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2024 ओलंपिक में मेडल के लिए अभी से जुट जाए खेल विभाग, विदेशी कोच भी चाहिए तो मिलेंगेः CM

खेल महाकुंभा का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि उत्तराखण्ड से खेल प्रतियोगिताओं में बालिकाओं की हिस्सेदारी भी बालकों के बराबर है.

खेल महाकुंभा का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि उत्तराखण्ड से खेल प्रतियोगिताओं में बालिकाओं की हिस्सेदारी भी बालकों के बराबर है.

मुख्यमंत्री ने देहरादून में राज्य स्तरीय खेल महाकुम्भ का शुभारम्भ किया. इसके तहत 03 जनवरी से 20 फरवरी तक देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी में प्रतियोगिताएं होंगी.

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देहरादून. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि 2024 में होने वाले ओलंपिक खेलों में उत्तराखण्ड से खिलाड़ी शामिल हों और मेडल हासिल कर सकें, इसके लिए खेल विभाग को अभी से तैयारी करनी होगी. राज्य में खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को देखते हुए कुछ खेलों का चयन किया जाए, खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए देश एवं विदेश से भी कोच की आवश्यकता हो तो इसकी व्यवस्था की जाएगी. मुख्यमंत्री ने देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में राज्य स्तरीय खेल महाकुम्भ का शुभारम्भ करते हुए यह बात कही. खेल महाकुम्भ 03 जनवरी से 20 फरवरी तक देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी में किया जा रहा है.

भत्ता बढ़ाया गया 

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल प्रतियोगिताओं में शामिल होने वाले बच्चों के भत्ते को 150 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये किया जाएगा. आमवाला में युवा केन्द्र के समीप खाली जमीन को युवा कल्याण विभाग को दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के अधिकतम युवाओं को खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिले और अपनी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाने का मौका मिले. इसी उद्देश्य से राज्य में खेल महाकुम्भ का आयोजन किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि उत्तराखण्ड से खेल प्रतियोगिताओं में बालिकाओं की हिस्सेदारी भी बालकों के बराबर है. प्रदेश की बालिकाएं किसी भी मामले में बालकों से कम नहीं हैं. जिस राज्य के विकास में स्त्री एवं पुरुषों दोनों का योगदान होता है, वह राज्य तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है.

khel mahakumbh, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने कहा कि खेल महाकुंभ के आयोजन से राज्य के हर जिलों से युवाओं को अपने खेल कौशल को दिखाने का मौका मिल रहा है.
खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने कहा कि खेल महाकुंभ के आयोजन से राज्य के हर जिलों से युवाओं को अपने खेल कौशल को दिखाने का मौका मिल रहा है.


अच्छे खिलाड़ी मिलेंगे 

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने कहा कि खेल महाकुंभ के आयोजन से राज्य के हर जिलों से युवाओं को अपने खेल कौशल को दिखाने का मौका मिल रहा है. इस खेल महाकुंभ में 500 से अधिक खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं. राज्य सरकार का प्रयास है आगामी राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश के युवाओं को प्रतिभाग करने का अधिक से अधिक मौका मिले. आने वाले समय में खेल महाकुंभ के माध्यम से राज्य को अच्छे खिलाड़ी मिलेंगे.

इस अवसर पर युवा कल्याण सलाहकार परिषद् के उपाध्यक्ष जितेन्द्र रावत मोनी, सचिव खेल ब्रिजेश संत, अपर सचिव खेल प्रताप शाह, भाजपा के जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह पुण्डीर एवं खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित थे.

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देहरादून: कृषि कानून के खिलाफ भारत बंद 27 को, पुलिस ने की सुरक्षा की व्यापक तैयारियां

कृषि कानून के खिलाफ 27 को किसानों के भारत बंद को लेकर पुलिस फोर्स एक्टिव हो गया.

kisan Bharat Bandh: कृषि कानून के खिलाफ किसान संगठनों के 27 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. इसके बाद देहरादून जिले में पुलिस ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं. लॉ एंड ऑर्डर न बिगड़े इसको लेकर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए जा रहे हैं.

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देहरादून. कृषि कानून (Agriculture Law) के खिलाफ किसान संगठनों के 27 सितम्बर यानी कि सोमवार को भारत बंद का ऐलान किया है. इसके बाद देहरादून (Dehradun) जिले में पुलिस ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं. लॉ एंड ऑर्डर न बिगड़े इसको लेकर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त शुरू कर दिए गए हैं.

