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श्रीनगर NIT छात्रों की जयपुर शिफ़्टिंगः अभी रोकने की कोशिश कर रहे हैं CM- कौशिक

एनआईटी श्रीनगर के ज़्यादातर छात्र-छात्राओं को जयपुर शिफ़्ट किए जाने का प्रस्ताव है.

एनआईटी श्रीनगर के ज़्यादातर छात्र-छात्राओं को जयपुर शिफ़्ट किए जाने का प्रस्ताव है.

नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश कहती हैं कि छात्र-छात्राओं को सुरक्षा देना सरकार की ज़िम्मेदारी है जिसे वह ठीक से निबाह नहीं पा रही है.

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एनआईटी श्रीनगर से ज़्यादातर छात्र-छात्राओं को जयपुर शिफ्ट किए जाने की खबरों के बाद राजनीति तेज हो गई है और सवाल सरकार पर खड़े हो रहे हैं. सवाल है कि क्या चंद बाहरी छात्रों की दबाव की रणनीति के सरकार हार गई है? और दूसरा सवाल यह भी है कि अगर छात्र-छात्राएं ही शिफ्ट हो जाएंगे तो सिर्फ़ एनआईटी की बिल्डिंग का क्या मतलब रहेगा?

दो छात्राओं के कैंपस के बीच से गुज़र रहे बदरीनाथ मार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से 23 अक्टूबर से स्थायी कैंपस और सुविधाओं की मांग को लेकर श्रीनगर एनआईटी के छात्र-छात्राएं धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. पहले श्रीनगर में प्रदर्शन करने के बाद इन छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंच कर धरने पर बैठ गए थे.

सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए ये छात्र-छात्राओं एनआईटी को श्रीनगर से शिफ़्ट करने की मांग कर रहे थे. अब श्रीनगर एनआईटी के 980 में से 625 छात्र-छात्राओं को जयपुर शिफ्ट करने का प्रस्ताव आ गया है. अब इसे लेकर राजनीति तेज हो गई है क्योंकि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत ही नहीं, खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी साफ़ शब्दों में कहते रहे हैं कि श्रीनगर से एनआईटी को शिफ़्ट नहीं होने दिया जाएगा.

इस बारे में सवाल पूछने पर सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक सफ़ाई देते हैं कि एनआई को नहीं कुछछ छात्रों को शिफ़्ट किया जाएगा. हालांकि वह यह भी कहते हैं कि खुद मुख्यमंत्री भारत सरकार से बात कर रहे हैं कि छात्र-छात्राओं को भी राज्य से बाहर भेजे जाने की नौबत न आए.

कांग्रेस का इस पर पक्ष साफ़ नहीं है. नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश कहती हैं कि छात्र-छात्राओं को सुरक्षा देना सरकार की ज़िम्मेदारी है जिसे वह ठीक से निबाह नहीं पा रही है. वह श्रीनगर से एनआईटी को शिफ़्ट किए जाने को लेकर सवाल किए जाने पर कहती हैं कि उत्तराखंड से बाहर नहीं जाना चाहिए, राज्य में ही कहीं एनआईटी के लिए ज़मीन उपलब्ध करवाई जाए.

एनआईटी श्रीनगर सिर्फ एक संस्थान नहीं है और यह केंद्रीय संस्थान राज्य की साख और सम्मान से जुड़ गया है क्योंकि आंदोलनरत छात्र-छात्राएं सोशल मीडिया पर स्थानीय लोगों को गालियां भी दे रहे थे, जिसकी शिकायत की गई है और पुलिस जांच कर रही है. एनआईटी को लेकर राज्य सरकार सीधे  सवालों के घेरे में इसलिए भी है क्योंकि उच्च शिक्षा मंत्री और खुद मुख्यमंत्री का जोर-शोर से किया जा रहा दावा, श्रीनगर एनआईटी को कहीं नहीं जाने दिया जाएगा, खोखला साबित हो रहा है. अगर एनआईटी के छात्र श्रीनगर छोड़कर जयपुर शिफ़्ट हो जाते हैं तो दबी ज़ुबान से ही सही कहा जाएगा कि राजनीति के बड़े खिलाड़ी कॉलेज के बच्चों से हार गए.

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