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देहरादून के सरकारी स्कूलों के बच्चों में फैल रहा है चर्म रोग! कई बच्चों को फोड़े-फुंसी की शिकायत
Dehradun News in Hindi

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: February 11, 2020, 1:22 PM IST
देहरादून के सरकारी स्कूलों के बच्चों में फैल रहा है चर्म रोग! कई बच्चों को फोड़े-फुंसी की शिकायत
सरकारी स्कूलों के बच्चों के सिर से लेकर शरीर तक में फोड़े फुंसी हो रहे हैं.

शिक्षा निदेशक आरके कुंवर का कहना है कि उन्हें इस बारे में न्यूज़ 18 से ही पता चल रहा है.

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देहरादून. देहरादून में कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को चर्म रोग की शिकायत हो रही है. कई बच्चों के स्किन में फोड़े फुंसी हो रहे हैं जो सिर तक में फैल रहे हैं. आशंका यह है कि ये बीमारी एक बच्चे से दूसरे में फैल रही है. यह बीमारी टीचर्स की टेंशन बढ़ा रही है लेकिन अभी तक शिक्षा विभाग इसे लेकर संजीदा नहीं हुआ है.

वजह पर कन्फ़्यूज़न

सरकारी स्कूलों के बच्चों के सिर से लेकर शरीर तक में फोड़े फुंसी हो रहे हैं और कई बच्चों को एक साथ होने से टीचर्स परेशान हो गई हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ऐसा स्कूल के पानी की वजह से हो रहा है या फिर बच्चों में साफ़ सफाई की कमी की वजह से. डर है कि यह बीमारी एक बच्चे से यह दूसरे बच्चे में भी फैलने लगी है.

स्कूल में नहला रहीं टीचर्स

जीजीआईसी नवादा की प्रिसिंपल रजनी बडोनी बताती हैं कि टीचर्स इस कदर परेशान हैं कि वह स्कूलों में ही बच्चों को नहलाने लगे हैं. बडोनी कहती हैं कि वह लगातार कोशिश करती हैं कि बच्चों के साथ-साथ उनके मां-बाप को भी साफ़-सफ़ाई का महत्व बताया जाए और ख़ासतौर पर आजकल बार-बार उन्हें संदेश दिए जा रहे हैं.

इसी स्कूल में शिक्षिका सुनीता उनियाल कहती हैं कि स्कूल में आने वाले ज़्यादातर बच्चे कमज़ोर आर्थिक पृष्ठभूमि के होते हैं और उनके मां-बाप के पास अक्सर इतना समय नहीं होता कि वह बच्चों की सफ़ाई का पूरा ध्यान रख सकें. इसलिए बच्चों की सफ़ाई पर टीचर्स को ही ध्यान देना पड़ता है.

शिक्षा विभाग अनजान हालत यह है कि कुछ स्कूलों में तो टीचर्स बच्चों को शैम्पू तक बांटने लगे हैं. लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. शिक्षा निदेशक आरके कुंवर कहते हैं कि उन्हें इस बारे में न्यूज़ 18 से ही पता चल रहा है.

हालांकि कुंवर कहते हैं कि पिछले साल हरिद्वार से भी शिकायत आई थी कि वहां हैंडपंप का पानी साफ़ नहीं आ रहा था तो वहां वाटर प्यूरिफाइर लगाए गए थे. शिक्षा निदेशक के अनुसार कोशिश है कि सभी स्कूलों में शुद्ध जल उपलब्ध करवाया जाए.

बहरहाल बच्चों में अगर इस तरह की बीमारी हो रही है तो यह एक गंभीर विषय है जिसपर शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों को हरकत में आने की ज़रूरत है.

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First published: February 11, 2020, 1:19 PM IST
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