एसएसपी जन्मेजय खंडूरी का कहना है कि भारत बंद के मद्देनजर पुलिस की ब्रीफिंग की गई है और हर थाना इंचार्ज को भी सतर्क रहेने के आदेश दिए गए हैं. सभी को निर्देशित किया गया है कि पुलिस बातचीत से पहले हल निकाले. किसी भी प्रकार के लॉ एंड ऑर्डर न बिगड़े ये सुनश्चित करें. साथ ही जिले में इसके लिए फोर्स को बढ़ाया गया है, जिसमें पीएसी की 5 कम्पनियां को जिम्मेदारी दी गई है. रिजर्व फोर्स में पीएसी के एक प्लाटून को रखा गया है. साथ ही दो टीमें ATS यानि कि एंटी टेररिज्म स्क्वाड को भी रिजर्व रखा गया है. अगर किसी भी प्रकार का बबाल हुआ तो इनका भी उपयोग किया जायेगा.

एसएसपी का कहना है कि जिले में फोर्स को एक्टिव रहने के लिए कहा गया है. लॉ एंड आर्डर मेंटेन करने के निर्देश जिले में सभी प्रभारियों को दिए गए हैं. पीएसी के साथ ही एन्टी टेरेरिस्ट स्कॉड को भी जरूरत पड़ने पर रिजर्व में रखा गया है. शहर और देहात में जिम्मेदार अधिकारी हर स्तिथि की मॉनिटरिंग करेंगे. एसएसपी ने कहा जरूरत पड़ने पर रिजर्व में फोर्स रखा गया है.

गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 40 किसान संगठनों ने 27 सितंबर को भारत बंद करने की लोगों से अपील की है. भारत बंद का आह्वान सुबह 06 बजे से शाम 04 बजे तक किया गया है. विपक्षी दल भी अब कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की जंग में शामिल होने के संकेत दे रहे हैं. विपक्षी दलों ने किसान संगठनों के 27 सितंबर को बुलाए गए भारत बंद के समर्थन का ऐलान कर इस मुद्दे पर सरकार की राजनीतिक घेरेबंदी पर फोकस बढ़ाने के इरादे स्पष्ट कर दिए हैं. अब तक किसान संगठनों को नैतिक समर्थन दे रहे विपक्षी खेमे के कई दलों ने तो इस बंद के समर्थन में सड़क पर उतरने का भी ऐलान कर दिया है.

ब्रेकअप के गम को कम करने में मदद करता है 'दिल टूटा आशिक चायवाला'

दिव्यांशु बत्रा ने जीएमएस रोड पर यह दुकान खोली है.

21 साल के दिव्यांशु बत्रा ने देहरादून के जीएमएस रोड पर दिल टूटा आशिक चायवाला नाम से एक कैफे खोला है.

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देहरादून के एक लड़के ने ब्रेकअप के बाद अपने टूटे हुए दिल को न केवल संभाला बल्कि उस टूटे हुए दिल से खुद की ऐसी पहचान बना दी, जो आज उसे सुर्खियों में ले आई. 21 साल के दिव्यांशु बत्रा ने देहरादून के जीएमएस रोड पर दिल टूटा आशिक चायवाला नाम से एक कैफे खोला है. जैसा कि नाम से पता चलता है, यह उनके खुद के जीवन का एक चैप्टर है, जब उन्हें ब्रेकअप से गुजरना पड़ा था.

दिव्यांशु बत्रा ने बताया कि हाईस्कूल के दिनों में एक लड़की से उन्हें प्यार हो गया था. दोनों रिलेशनशिप में आए. पिछले साल उनका ब्रेकअप हो गया. इसके बाद वह अवसाद में रहने लगे. एक दिन उन्होंने इससे बाहर निकलने का मन बनाया और अपनी इच्छाशक्ति के बल पर वह काम कर दिखाया, जिसकी आज सभी तारीफ कर रहे हैं.

दिव्यांशु ने अपनी बचत के पैसों से कैफे खोला. वह इसे अपने छोटे भाई राहुल बत्रा के साथ चलाते हैं. इस कैफे के जरिए वह कई दूसरे लोगों की भी मदद करना चाहते हैं, जो ब्रेकअप से गुजरे हैं.

