लॉकडाउन में स्कूल फीस और छंटनी विवादः उत्तराखंड शिक्षा विभाग का दावा, देहरादून में सब चंगा है!
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लॉकडाउन में स्कूल फीस और छंटनी विवादः उत्तराखंड शिक्षा विभाग का दावा, देहरादून में सब चंगा है!
अभिभावकोंं का कहना है कि कोविड-19 कोष में 62.01 लाख रुपये देने के बाद स्कूलों को अभिभावकों पर दबाव बनाने की छूट दे दी गई जो इस अपील में भी दिखती है.

कोविड-19 संकट से निपटने के लिए प्राइवेट स्कूलों की एक संस्था ने सरकार को 62.01 लाख रुपये की सहायता दी औरस्कूलों को फ़ीस वसूलने की अनुमति मिल गई.

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  • Last Updated: April 30, 2020, 8:50 PM IST
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देहरादून. दुनिया भर के सामने अभूतपूर्व रूप में सामने आए कोरोना वायरस (COVID-19) संकट ने एकदम नई तरह की समस्याएं भी पैदा कर दी हैं. इनसे निपटने के उपाय कभी कारगर साबित हो रहे हैं तो कभी नहीं. कोरोना वायरस संकट की वजह से हुए लॉकडाउन में स्कूल भी बंद हैं लेकिन निजी स्कूलों के फीस मांगने और अभिभावकों पर दबाव बनाने कि शिकायतें लगातार आ रही हैं. देहरादून में एक स्कूल के अपने टीचरों को निकालने का मामला भी सामने आया है. लेकिन शिक्षा विभाग का कहना है कि यहां सब ठीक है. हालांकि विभाग के इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं.

किस पर है शिक्षा विभाग का नियंत्रण

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून अपनी स्कूली शिक्षा के लिए देश ही नहीं दुनिया भर में पहचान रखता है. हालांकि जब स्कूली शिक्षा की बात होती है तो इसमें दून स्कूल, वेल्हम्स, सेंट जॉर्ज स्कूल मसूरी आदि गिने-चुने नाम ही हैं. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार ये स्कूल ऐसे हैं जिनका अलग निजाम है और इनका प्रबंधन अमूमन सरकार की भी नहीं सुनता.



सरकार का तो पता नहीं लेकिन शिक्षा विभाग की कौन सुनता है यह भी एक बड़ा सवाल है. बीते तीन साल में उत्तराखंड के स्कूलों की मनमानी के कई किस्से सामने आए हैं. और शिक्षा विभाग किसी भी मामले में कोई कड़ा कदम नहीं उठा सका है.
देहरादून के एक प्राइवेट स्कूल में एक छात्रा से गैंगरेप का मामला सामने आया तो खुलासा हुआ कि यह स्कूल बिना मान्यता के ही चल रहा था. ऋषिकेश के एक स्कूल के हॉस्टल में एक छात्र की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई तब भी इसे लेकर शिक्षा विभाग पर सवाल उठे. एक छात्रा के साथ स्कूल में टीचर के छेड़खानी पर स्कूल प्रबंधन के मामला दबाने की कोशिश पर भी शिक्षा विभाग खामोश रहा. हैरानी की बात यह है कि स्कूल प्रबंधन अब भी प्राइवेट स्कूलों की यूनियन की राजनीति कर रहा है.

स्कूलों को मनमानी की छूट

प्राइवेट स्कूलों की इसी रणनीति या राजनीति की वजह से शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में है. कोरोनावायरस संकट से निपटने के लिए प्राइवेट स्कूलों की एक संस्था ने सरकार को 62.01 लाख रुपये की सहायता दी. इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों को अभिभावकों से फीस वसूलने की 'सशर्त' अनुमति दे दी.

यह सशर्त अनुमति इसलिए दी गई क्योंकि 'इन स्कूलों के पास अपना खर्च चलाने के पैसे नहीं हैं'. अभिभावक संघ का आरोप है कि सरकार ने स्कूलों की 'सहायता' के एवज में उन्हें मनमानी करने की छूट दी है.

कोई शिकायत नहीं

इस बीच फीस भरने का दबाव डालने की कई शिकायतें मिलने पर देहरादून के 11 प्राइवेट स्कूलों को देहरादून की मुख्य शिक्षा अधिकारी ने नोटिस जारी किया है. अभिभावक संघ इसे लीपापोती की कोशिश बता रहा है लेकिन शिक्षा विभाग इससे सहमत नहीं. देहरादून में मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा रानी पैन्यूली के अनुसार उनके नोटिस के बाद ज्यादातर स्कूलों ने फीस वृद्धि और पूरी फीस वसूलने के अपने आदेश वापस ले लिए हैं. अब सभी स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ही मांग रहे हैं इसलिए यह मान लिया गया है कि सारी शिकायतों का समाधान हो गया है.

लॉकडाउन में छंटनी!

देहरादून में ही आर्यन स्कूल ने अपने कर्मचारियों का करीब एक तिहाई वेतन काट लिया और सवाल पूछने पर उसे मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का बहाना बना दिया. इसके अलावा स्कूल के तीन कर्मचारियों (शिक्षक समेत) ने स्कूल पर उन्हें नौकरी से निकालने का भी आरोप लगाया.

आशा रानी पैन्यूली का कहना है कि इस मामले में आर्यन स्कूल ने नोटिस का जवाब दे दिया है. वहीं स्कूल का कहना है कि इन सभी कर्मचारियों को लॉकडाउन से पहले ही नोटिस दिया गया था. स्कूल के अनुसार इनमें से एक कर्मचारी पर वित्तीय अनियमितता का भी आरोप है. पैन्यूली कहती हैं कि तीन मई के बाद दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी जाएगी और उसके बाद ही फैसला किया जाएगा.

इस तरह फिलहाल देहरादून शिक्षा विभाग ने अपनी डेस्क साफ कर दी है. मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा रानी पैन्यूली के अनुसार अभी उनके पास कोई शिकायत पेंडिंग नहीं है.

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