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उत्तराखंड में बार बार आ रहे भूकंप से वैज्ञानिक चिंतित... 10 दिन में दो बार लग चुके हैं झटके

भूकंपीय दृष्टिकोण में उत्तराखंड जोन 5 में है और इस हिमालयी राज्य में अक्सर भूकंप के हल्के झटके आते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भूकंपीय दृष्टिकोण में उत्तराखंड जोन 5 में है और इस हिमालयी राज्य में अक्सर भूकंप के हल्के झटके आते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी में भूकंप से बचाव को लेकर ऑनलाइन सेशन में उठा मुद्दा

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देहरादून. उत्तराखंड में पिछले दिनों आए भूकंप के झटकों के बाद एक बार फिर से आपदा की तैयारियों और अवेयरनेस का मुद्दा उठ गया है. वैज्ञानिक भी अब इस पर चिंता जताने लगाने हैं. दरअसल भूकंपीय दृष्टिकोण में उत्तराखंड जोन 5 में है और इस हिमालयी राज्य में अक्सर भूकंप के हल्के झटके आते हैं. इसी को लेकर स्कूली बच्चों के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने एक ऑनलाइन सेशन ऑर्गेनाइज़ किया था. इसमें प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और सेस्मोमीटर को लेकर टीचर्स और बच्चों को जानकारी दी गई. वैज्ञानिकों ने माना कि अब भी भूकंप के पूर्वानुमान की जानकारी नहीं जुटाई जा सकती इसलिए जागरूकता से ही बचाव संभव है.

पूर्वानुमान मुश्किल
केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी सीमाद्वार में पहुंचे वाडिया हिमालयन भूविज्ञान ससंस्थान के डायरेक्टर कालाचांद सांई ने बताया कि अब भी हमें प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को समझने के लिए काफ़ी काम करना है. भूकंप जैसी परिस्थिति का पूर्वानुमान बहुत मुश्किल है और इसीलिए भूकंप की स्थिति में क्या करना चाहिए, इसे लेकर जागरूकता बहुत ज़रूरी है.

वाडिया इंस्टीटूट के वैज्ञानिक अजय पॉल भी कमोबेश यही बात कहते हैं. वह कहते हैं कि वैज्ञानिकों का मानना है कि देश में अभी भूकंप जैसी स्थिति से कैसे निपटा जाए, इसे लेकर अवेयरनेस की काफ़ी कमी है. इसलिए ग्राउंड लेवल पर काम होना बहुत ज़रूरी है ताकि बच्चों को भूकंप के बारे में स्कूल लेवल पर ही पता चल सके.



वह कहते हैं कि इसलिए बच्चों के लिए earthquake में बचाव से संबंधित वर्कशॉप होना बहुत ज़रूरी है. अब बार बार आ रहे इन झटकों से जहां हमें सतर्क होने की ज़रूरत है, वहीं ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अवेरनेस प्रोग्राम पर भी काम होना बेहद ज़रूरी है.
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