उन्होंने कहा कि जीवन में लगभग हर कोई इस दौर से गुजरता है. वह चाहते हैं कि लोग कैफे में आएं और अपना गम उनसे साझा करें ताकि वह उनकी हरसंभव मदद कर सकें. दिव्यांशु के कैफे का नाम सभी को आकर्षित कर रहा है. स्थानीय लोगों के अलावा टूरिस्ट भी इस नाम की वजह से उनके पास खिंचे चले आते हैं.

Dehradun: ये सुद्धोवाला जेल का कम्युनिटी रेडियो है, अक्टूबर में जेल स्टूडियो से शुरू होगा हमारा प्रसारण

सुद्धोवाला जेल में अक्टूबर से शुरू होगा सामुदायिक रेडियो.

Community Radio: देहरादून की सुद्धोवाला जेल में अक्टूबर महीने से कैदी कम्युनिटी रेडियो पर प्र​स्तुति देते नजर आएंगे. यहां सामुदायिक रेडियो की शुरुआत होने जा रही है, जिसके लिए 14 क़ैदियों का चयन हो चुका है. उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है.

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देहरादून. देहरादून (Dehradun) की सुद्धोवाला जेल (Sudhowala Jail) में अक्टूबर महीने से कैदी कम्युनिटी रेडियो (Community Radio) पर प्र​स्तुति देते नजर आएंगे. यहां सामुदायिक रेडियो की शुरुआत होने जा रही है, जिसके लिए 14 क़ैदियों का चयन हो चुका है. कैदियों को इसके लिए बाकायदा रेडियो जॉकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जा रही है. सुद्धोवाला जेल में 14 कैदी इन दिनों जेल में रेडियो जॉकी बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं.

जेल प्रशासन नवरात्रि के दिनों में सामुदायिक रेडियो शुरू करने जा रहा है, जिसके लिए बाकायदा ऑनलाइन और ऑफ लाइन ट्रेनिंग दी जा रही है. जेलर पवन कोठारी बताते हैं कि कैदियों को समाचार और कोर्ट के फैसलों की जेल रेडियो के जरिये जानकारी दी जाएगी. साथ ही कैदियों की पसंद के गाने भी सुनाए जाएंगे. इसका आइडिया उन्हें दिल्ली में क्राइम रिपोर्टिंग कर चुकी वर्तिका नंदा से आया, जिन्होंने कैदियों को ऑनलाइन ट्रेनिंग के जरिये रेडियो जॉकी बनने के टिप्स दिए. इससे पहले वो हरियाणा की जेल में भी ट्रेनिंग दे चुकी हैं.

उन्होंने बताया कि कैदियों को काम के दौरान फरमाइशी गाने और जेल प्रशासन से संबंधित जानकारी देने के मकसद से कम्युनिटी रेडियो की शुरआत उत्तराखंड की जेल में भी की जाएगी. इसकी शुरुआत देहरादून की सुधोवाला जेल से होगी. इसके लिए बाकायदा जेल के भीतर स्टूडियो बनाया जा रहा है. 14 कैदियों के सेलेक्शन में उनकी आवाज़, आत्मविश्वास और वॉइस मोड्यूल भी देखा गया, जिसके बाद अब उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है. वैसे इससे पहले हरियाणा समेत 5 राज्यों में इस तरह का कांसेप्ट काम कर रहा है और उत्तराखंड में ये प्रयोग वहीं से सीख लेते हुए शुरू किया जा रहा है.

भगवान शिव ने गुरु द्रोणाचार्य को यहां सिखाई थी धनुर्विद्या, यहीं हुआ था अश्वत्थामा का जन्म

टपकेश्वर महादेव मंदिर तमसा नदी के तट पर स्थित है.

इस शिवलिंग की सबसे रोचक बात यह है कि द्वापर युग में इस पर दूध की धाराएं गिरती थीं.

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हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के लिए विख्यात देवभूमि उत्तराखंड न जाने कितने रहस्यमयी तथ्य अपने पास समेटे हुए है, जो न केवल पौराणिक कालखंडों को जीवंत स्वरूप देते हैं बल्कि मान्यताओं को और स्पष्ट भी करते हैं. राजधानी देहरादून से मात्र 10 किमी दूर गढ़ी कैंट छावनी क्षेत्र में तमसा नदी के तट पर स्थित है टपकेश्वर महादेव मंदिर.

मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल से पूर्व गुरु द्रोणाचार्य के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें यही दर्शन दिए थे. भगवान शिव ने उन्हें वर मांगने को कहा था, जिस पर द्रोणाचार्य ने भगवान से धनुर्विद्या सीखने का आग्रह किया था.

