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श्राइन बोर्ड पर पलटे चार धाम विकास परिषद उपाध्यक्ष ममगांई.... तीर्थ पुरोहितों से कहा विरोध छोड़, सहयोग करें

शिव प्रसाद ममगांई का कहना है कि मुख्यमंत्री ने समझाया है कि तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के अधिकारों में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है.

शिव प्रसाद ममगांई का कहना है कि मुख्यमंत्री ने समझाया है कि तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के अधिकारों में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है.

देवभूमि तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत ने कहा है कि ममगांई पहले यह स्पष्ट करें क सरकार में उनकी क्या भूमिका है, इसके बाद बात करें.

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देहरादून. चार धाम देवस्थानम (श्राइन) बोर्ड के मुद्दे पर सरकार चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद ममगांई ने पाला बदल लिया है. उन्होंने तीर्थ पुरोहितों के बोर्ड का विरोध छोड़ने को कहा है. बता दें कि तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत के दबाव में ममगांई ने इस्तीफ़ा दे दिया था और बोर्ड का विरोध कर रहे थे. ममगांई के पाला बदलने के बाद तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत ने उनसे अपनी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है.

CM ने समझाया, समझ गए ममगांई 

चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद ममगांई का कहना है कि उन्होंने इसलिए अपने पद से इस्तीफ़ा दिया था क्योंकि उन्हें लग रहा था कि तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के अधिकारों में दखलअंदाज़ी हो रही है. लेकिन मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफ़ा अस्वीकार कर दिया है और समझाया है कि तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के अधिकारों में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है.

ममगांई ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें तीर्थ पुरोहितों से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी है इसलिए अब तीर्थ-पुरोहितों को राजनीति औऱ विरोध छोड़कर बात करनी चाहिए. ममगांई ने देवभूमि तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत के विरोध को अनावश्यक करार दिया. उन्होंने कहा कि ये लोग सिर्फ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं जिसका कोई आधार नहीं है. अब यात्रा की तैयारी का काम देखना है और तीर्थ-पुरोहितों को इसमें सहयोग करना चाहिए.

महापंचायत ने कहा... भूमिका स्पष्ट करें 

देवभूमि तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत ने ममगांई के बयान पर करारा जवाब दिया है. महापंचायत के प्रवक्ता बृजेश सती कहते हैं कि ममगांई के बयान में विरोधाभास है. 27 नवंबर को जब उनकी अध्यक्षता में चार धाम विकास परिषद की पहल पर विधि आयोग के अध्यक्ष की मौजूदगी में  चार धामों के तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारियों से उनके सुझाव वह आपत्तियां मांगी जा रही थी तब उसी समय राज्य कैबिनेट ने श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव पारित कर दिया था. ममगांई को भी राज्य कैबिनेट के फैसले का पता नहीं था.

सती कहते हैं कि ममगांई ने 28 नवंबर को तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में त्यागपत्र देने की बात कही थी. अब वह अपने बयान से पलट कैसे रहे हैं? देवभूमि तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत का स्पष्ट कहना है कि ममगांई पहले यह स्पष्ट करें क सरकार में उनकी क्या भूमिका है, इसके बाद तीर्थ पुरोहितों व हक-हकूकधारियों से बातचीत की बात करें.

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