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...तो उत्तराखंड में पहुंच ही गई ईवी क्रांति, दून की सड़कों पर दौड़ने के लिए चार्ज हुईं इलेक्ट्रिक कारें

...तो उत्तराखंड में पहुंच ही गई ईवी क्रांति, दून की सड़कों पर दौड़ने के लिए चार्ज हुईं इलेक्ट्रिक कारें

यूपीसीएल ने ईईसीएल से पांच गाड़ियां किराए पर ले ली हैं जो चार्ज हो चुकी हैं.

यूपीसीएल ने ईईसीएल से पांच गाड़ियां किराए पर ले ली हैं जो चार्ज हो चुकी हैं.

उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी यूपीसीएल को प्रदेश में पहली ग्रीन प्लेट वाली गाड़ियां चलाने का श्रेय मिलने जा रहा है.

देहरादून. केंद्र सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को पूरी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल वाला देश बनाने का है. उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य अब तक इस लक्ष्य को पाने में मुश्किल की तरह नज़र आ रहे थे क्योंकि यहां कई असफल प्रयासों के बावजूद एक भी ई-व्हीकल नहीं चल पाया है. बहरहाल राज्य के ऊर्जा विभाग ने इसे बदलने की शुरुआत कर दी है. अब जल्द ही ग्रीन प्लेट वाली 5 टाटा टिगोर इलेक्ट्रिक कार यूपीसीएल के कामों से शहर में दौड़ती नज़र आएंगी.

ई-क्रांति से दूर

बता दें कि ईवी क्रांति में शामिल होने का असफल प्रयास उत्तराखंड दो से ज़्यादा बार कर चुका है. पहले अप्रैल 2018 में सचिवालय में ट्रायल पर इलेक्ट्रिक कार लाई गई थीं लेकिन चार्जिंग स्टेशन न बन पाने की वजह से वह खड़ी हो गईं और फिर वापस चली गईं. इसके बाद देहरादून से मसूरी और हल्द्वानी से नैनीताल तक ई-बस के ट्रायल किए गए लेकिन ये इतनी महंगी पड़ रही हैं कि फ़िलहाल इनके चलने की कोई संभावना नज़र नहीं आ रही.

उत्तराखंड जैसा सीमांत और पहाड़ी राज्य अभी ई-क्रांति से दूर ही नज़र आ रहा है. बजाज ई-स्कूटर हों, रिवोल्ट ई-बाइक या टाटा-महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कारें... अभी ये देहरादून जैसे शहर में भी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं हैं. टाटा से 5 इलेक्ट्रिक टिगोर कारें ईईसीएल ने यूपीसीएल के लिए ली हैं और अभी तक इन गाड़ियों की पब्लिक बुकिंग शुरु नहीं हुई है. महिंद्रा की ई-केयूवी 100 अब तक देहरादून पहुंची ही नहीं है और यह अभी दिल्ली में ही उपलब्ध है.

EV UPCL, यूपीसीएल ने अपनी पार्किंग में इनके लिए जगह आरक्षित कर दी है और वहां एसी, डीसी चार्जर भी लगा दिए गए हैं ताकि चार्जिंग न होने की वजह से यह गाड़ियां रुकें नहीं.
यूपीसीएल ने अपनी पार्किंग में इनके लिए जगह आरक्षित कर दी है और वहां एसी, डीसी चार्जर भी लगा दिए गए हैं ताकि चार्जिंग न होने की वजह से यह गाड़ियां रुकें नहीं.


बदलाव की शुरुआत

लेकिन इस स्थिति में बदलाव की शुरुआत हो गई है. उत्तराखंड में विद्युत आपूर्ति करने वाले निगम उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी यूपीसीएल को प्रदेश में पहली ग्रीन प्लेट वाली गाड़ियां चलाने का श्रेय मिलने जा रहा है. यूपीसीएल ने ईईसीएल से पांच गाड़ियां किराए पर ले ली हैं जो चार्ज हो चुकी हैं और देहरादून की सड़कों पर दौड़ने के लिए तैयार हैं.

ये पांच गाड़ियां पहली ऐसी गाड़ियां होंगी जो नियमित रूप से सड़कों पर दौड़ेंगी. इससे पहले के असफल प्रयासों को देखते हुए यूपीसीएल ने अपनी पार्किंग में इनके लिए जगह आरक्षित कर दी है और वहां एसी, डीसी चार्जर भी लगा दिए गए हैं ताकि चार्जिंग न होने की वजह से यह गाड़ियां रुकें नहीं.

20 साल पुरानी गाड़ियों की लेंगी जगह

यूपीसीएल के एमडी बीसीके मिश्रा बताते हैं कि फ़ुल चार्ज में ये गाड़ियां 100 किलोमीटर चलेंगीं और इनकी चार्जिंग पर खर्च प्रति किलोमीटर औसतन 85 पैसे आएगा. ड्राइवर यूपीसीएल के ही रहेंगे जो पहले से उपनल के माध्यम से निगम के लिए काम कर रहे हैं. इलेक्ट्रिक कार चलाने के लिए इन्हें ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है और अब यह गाड़ियां लेकर सड़क पर उतरने को तैयार हैं.

EV UPCL, ये पांच गाड़ियां पहली ऐसी गाड़ियां होंगी जो नियमित रूप से सड़कों पर दौड़ेंगी.
ये पांच गाड़ियां पहली ऐसी गाड़ियां होंगी जो नियमित रूप से सड़कों पर दौड़ेंगी.


मिश्रा बताते हैं कि ये पांच कारें निगम की 20 साल पुरानी अंबेज़डर कारों की जगह लेंगी. ये अंबेज़डर कारें चलाना यूपीसीएल को काफ़ी महंगा पड़ता था. ये कारें सिर्फ़ 5-6 का माइलेज देती थीं और ज़ाहिर तौर पर इनका मेंटेनेंस का खर्च भी काफ़ी था. इनकी जगह इलेक्ट्रिक कारों के इस्तेमाल से यूपीसीएल को अच्छी खासी बचत होने वाली है.

लाखों की बचत

यूपीसीएल एमडी के अनुसार यूपीसीएल ज़्यादातर कामों के लिए तो टैक्सी का इस्तेमाल करता है लेकिन शहर के अंदर छोटे-मोटे विभागीय कामों के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था. ये कारें औसतन 50 किलोमीटर प्रतिदिन चलती थीं.

इस आधार पर हमने इन कारों की जगह ई-कार चलने से होने वाली बचत का अनुमान लगाया.

EV UPCL, फ़ुल चार्ज में ये गाड़ियां 100 किलोमीटर चलेंगीं और इनकी चार्जिंग पर खर्च प्रति किलोमीटर औसतन 85 पैसे आएगा.
फ़ुल चार्ज में ये गाड़ियां 100 किलोमीटर चलेंगीं और इनकी चार्जिंग पर खर्च प्रति किलोमीटर औसतन 85 पैसे आएगा.


300 दिन न्यूनतम 50 किलोमीटर के हिसाब से ये 5 कारें कम से साल में 15000X5=75000 किलोमीटर चलती होंगी.

5-6 किलोमीटर का ऐवरेज देती थीं यह गाड़ियां यानी 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से इन गाड़ियों की लागत करीब साढ़े दस रुपये प्रति किलोमीटर आएगी.

नई इलेक्ट्रिक कारों की लागत आएगी 85 पैसे प्रति किलोमीटर यानी कम से कम 9 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत. इस तरह यूपीसीएल को कम से कम 6.75 लाख रुपये की सालाना बचत होगी.

यूपीसीएल एमडी कहते हैं कि जब लो कॉस्ट में पॉल्यूशन फ्री गाड़ियां हमारे पास आ जाएंगी तो हम उनका ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करेंगे और टैक्सियों का इस्तेमाल कम हो जाएगा. इसके अलावा मेंटेनेंस का खर्च भी बचेगा. इसलिए वास्तविक बचत 6.75 लाख से कहीं ज़्यादा. शायद दोगुने से भी ज़्यादा हो सकती है.

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Tags: Dehradun news, Electric Car, Uttarakhand news

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