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परंपरा बरकरार, कपाट नहीं खुले लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में की गई भगवान बद्रीनाथ की पूजा

तीर्थ पुरोहित, हकहकूकधारी एवं पंडा समाज के लोगों ने भगवान नारायण का पूजन अर्चना, हवन और विष्णु सहस्रनाम पाठ अपने-अपने घरों से किया.

तीर्थ पुरोहित, हकहकूकधारी एवं पंडा समाज के लोगों ने भगवान नारायण का पूजन अर्चना, हवन और विष्णु सहस्रनाम पाठ अपने-अपने घरों से किया.

सरकार के दबाव में टिहरी नरेश ने बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि में तो परिवर्तन कर दिया, लेकिन बाकी तीनों धामों के कपाट पूर्व निर्धारित समय पर ही खुले.

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देहरादून. पूर्व निर्धारित तिथि और मुहूर्त के अनुसार आज यानी गुरुवार को बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) के कपाट तो नहीं खुले, लेकिन धाम में पूजा-अर्चना जरूर की गई. बद्रीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूक धारियों, पंडा समाज और बद्रीनाथ मंदिर की परंपरा से जुड़े लोगों ने ब्रह्म मुहूर्त में भगवान नारायण की पूजा, अर्चना, हवन के साथ ही विष्णुसहस्रनाम का पाठ किया. यह पाठ इसलिए किया गया, ताकि सदियों से चली आ रही परंपरा को अक्षुण्ण रखा जा सके. दरअसल ज्ञात इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि और मुहूर्त की घोषणा हो जाने के बाद उसे बदला गया हो.

तीनों धामों के कपाट खुले निर्धारित मुहूर्त पर

बता दें कि बद्रीनाथ धाम के कपाट 30 अप्रैल यानी वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत सिद्धि योग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में 4:30 बजे खोले जाने थे. लेकिन कोरोना वायरस, COVID-19 संक्रमण फैलने की वजह से इस साल टिहरी नरेश ने कपाट की तिथि में बदलाव कर दिया. अब बद्रीनाथ धाम के कपाट 15 मई को खुलेंगे.

सरकार के दबाव में टिहरी नरेश ने बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि में तो परिवर्तन कर दिया लेकिन केदारनाथ मंदिर के साथ ही गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के पंडा पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के विरोध की वजह से बाकी तीनों धामों के कपाट पूर्व निर्धारित समय पर ही खुले.

पीठाधीश्वर शंकराचार्य की चेतावनी

ज्योतिर्पीठ के पीठाधीश्वार शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भी उत्तराखंड सरकार से बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि आगे बढ़ाने के निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए कहा था कि ‘शुभ तिथि को बदलना देव शक्तियों के प्रकोप को आमंत्रित करना होगा.’ शंकराचार्य ने बीते शनिवार को यूपी के मथुरा में कहा था कि ‘ऐसे समय में जब देश कोविड-19 संकट का सामना कर रहा है, देव शक्तियों को प्रसन्न करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए.’

अपने-अपने घरों में पूजा

देवभूमि तीर्थ पुरोहित हक हकूक धारी महापंचायत के प्रवक्ता डॉक्टर बृजेश सती के अनुसार सदियों से चली आ रही इस परंपरा को अक्षुण्ण रखने के लिए देवभूमि तीर्थ पुरोहित हक-हकूकधारी महापंचायत ने निर्णय लिया कि पूर्व मुहूर्त के अनुसार ही सभी तीर्थ पुरोहित, हकहकूकधारी एवं पंडा समाज के लोग भगवान नारायण का पूजन अर्चना, हवन और विष्णु सहस्रनाम पाठ अपने-अपने घरों करेंगे. इसी क्रम में गुरुवार को सभी तीर्थ पुरोहितों एवं पंडा समाज के लोगों ने भगवान नारायण का पूजन-अर्चन और हवन कर भगवान नारायण से क्षमा याचना के साथ देश के सभी नागरिकों की मंगल कामना की गई.

महापंचायत के अध्यक्ष कृष्णकांत कोठियाल के दिशा निर्देशन में महापंचायत से जुड़ी डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत, ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत, बद्रीश पंडा पंचायत देवप्रयाग और बद्रीनाथ धाम से जुड़ी परंपरा के लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए.

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