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Uttarakhand : नियमों की धज्जियां उड़ा रहीं स्कूली वैन, जोखिम में डाली जा रही बच्चों की जान

Uttarakhand : नियमों की धज्जियां उड़ा रहीं स्कूली वैन, जोखिम में डाली जा रही बच्चों की जान

देहरादून में स्कूल वैन नियमों की अनदेखी करती हुई देखी जा रही हैं.

देहरादून में स्कूल वैन नियमों की अनदेखी करती हुई देखी जा रही हैं.

ऑटो और रिक्शे वाले कहते हैं किसी को क्या दिक्कत है अगर वो चार पैसे कमा लें. वहीं वैन ऑपरेटरों का बेशर्मी के साथ कहना है कि अगर वो गाइडलाइन के हिसाब से चलने लगे तो उनको काम समेटना पड़ेगा. जब जिम्मेदार अधिकारी सुस्त हों तो नियम तोड़ने वालों के हौसले बुलंद क्यों न हों!

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देहरादून. अगर आप अपने बच्चे को स्कूल भेजने के लिए ऑटो, ई रिक्शा या वैन पर भरोसा करते हैं तो ये खबर आपके लिए है. ई रिक्शा, विक्रम, ऑटो से स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स हैं कि बच्चों के लिए खास तौर पर एहतियात होने चाहिए. नियम के मुताबिक ई-रिक्शा, ऑटो, विक्रम में बच्चे नहीं ले जाये जा सकते मगर राजधानी में इसकी खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के कई शहरों में बच्चों को स्कूल ले जाने वाली गाड़ियां नियमों का मखौल डड़ा रही हैं.

दून समेत राज्य के अलग.अलग शहरों में कुल तक़रीबन 10 हज़ार गाड़ियां परिवहन विभाग में रजिस्टर्ड हैं, जो स्कूली बच्चों को छोड़ने के काम में लगी हैंण्. इनके आलावा कई प्राइवेट नंबर प्लेट लगी गाड़ियां भी ये ही काम कर रही हैं. इसी साल जून में परिवहन विभाग ने स्कूलों में लगी गाड़ियों के लिए गाइडलाइन जारी की थी लेकिन इनको कौन और कितना मान रहा है, इसकी पड़ताल न्यूज़ 18 ने देहरादून में की, जहां छोटे बड़े मिलाकर तक़रीबन सवा सौ स्कूल चल रहे हैं.

नियम के मुताबिक ई-रिक्शा, ऑटो, विक्रम में स्कूली बच्चों को लाने ले जाने की अनुमति नहीं है, मगर राजधानी में यह नियम धता बताया जा रहा है. कामकाजी पैरेंट्स की मजबूरी है कि वो इन्हीं पर निर्भर हैं. स्टूडेंट परेशान हैं और नियम तोड़ने वाले खुश.

किसका क्या है कहना?

ई रिक्शा संचालनक इरफान का कहना है ‘हम पेट पालने के लिए ये काम कर रहे हैं. चेकिंग होती है तो चालान ही भर सकते हैं.’ इरफान के इस बयान की तर्ज़ पर ज्यादातर वैन संचालक गाइडलाइन्स से अनजान ही हैं. दूसरी तरफ, स्कूली छात्रा निधि ने कहा, ‘हम पैरेंट्स के साथ जाना ही महफूज़ समझते हैं.’

ऐसी कई वैन या रिक्शे सड़कों पर दिख जाते हैं, जो गाइडलाइन के मुताबिक न तो पीले रंग में हैं और न ही सेफ्टी के लिए इसमें रॉड लगी हुई है. पूछने पर कभी कभी सड़कों पर दिखने वाले अधिकारी वो ही रटा.रटाया जवाब देते हैं. अब उप परिवहन आयुक्त सनत कुमार की बात देखिए, ‘ज्यादातर लोग गाइडलाइन्स का पालन कर रहे हैं, फिर भी कोई शिकायत होगी तो कार्यवाही करेंगे.’

Tags: Uttarakhand news

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