Home /News /uttarakhand /

सपा, बसपा व कांग्रेस के लीडरों में सॉफ्ट बयानबाज़ी, खत्म नहीं हुई गठबंधन की गुंजाइश

सपा, बसपा व कांग्रेस के लीडरों में सॉफ्ट बयानबाज़ी, खत्म नहीं हुई गठबंधन की गुंजाइश

प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

उत्तराखंड की सियासत को करीब से देखने वाले भी मानते हैं कि अगर माया और अखिलेश का साथ कांग्रेस को उत्तराखंड में मिल जाए तो पिछले आम चुनाव में पांचो लोकसभा सीट हारने वाली कांग्रेस को भाजपा से मुक़ाबला करना आसान हो सकता है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से दूरी बना चुकी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की उत्तराखंड में क्या रणनीति है? पांच लोकसभा सीटों वाले उत्तराखंड प्रदेश में क्या कांग्रेस के लिए वोट मांगेगी सपा और बसपा या अपने प्रत्याशी आजमाएंगे अखिलेश और मायावती ? आखिर चुनाव की दहलीज़ पर खड़े इन दोनों क्षेत्रीय सियासी दलों की क्या है उत्तराखंड में तैयारी ?

कभी उत्तराखंड में सत्ता की चाभी अपने पास रखने वाली बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस की हुकूमत में साझीदार हुआ करती थी. उत्तर प्रदेश से लगे हरिद्वार, उधमसिंह नगर, हल्द्वानी और देहरादून में बसपा का बड़ा कैडर वोट बैंक हुआ करता था. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. पार्टी के लिए राह आज उतनी आसान नहीं रही है, क्योंकि, न तो पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर और न ही राज्य स्तर पर संगठन उत्तराखंड को लेकर सक्रिय भूमिका में नज़र आ रहा है. अब ऐसे में मायावती कांग्रेस के हाथ पहाड़ में मजबूत करती हैं या उनके साथ दो-दो हाथ करती हैं, ये दिलचस्प सवाल बना हुआ है.

उत्तराखंड निर्माण के आंदोलन में खलनायक माने जाने वाली समाजवादी पार्टी के लिए वैसे तो पहाड़ में ज्यादा कुछ खोने और पाने के लिए नहीं है. लेकिन वक्त के साथ थोड़ा जनाधार इनका भी बढ़ा है. ऐसे में अखिलेश मायावती की जुगलबंदी भाजपा और कांग्रेस का खेल बिगाड़ दे तो कोई हैरानी नहीं होगी. उत्तराखंड की सियासत को करीब से देखने वाले भी मानते हैं कि अगर माया और अखिलेश का साथ कांग्रेस को उत्तराखंड में मिल जाए तो पिछले आम चुनाव में पांचो लोकसभा सीट हारने वाली कांग्रेस को भाजपा से मुक़ाबला करना आसान हो सकता है.

उत्तर प्रदेश में जिस तरह से सपा, बसपा और कांग्रेस के लीडरों में सॉफ्ट बयानबाज़ी का दौर चल रहा है, उससे इतना तो इशारा मिल ही रहा है कि गठबंधन पर गुंजाइश अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. लिहाजा नेता भी अभी साफ-साफ कुछ नहीं बोल पा रहे हैं और पांचों लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारी का दावा ज़रूर कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें - कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बावरिया गिरोह के होने की आशंका, बढ़ाई गई गश्ती

ये भी देखें - VIDEO: साल 2018: दुष्कर्म व साइबर क्राइम की घटनाओं में दर्ज की गई बढ़ोत्तरी

Facebook पर उत्‍तराखंड के अपडेट पाने के लिए कृपया हमारा पेज Uttarakhand लाइक करें.

Tags: Uttarakhand news

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर