...तो कांग्रेस को अनुभवी नेताओं की ज़रूरत नहीं, प्रीतम सिंह ने कहा सबको कार्यकारिणी में नहीं ले सकते

प्रीतम सिंह का कहना है किकांग्रेस में अनुभवी नेताओं की कोई कमी नहीं है और ऐसा नहीं हो सकता कि सभी को कार्यकारिणी में शामिल कर लिए जाए.
प्रीतम सिंह का कहना है किकांग्रेस में अनुभवी नेताओं की कोई कमी नहीं है और ऐसा नहीं हो सकता कि सभी को कार्यकारिणी में शामिल कर लिए जाए.

प्रीतम सिंह ने कहा कि कांग्रेस में अनुभवी नेताओं की कोई कमी नहीं है और ऐसा नहीं हो सकता कि सभी को कार्यकारिणी में शामिल कर लिए जाए.

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देहरादून. ढाई साल बाद जब उत्तराखंड कांग्रेस (Utatrakhand Congress) की प्रदेश कार्यकारिणी (PCC) भंग हुई तो उम्मीद की जा रही थी कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह (Pritam Singh) सभी गुटों को साथ लेकर चलेंगे ताकि 2022 में पार्टी बीजेपी को टक्कर देने की स्थिति में आ सके. लेकिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के हालिया बयान से नहीं लगता कि उसे छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और झारखंड (Jharkhand) की तरह उत्तरखंड में सत्ता में वापसी चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि उत्तराखंड कांग्रेस में जो गुटबाज़ी चरम पर है, उसे थामने की कोशिश होती नहीं दिख रही है.

किस पर निशाना

उत्तराखंड में बेजान पड़ी कांग्रेस में अनुभवी नेताओं की जरुरत तो है लेकिन पार्टी में शायद अनुभव से ज्याद नेताओं के गुट को ध्यान में देखा जा रहा है. प्रदेश कार्यकारिणी गठन में अनुभवी नेताओं को शामिल करने के सवाल पर प्रीतम सिंह ने जो जवाब दिया उससे लगता नहीं कि वह सबको साथ लेकर चलने के पक्ष में हैं. प्रीतम सिंह ने कहा कि कांग्रेस में अनुभवी नेताओं की कोई कमी नहीं है और ऐसा नहीं हो सकता कि सभी को कार्यकारिणी में शामिल कर लिए जाए.



उत्तरखंड की राजनीतिक में यह बात सब जानते हैं कि हरीश रावत, किशोर उपध्याय और प्रीतम सिंह इस समय अलग-अलग राजनीतिक धुरी बने हुए हैं. इसलिए प्रदेश अध्यक्ष का सभी अनुभवी नेताओं को शामिल न करने का बयान इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा.
हुड़दंगी चाहिएं कांग्रेस को

अब कांग्रेस में खींचतान मची हो तो भाजपा मज़े लेने का कोई मौका नहीं चूकना चाहती. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट चुटीले अंदाज में कहते हैं कि कांग्रेस को अनुभवी नेता नहीं, हुड़दंगी चाहिएं (सीएए पर विरोध के संदर्भ में).

अगर कांग्रेस को 2022 के विधानसभा चुनाव जीत कर सत्ता पर कब्ज़ा करना है तो पार्टी को अनुभवी नेताओं को ज़िम्मेदारी भी देनी होगी और पार्टी की गुटबाज़ी पर भी काबू करना होगा तभी कांग्रेस को अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस कर पाएगी. वरना... कांग्रेस का हाल उत्तराखंड में भी उत्तर प्रदेश की तरह हो जाएगा.

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