नारी निकेतन पहुंचीं बाल आयोग की टीम, मिलीं कई गड़बड़ियां

आयोग की अध्यक्ष ने एसडीएम को इन अव्यवस्थाओं के बारे में सफ़ाई देने के लिए बुलाया तो पता चला कि उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है.

News18 Uttarakhand
Updated: September 7, 2018, 6:25 PM IST
News18 Uttarakhand
Updated: September 7, 2018, 6:25 PM IST
देहरादून के केदारपुरम स्थित शिशु सदन और बालिका निकेतन में व्यवस्थाएं हमेशा से सवालों के घेरे में रहती हैं. हद तो यह हो गई है कि नारी निकेतन और बाल निकेतन के अधिकारी बाल अधिकार सरंक्षण आयोग को भी गुमराह कर रहे हैं. बाल आयोग की टीम ने जब 4 दिन में 3 बार बालिका निकेतन और शिशु सदन का  औचक निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. आयोग को पता लगा कि कम उम्र की 4 बच्चियों को नारी निकेतन शिफ्ट कर दिया गया. एसडीएम तक को इसकी जानकारी नहीं थी. बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने एसडीएम प्रत्यूष कुमार और नारी निकेतन की अधीक्षिका को अव्यवस्थाओं पर फटकार लगाई.

बालिका निकेतन और शिशु सदन में 50 बच्चों को रखने की क्षमता है और मौजूदा वक्त में 0 से 10 साल तक के 33 बच्चे और 11 से 18 साल तक की 14 लड़कियां रह रही हैं. यानि अभी और बच्चे बालिका निकेतन में रह सकते हैं लेकिन इसके बावजूद 4 विक्षिप्त बच्चियों को नारी निकेतन में रखा गया था. इससे पहले 7 बच्चियों को कोर्ट के आदेश के बाद नारी निकेतन में रखा गया है.

आयोग की टीम को सिर्फ़ 4 बच्चों को नारी निकेतन में रखने की ख़बर थी, वह भी उन बच्चियों को जो मानसिक रूप से बीमार हैं. नारी निकेतन में यह भी खुलासा हुआ कि 60 संवासिनियां नारी निकेतन में रखी जा सकती हैं लेकिन वहां 125 महिलाएं हैं.

आयोग की अध्यक्ष ने एसडीएम को इन अव्यवस्थाओं के बारे में सफ़ाई देने के लिए बुलाया तो पता चला कि उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है. आयोग ने नारी निकेतन में रखी गई बच्चियों को बालिका निकेतन में शिफ्ट करने के लिए एक रूम तैयार करने के आदेश दे दिए हैं.

(भारती सकलानी की रिपोर्ट)

नारी निकेतन में होता है लड़कियों का शोषण, सुधार करना होगाः आर्य

देहरादून नारी निकेतन की रेप पीड़िता को 25 लाख मुआवज़ा देने का आदेश
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर