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तो सही था गैरसैंण में शीतकालीन सत्र न कराने का सरकार का फ़ैसला! ‘अब भी इंतज़ाम करना मुश्किल’

तो सही था गैरसैंण में शीतकालीन सत्र न कराने का सरकार का फ़ैसला! ‘अब भी इंतज़ाम करना मुश्किल’

अब तक के संकेत ऐसे मिल रहे हैं कि यह सत्र भी गैरसैंण में हुए अन्य सत्रों की तरह बेहद संक्षिप्त रहेगा क्योंकि सरकार के अनुसार गैरसैंण में रुकने के इंतज़ाम पर्याप्त नहीं हैं.

अब तक के संकेत ऐसे मिल रहे हैं कि यह सत्र भी गैरसैंण में हुए अन्य सत्रों की तरह बेहद संक्षिप्त रहेगा क्योंकि सरकार के अनुसार गैरसैंण में रुकने के इंतज़ाम पर्याप्त नहीं हैं.

सूचना विभाग का कहना है कि गैरसैंण में रहने-खाने की व्यवस्था करना एक दुष्कर काम है और इसलिए सरकार ने चुनिंदा पत्रकारों को ही ले जाने का फ़ैसला किया है.

देहरादून. एक साल तक गैरसैंण से दूर रहने के बाद आखिरकार उत्तराखंड सरकार गैरसैंण में विधानसभा का बजट सत्र आयोजित करने जा रही है. अब तक के संकेत ऐसे मिल रहे हैं कि यह सत्र भी गैरसैंण में हुए अन्य सत्रों की तरह बेहद संक्षिप्त रहेगा क्योंकि सरकार के अनुसार गैरसैंण में रुकने के इंतज़ाम पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि क्या शीतकालीन सत्र गैरसैंण में करवाने का सरकार का फ़ैसला सही था? और यह भी कि जब विधानसभा ही गैरसैंण में हफ़्ते भर नहीं चल सकती तो क्या वहां कभी राजधानी बन पाएगी?

कितना तैयार गैरसैंण

2014 के बाद 2019 पहला ऐसा साल गुज़रा जिसमें गैरसैंण में कोई सत्र करने की रस्म अदायगी तक नहीं हुई. शीतकालीन सत्र गैरसैंण में कराए जाने की वजह सीएम ने सर्दी को बताया था. उन्होंने कहा कि विधानसभा में कई बुजुर्ग विधायक हैं, जिनकी बात सरकार को सुननी होती है. त्रिवेंद्र सरकार का तर्क यह भी था गैरसैंण में सत्र आयोजन के इंतज़ाम पर्याप्त नहीं हैं.

हालांकि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने इसका प्रतिकार किया था और कहा था कि गैरसैंण में सत्र के आयोजन की पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं और ये पिछली बार से बेहतर हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि साल में कम से कम एक सत्र तो विधानसभा में होना ही चाहिए.

इस बार की तैयारी?

शीतकालीन सत्र के दौरान सर्दी से बचने के लिए सरकार को ज़्यादा इंतज़ाम करने होते, ज़्यादा खर्च करना होता. उसकी तुलना में 3 मार्च से होने वाले बजट सत्र का आयोजन आसान और सुविधाजनक होगा लेकिन क्या ऐसा है?

gairsain assembly building, पिछले साल शीतकालीन सत्र गैरसैंण में कराए जाने की वजह सीएम ने सर्दी को बताया था.
पिछले साल शीतकालीन सत्र गैरसैंण में कराए जाने की वजह सीएम ने सर्दी को बताया था.


राज्य के सूचना विभाग ने इंतज़ाम पर्याप्त न होने का हवाला देकर विधानसभा की कवरेज के लिए बेहद सीमित संख्या में पत्रकारों को पास जारी करने का फ़ैसला किया है. विभाग का कहना है कि गैरसैंण में रहने-खाने की व्यवस्था करना एक दुष्कर काम है और इसलिए सरकार ने चुनिंदा पत्रकारों को ही ले जाने का फ़ैसला किया है.

‘सवाल उठाने वाले नहीं चाहिएं’

वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट इस पर सवाल उठाते हैं. वह कहते हैं कि सूचना विभाग चाहे तो आराम से पत्रकारों के रहने का इंतज़ाम कर सकता है लेकिन वह यह चाहता ही नहीं है. भट्ट कहते हैं कि दरअसल सरकार मेनस्ट्रीम के उन्हीं पत्रकारों को ले जाना चाहती है, जिनके बारे में तय है कि वह उसके पक्ष में लिखेंगे.

फंडा साफ़ है जिन मीडिया हाउसों को सरकार भारी-भरकम विज्ञापन देती है वह उसके ख़िलाफ़ नहीं जाएगें लेकिन स्वतंत्र पत्रकार ऐसे सवाल पूछ सकते हैं, ऐसी रिपोर्ट कर सकते हैं जो उसे असहज बनाएं.

yogesh bhatt, योगेश भट्ट कहते हैं कि दरअसल सरकार मेनस्ट्रीम के उन्हीं पत्रकारों को ले जाना चाहती है, जिनके बारे में तय है कि वह उसके पक्ष में लिखेंगे.
योगेश भट्ट कहते हैं कि दरअसल सरकार मेनस्ट्रीम के उन्हीं पत्रकारों को ले जाना चाहती है, जिनके बारे में तय है कि वह उसके पक्ष में लिखेंगे.


योगेश भट्ट पूछते हैं कि आखिर सरकार मान्यता देने का यह स्वांग भी क्यों रचती है? आप 20 साल काम करने के सबूत मांगते हैं, उनकी जांच करते हैं और फिर मान्यता देते हैं. आखिर किसलिए? जब आप उन्हें किसी कार्यक्रम में शामिल ही नहीं होने देंगे तो फिर इस मान्यता की भी क्या ज़रूरत है. भट्ट कहते हैं सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि ऐसा करके वह चौथे स्तंभ को और लोकतंत्र को भी कमज़ोर कर रही है.

अभी चलेगा गैरसैंण का खेल

उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंण में होनी चाहिए या नहीं यह सवाल बीजेपी-कांग्रेस के बीच वॉलीबॉल की तरह पिछले 20 साल से उछल रहा है. हर बार चुनाव के दौरान इस खेल में तेज़ी आ जाती है और चुनाव के बाद गेम ओवर हो जाता है.

सरकार की तैयारियों से तो लग रहा है कि यह गैरसैंण नाम की वॉलीबॉल अभी और उछाली जाती रहेगी क्योंकि इस सब पर सवाल पूछने वाले लोग दर्शक दीर्घा में भी मौजूद नहीं होंगे.

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Tags: Gairsain, Uttarakhand Capital Issue, Uttarakhand news

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