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ताकि कोर्ट में खारिज न हो जाए पुलिस का केस... देहरादून के पुलिसकर्मियों ने देखी फ़िल्म ‘सेक्शन 375’
Dehradun News in Hindi

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: January 30, 2020, 10:36 AM IST
ताकि कोर्ट में खारिज न हो जाए पुलिस का केस... देहरादून के पुलिसकर्मियों ने देखी फ़िल्म ‘सेक्शन 375’
देहरादून के एसएसपी, डीआईजी अरुण मोहन जोशी, की पहल पर पुलिसकर्मियों को धारा 375 फ़िल्म दिखाई गई.

धारा 375, जो एक कोर्ट रूम ड्रामा है और कानूनी खींचतान पर आधारित है.

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देहरादून. कई बार ऐसा होता है कि कोई आपराधिक केस सुलझाकर अपनी पीठ थपथपाने वाली पुलिस को कोर्ट में मुंह की खानी पड़ती है. ऐसा पर्याप्त सबूत न जुटा पाने या किसी कानूनी पेच का ध्यान न रख पाने की वजह से भी होता है. ऐसा आगे से न हो इसलिए देहरादून पुलिस ने एक अनोखा प्रयोग किया. देहरादून के एसएसपी, डीआईजी अरुण मोहन जोशी, की पहल पर पुलिसकर्मियों को एक फ़िल्म दिखाई गई. यह फ़िल्म है, धारा 375, जो एक कोर्ट रूम ड्रामा है और कानूनी खींचतान पर आधारित है.

यहां देखी फ़िल्म

एसएसपी के अनुसार किसी भी केस की इंवेस्टिगेशन में गुणात्मक सुधार और विवेचना के दौरान होने वाली कमियों और इससे अदालत में केस के कमज़ोर होने पर आधारित फिल्म सेक्शन 375 को ज़िले के विभिन्न थानों में नियुक्त महिला उपनिरीक्षक/उप निरीक्षकों को दिखाया गया.

पुलिसकर्मियों ने देहरादून के पेसिफिक मॉल में यह फ़िल्म देखी. एसएसपी के अनुसार यह फिल्म को दिखाने का मुख्य उद्देश्य विवेचना के दौरान की जाने वाली कमियों को परिलक्षित कर विवेचनाधिकारी के विवेचनात्मक ज्ञान को बढ़ाना है. इस फ़िल्म के माध्यम से किसी सूचना के प्राप्त होने से लेकर उस पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी और पुलिस द्वारा इस दौरान की जाने वाली कमियों को उजागर करना है.

ये सीखना है...

इस फ़िल्म के माध्यम से उपस्थित अधिकारियों को निम्न कार्यवाहियों के संबंध में और अधिक जागरूक किया जा रहा है...

जब थाने पर प्राथमिक सूचना मिलती है तो उस पर त्वरित कार्रवाई क्या होनी चाहिए.विवेचना के दौरान रुटीन में पुलिसकर्मी ऐसी कौन सी कमियां करते हैं, जिससे ऐसे केसेज कोर्ट में छूट जाते हैं.

इन्वेस्टिगेशन के दौरान क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिएं कि कोर्ट में केस ठीक से चल सकें और अपराधी को सज़ा मिल सके .

110 पुलिसकर्मी, अधिकारियों ने देखी फ़िल्म

इस उद्देश्य के साथ यह फिल्म ज़िले के विभिन्न थानों में नियुक्त 110 महिला उपनिरीक्षक/उप निरीक्षकों और अन्य उच्चाधिकारियों को दिखाई गई. इनमें ऐसे पुलिसकर्मी, अधिकारी शामिल थे  जो या तो इस तरह के अभियोगों की विवेचना कर रहे हैं या उनका पर्यवेक्षण कर रहे हैं.

 

 

 

 

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First published: January 30, 2020, 10:34 AM IST
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