सात साल से अपनी ज़िंदगी भर की कमाई के लिए भटक रहा है रिटायर प्रोफ़ेसर

सेवा काल में रहते हुए कॉलेज प्रबंधन ने प्रोफ़ेसर शर्मा को दो बार टर्मिनेट किया था लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली और कोर्ट ने उनके सभी भुगतान तुरंत करने के आदेश दिए.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 15, 2018, 8:15 PM IST
सात साल से अपनी ज़िंदगी भर की कमाई के लिए भटक रहा है रिटायर प्रोफ़ेसर
देहरादून के श्री गुरुराम राय पीजी कॉलेज से 2011 में रिटायर हुए प्रोफेसर एसके शर्मा को अब तक न तो जीपीएफ की रकम मिली है और न ही पेंशन मिल रही है.
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Updated: February 15, 2018, 8:15 PM IST
सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम सरकारी कर्मचारी के लिए बुढ़ापे का सहारा होती है. लेकिन देहरादून में एक बुजुर्ग पिछले सात साल से अपना ये हक पाने के लिए एड़ियां रगड़ रहा है. देहरादून के श्री गुरुराम राय पीजी कॉलेज से साल 2011 में रिटायर हुए प्रोफेसर एसके शर्मा को अब तक न तो जीपीएफ की रकम मिली है और न ही पेंशन मिल रही है.

प्रोफेसर एसके शर्मा पिछले दो साल से यूं ही सचिवालय में अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं. लेकिन अब तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिल पाई है. वह देहरादून के गुरुराम राय पीजी कॉ़लेज में जन्तु वित्रान विभाग में विभागाध्यक्ष थे और साल 2011 में रिटायर हो गए. लेकिन, रिटायरमेऩ्ट के बाद मिलने वाली रकम के लिए आज भी तरस रहे हैं. जीपीएफ की रकम तो छोड़िये पेंशन भी नहीं दी जा रही है.

प्रोफेसर शर्मा का मामला कॉलेज, उच्च शिक्षा निदेशालय और शासन के बीच त्रिशंकु की तरह लटक गया है. दरअसल सेवा काल में रहते हुए कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें दो बार टर्मिनेट किया था लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली और कोर्ट ने उनके सभी भुगतान तुरंत करने के आदेश दिए.

कोर्ट के आदेश के बाद शासन ने कॉ़लेज को कई चिट्ठियां लिखीं कि इनका भुगतान किया जाए लेकिन, अब तक हुआ कुछ भी नहीं. प्रोफेसर शर्मा कहते हैं कि उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग में धक्के खिलवाए जा रहे हैं.

इस मामले में आरोपों में घिरे कॉलेज प्रबंधन ने इस लेटलतीफी का सारा ठीकरा प्रोफेसर शर्मा पर ही फोड़ दिया. कॉलेज के प्रिंसिपल ने ये भी कहा कि उनकी ओर से कोई देरी नहीं की गई है. हालांकि इस खींचतान में प्रोफ़ेसर शर्मा की ज़िंदगी भर की कमाई फंसी हुई है और वह एक दफ़्तर से दूसरे दफ़्तर तक चक्कर काट रहे हैं. शासन के ज़िम्मेदार अधिकारी इस मामले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं.
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