कहा जाता है कि भगवान शिव ने द्रोणाचार्य के वर को स्वीकारते हुए उन्हें प्रतिदिन यहां धनुर्विद्या सिखाई थी. इसके बाद गुरु द्रोणाचार्य के अनुरोध पर ही भगवान शिव जगत कल्याण के लिए यहां लिंग के रूप में स्थापित हो गए. इस शिवलिंग की सबसे रोचक बात यह है कि द्वापर युग में इस पर दूध की धाराएं गिरती थीं.

यहां हुआ था अश्वत्थामा का जन्म

मान्यताओं के अनुसार, इसी जगह को गुरु द्रोण पुत्र अश्वत्थामा की जन्मस्थली व तपस्थली भी माना गया है, जहां अश्वत्थामा के माता-पिता गुरु द्रोणाचार्य व कृपि की पूजा-अर्चना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था. जिसके बाद ही उनके घर अश्वत्थामा का जन्म हुआ था.

ऐसा कहा जाता है कि एक बार अश्वत्थामा ने दूध पीने की इच्छा जताई, जो किसी कारणवश पूरी न हो सकी. इस पर द्रोण पुत्र ने लगातार 6 महीनों तक एक पांव पर खड़े होकर होकर घोर तप किया था, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने शिवलिंग के ऊपर स्थित चट्टान में गऊ थन बना दिए और दूध की धारा यहां बहने लगी.

इसी वजह से भगवान शिव का नाम द्वापरयुग में दूधेश्वर पड़ गया. हालांकि कलयुग में यही दूध की धारा जल में परिवर्तित हो गई, जो आज भी निरंतर शिवलिंग पर गिर रही है. इस कारण इस स्थान का नाम टपकेश्वर पड़ गया.

Yogi Cabinet Expansion: सियासी सफर में लगातार शिखर पर हैं उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य

Yogi Cabinet Expansion:  बेबी रानी मौर्य ने 1990 के दशक से राजनीतिक सफर शुरू किया था.

Agra News: बेबी रानी मौर्य ने 1990 के दशक से राजनीतिक सफर शुरू किया था. बीजेपी के सामान्य कार्यकर्ता के रूप में उनकी सियासी पारी तब परवान चढ़ी, जब उन्होंने वर्ष 1995 में आगरा मेयर का चुनाव लड़ा.

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आगरा. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार (Yogi Cabinet Expansion) में उत्तराखंड (Uttarakhand) की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य (Former Governor Baby Rani Maurya) को भी मंत्री बनाए जाने के संकेत मिले हैं. बेबी रानी मौर्य ने जब से अपने सियासी सफर की शुरुआत की है, तब से वह लगातार संगठन और संवैधानिक पदों पर बनी हुई हैं. बेबी रानी मौर्य ने 1990 के दशक से राजनीतिक सफर शुरू किया था. बीजेपी के सामान्य कार्यकर्ता के रूप में उनकी सियासी पारी तब परवान चढ़ी, जब उन्होंने वर्ष 1995 में आगरा मेयर का चुनाव लड़ा. भाजपा प्रत्याशी के रूप में बेबी रानी मौर्य ने शानदार जीत दर्ज की. वह आगरा की महापौर बनने वाली पहली महिला थीं.

बेबी रानी 5 साल तक इस पद पर काबिज रहीं और लगातार महिलाओं में भाजपा की पकड़ मजबूत करने में अहम किरदार निभाती रहीं. 2001 में उत्तर प्रदेश सामाजिक कल्याण बोर्ड का उन्हें सदस्य भी बनाया गया था. उन्हें राष्ट्रीय महिला आयोग का सदस्य बनाया गया.

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2018 को बेबी रानी मौर्य को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. अगस्त 2018 में बेबी रानी मौर्य ने उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी.

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उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में बेबी रानी मौर्य का कार्यकाल बेहतर रहा. उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के कुछ ही दिनों के बाद बेबी रानी मौर्य को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी गई. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बेबी रानी मौर्य को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया.

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अब मिशन 2022 को साधने में जुटी भारतीय जनता पार्टी जब उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है तो जो संभावित मंत्री बन रहे हैं, उनमें बेबी रानी मौर्य का नाम भी शामिल है.

‘ज्यादा जोगी मठ उजाड़’ कहावत चरितार्थ तो नहीं करेगी उत्तराखंड में BJP के पूर्व मुख्यमंत्रियों की फौज!

