कांग्रेस का सचिवालय मार्च... पुलिस से धक्कामुक्की में किसी के कपड़े फटे, किसी की चप्पल टूटी तो कोई हुआ घायल

पसीने से तर-बतर एक दूसरे से चिपटे हुए कांगेस कार्यकर्ता कोविड के संक्रमण से पूरी तरह बेफिक्र नजर आए.
पसीने से तर-बतर एक दूसरे से चिपटे हुए कांगेस कार्यकर्ता कोविड के संक्रमण से पूरी तरह बेफिक्र नजर आए.

कांग्रेस की मांग है फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा के लंबित पडे रिज़ल्ट को जल्द घोषित किया जाए.

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देहरादून. 2022 के चुनाव को देखते हुए उत्तराखंड में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. साल 2017 से अटके पड़े फॉरेस्ट गार्ड भर्ती मामले को लेकर मंगलवार को कांग्रेस के युवा, बुजुर्ग सभी ने कंधे से कंधा मिलाकर सचिवालय कूच किया. हालांकि सचिवालय पहुंचने से पहले ही पुलिस ने बैरिकैडिंग डाल कांग्रेसियों को रोक दिया. इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा बनाई गई मानव श्रृखंला को तोड़कर बैरिकेडिंग पार करने का प्रयास किया. सकी वजह से घंटे भर तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खूब धक्का मुक्की भी हुई. कुछ के कपड़े फटे, कुछ चोटिल हुए तो महिलाओं की चप्पलें खो गई. कंधे पर सवार हो भीड़ के बीच हरीश रावत भी पहुंचे तो प्रीतम सिंह भी. प्रीतम सिंह को हल्की चोट भी आई.

बेरोज़गारों को गुमराह करने का आरोप

वैसे इस प्रदर्शन सचिवालय कूच का आयोजन कांग्रेस के युवा संगठनों एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के बैनर तले किया गया था. हालांकि इसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी शामिल हुए.



कांग्रेस की मांग है फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा के लंबित पडे रिज़ल्ट को जल्द घोषित किया जाए. पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार रोज़गार के नाम पर बेरोज़गार युवक युवतियों को सिर्फ गुमराह कर रही है. इसी का उदाहरण है फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा. 2017 में इसकी विज्ञप्ति निकाली गई लेकिन तीन साल बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई.
कब क्या हुआ

साल 2017 में सरकार ने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में सालों बाद फॉरेस्ट गार्ड के 1218 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की. लेकिन कुछ ही दिनों बाद इसे स्थगित कर दिया गया. तब तब 31 हजार से अधिक युवा इन पदों के लिए आवेदन कर चुके थे.

इसके बाद 2018 में दोबारा प्रक्रिया शुरू हुई. इस बार करीब साढ़े तीन लाख युवक युवतियों ने आवेदन किया लेकिन विभिन्न कारणों से यह परीक्षा लटकती चली गई. आखिरकार फरवरी 2020 में जाकर यह परीक्षा हो पाई लेकिन परीक्षा के दिन रुड़की, हरिद्वार आदि क्षेत्रों में पेपर लीक होने से मामला फिर खटाई में पड़ गया.

सरकार ने एसआईटी जांच बैठाई लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई. हालांकि, एसआईटी ने जांच रिपोर्ट परीक्षा की आयोजक संस्था अधीनस्थ सेवा चयन आयेाग को भेज दी है. आयोग का कहना है कि वह रिपोर्ट का परीक्षण कर रहा है.

सीएम ने कहा, कोविड के कारण हुई जांच में देरी

कांग्रेस ने आज प्रदर्शन कर मांग की कि सरकार नकल के दोषियों को दंडित कर, नकल वाले परीक्षा केंद्रों का परिणाम रोककर शेष रिज़ल्ट घोषित करे. कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मोर्चा संभाला. उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि सवाल वह कांग्रेस उठा रही है, जिसने कभी अपने कार्यकाल में जनता को कोई हिसाब नहीं दिया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हर साल जनता को अपने काम का हिसाब देती है. उन्होंने कहा कि कोविड के कारण एसआईटी जांच में थोड़ा देरी हुई लेकिन अब जल्द फैसला ले लिया जाएगा. सीएम ने आश्वस्त किया कि किसी भी युवा के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.

कोविड प्रोटोकॉल की परवाह नहीं

कांग्रेस के मंगलवार को हुए प्रदर्शन में कोविड प्रोटोकॉल की जमकर धज्जियां उड़ाई गई. फिर वह चाहे कांग्रेस का मुख्यालय हो, जहां कार्यकर्ता रैली के लिए एकजुट हुए, जहां सभा हुई या फिर सचिवालय कूच के दौरान.

पसीने से तर-बतर एक दूसरे से चिपटे हुए कांगेस कार्यकर्ता कोविड के संक्रमण से पूरी तरह बेफिक्र नजर आए. प्रीतम सिंह भी पूरे पद्रर्शन के दौरान इस भीड़ में मौजूद रहे, तो हरीश रावत भी.
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