन (Women's Helpline) के आंकड़े बताते हैं कि बहुत से मामलों में महिलाएं उत्पीड़न में भी पुरुषों को टक्कर दे रही हैं. ऐसे मामले अपवाद स्वरूप इक्का-दुक्का नहीं हैं बल्कि नियमित रूप से आते हैं. बीते ढाई साल में महिला हेल्पलाइन में पुरुषों ने अपनी पत्नियों के ख़िलाफ़ 900 से ज़्यादा शिकायतें की हैं.

महिला उत्पीड़न की 3700 शिकायतें

वैसे तो महिला हेल्प लाइन में केवल महिलाओं के प्रति हुए घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों को लेकर शिकायतें दर्ज की जाती हैं लेकिन अब महिला हेल्पलाइन में ऐसे भी मामले आ रहे हैं जिसमें पति अपनी पत्नी द्वारा उत्पीड़न की शिकायतें कर रहे हैं. जी हां देहरादून की महिला हेल्प लाइन में पिछले ढाई साल में 900 से अधिक ऐसे मामले आए हैं.



हालांकि ऐसा नहीं है कि महिलाओं द्वारा पतियों का कथित उत्पीड़न ज़्यादा हो रहा है. बीते ढाई साल में देहरादून महिला हेल्पलाइन में महिला उत्पीड़न की 3700 शिकायतें मिली हैं.
पारिवारिक विवाद से विवाहेतर संबंध की शिकायतें

महिला हेल्पलाइन की सीओ पल्लवी त्यागी बताती हैं कि महिला हेल्पलाइन में आने वाली पुरुषों की ज़्यादातर शिकायतें शिकायतें पारिवारिक विवादों के साथ पति-पत्नी के आपसी सामंजस्य न बनने को लेकर होती हैं. बहुत से मामले तो महिला के सास-ससुर न बनने के कारण विवाद का रूप ले लेते हैं लेकिन कुछ केस पत्नी के विवाहेतर संबंधों के भी आए हैं.

पल्लवी त्यागी कहती हैं कि जिन भी पुरुषों ने महिला हेल्पलाइन में शिकायत की है वह उन्हें बुलाकर उनकी काउंसिलिंग करवाते हैं और कोशिश करते हैं कि बातचीत से मामला सुलझ जाए. लेकिन समझौता न होने की स्थिति में मामले को थाने में ट्रांस्फ़र कर दिया जाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज