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वैज्ञानिक की सलाह... केदारनाथ में इस बार थोड़ा संभलकर
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Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: April 26, 2019, 5:33 PM IST
वैज्ञानिक की सलाह... केदारनाथ में इस बार थोड़ा संभलकर
इस बार केदारनाथ में भारी बर्फ़बारी हुई है. (फ़ाइल फ़ोटो)

ग्लेश्यरोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टर डोभाल कहते हैं कि वह पूरा इलाक़ा (केदारनाथ) मोरेन क्षेत्र में है. ऐसे में ज़्यादा बोझ पड़ने से वह धंसेगा ही.

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केदारनाथ में इस बार रिकॉर्ड बर्फ़बारी की वजह से यात्रा शुरू होने के दो हफ़्ते पहले बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है. हालत यह है कि 15 फ़ीट बर्फ़बारी की वजह से रास्ते तक ढूंढना मुश्किल हो रहा है. जो जनसुविधाएं तैयार की गई थीं वह नष्ट हो गई हैं या क्षतिग्रस्त हो गई हैं. 2013 की आपदा से पहले ही चौराबाड़ी में झील के फटने की चेतावनी देने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर डीपी डोभाल केदारपुरी के पुनर्निर्माण को लेकर पहले भी चेता चुके हैं. वाडिया इंस्टीट्यूट और हिमालयन जियोलॉजी में ग्लेश्योलॉजी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर डोभाल से बात कर हमने समझना चाहा कि इस भारी बर्फ़बारी की वजह से कोई ख़तरा है क्या?

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इस सवाल के जवाब में डॉक्टर डीपी डोभाल कहते हैं कि इस बार बर्फ़ थोड़ी ज़्यादा गिर गई है इसलिए हलचल मची हुई है. वरना पहले तो बर्फ़ ऐसे ही गिरती थी. बीसेक सालों से बर्फ़ गिरनी कम हो गई थी लेकिन इस साल फिर बर्फ़  ज़्यादा पड़ी है तो लोग आशंकाएं लगा रहे हैं.

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रुद्रप्रयाग ज़िला प्रशासन के अनुसार केदारनाथ में बर्फ़बारी से इस बार 2 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ है. 15 फ़ीट तक बर्फ़ के नीचे दबने से पैदल मार्ग में लगी रेलिंग, बेंचें तो टूट ही गई हैं पैदल मार्ग भी चटक गया है. ग्लेश्योलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टर डोभाल कहते हैं कि यह स्वाभाविक है. वह पूरा इलाक़ा मोरेन में है ऐसे में ज़्यादा बोझ पड़ने से वह धंसेगा ही.

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 डॉक्टर डोभाल कहते हैं प्रकृति से छेड़खानी करोगे तो नुक़सान तो होगा ही. और एंथ्रोपॉलोजी इफ़ेक्ट के अनुसार उसका असर इंसान पर भी पड़ेगा. जब आप किसी नाज़ुक चीज़ को छेड़ोगे तो उसमें गड़बड़ियां आएंगी ही आएंगी. हालांकि यह असर 10-20 साल बाद दिखेगा, इस साल हुई बर्फ़बारी से इसका कोई लेना-देना नहीं है.

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डॉक्टर डोभाल कहते हैं कि केदारनाथ में पड़ी बर्फ़ से अभी तो कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं दिखता लेकिन सावधानी तो बरतनी ही पड़ेगी. आप बर्फ़ में चल रहे हो जो बर्फ़ के बड़े-बड़े टुकड़े झूल रहे हैं वह टूटकर गिर सकते हैं, ऐवलॉंच आ सकते हैं छोटे-बड़े. बर्फ़ ज़्यादा गल गई तो छोटे-छोटे भूस्खलन भी शुरु हो जाएंगे. पानी होगा, कीचड़ होगा बहुत सारी चीज़ें परेशानी पैदा कर सकती हैं.

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डॉक्टर डोभाल कहते हैं कि यात्रियों को सावधानी बरतनी चाहिए, ख़ासतौर पर जब तक कि रास्ता पूरी तरह साफ़ नहीं हो जाता.

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First published: April 26, 2019, 5:00 PM IST
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