पूर्व मुख्यमंत्री ​तीरथ सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत.

कांग्रेस के पास तीन पूर्व सीएम हैं, लेकिन भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्रियों की फेहरिस्त करीब तिगुनी है. भाजपा के वरिष्ठ नेता कह रहे हैं कि तकरार उभर चुकी हो, तो पूर्व सीएम की सियासी सक्रियता पार्टी के लिए जोखिम होती है.

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देहरादून. उत्तराखंड में सबसे लंबे समय तक भाजपा के मुख्यमंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत इन दिनों अपना समय राज्य का दौरा करने, रक्तदान शिविरों में भाग लेने और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ तस्वीरें क्लिक करने में बिता रहे हैं. देहरादून के डोईवाला से विधायक त्रिवेंद रावत और उनके समर्थक अभी तक समझ नहीं पा रहे हैं कि त्रिवेंद्र आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं. ‘मुझे नहीं पता कि मुझे क्यों सीएम पद से हटाया गया था’, यह बात पहले कह चुके रावत से जब उनके चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ एक कार्यकर्ता हूं. पार्टी जो कहेगी, वैसा करेंगे.” दो सवाल और हैं, आगामी​ विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के और भी पूर्व सीएम किस भूमिका में हैं? और, इन नेताओं से भाजपा को क्यों चिंता हो सकती है?

अन्य पूर्व मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं?
संयोग से, नवम्बर में अपने गठन के 21 साल पूरे करने वाले राज्य उत्तराखंड में सबसे अधिक मुख्यमंत्री भाजपा ने दिए हैं. भाजपा के मौजूदा आठवें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं, जबकि नवंबर 2000 में नित्यानंद स्वामी कार्यवाहक सरकार का नेतृत्व करने वाले पहले नेता थे. स्वामी की 2012 में मृत्यु हो गई, जबकि 2001 में स्वामी की जगह लेने वाले मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी फिलवक्त महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. दो बार सीएम रह चुके बीसी खंडूरी अस्वस्थ हैं और मुख्यधारा की राजनीति से दूर हैं.

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2012 में कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा अब भाजपा में हैं. उनके बेटे उत्तराखंड विधानसभा में पार्टी विधायक हैं. छह साल पहले हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत करने में बहुगुणा की अहम भूमिका थी. बहुगुणा के अलावा, पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, जो हाल तक केंद्रीय मंत्री थे, अपने राजनीतिक ‘संन्यास’ के अंत का इंतजार कर रहे हैं.

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आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों की भूमिका भाजपा अब तक तय नहीं कर पाई है.

दूसरी ओर, राज्य के इतिहास में सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले तीरथ सिंह रावत के करीबी सहयोगियों का कहना है कि तीरथ सिंह प्रदेश की राजनीति में एक भूमिका की उम्मीद कर रहे हैं. निशंक और तीरथ क्रमश: हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल से सांसद हैं.

नए पावर सेंटर का डर
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की राजनीति में सक्रियता हमेशा “जोखिम वाला फैक्टर” बनती है, खासकर जब पार्टी के भीतर तकरार स्पष्ट हो. राज्य भाजपा के महासचिव कुलदीप कुमार ने न्यूज़18 को बताया, “केंद्रीय संसदीय बोर्ड ही उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का फैसला करता है, चाहे पूर्व मंत्री या पूर्व मुख्यमंत्री. सभी पूर्व सीएम हमारी कोर टीम का हिस्सा हैं. हम उन्हें पार्टी के घोषणापत्र, अभियान दल में शामिल करेंगे.”

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इधर, राज्य में कांग्रेस के नाम तीन पूर्व सीएम हैं. उनमें से, विजय बहुगुणा 2016 में भाजपा में शामिल हो गए, जबकि उत्तराखंड में पद पर पांच साल पूरे करने वाले एनडी तिवारी का 2018 में निधन हो गया. हरीश रावत पंजाब मामलों के प्रभारी के रूप में व्यस्त हैं, जहां हाल में कैप्टन अमरिंदर सिंह से चरणजीत सिंह चन्नी को सत्ता हस्तांतरित हुई है.

उत्तराखंड में BJP नेता के 'लैंड जिहाद' के दावे पर एक्शन के मूड में धामी सरकार, कांग्रेस ने चेताया

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी. (File Photo)

उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ों के कुछ हिस्सों में एक समुदाय विशेष की बढ़ रही जनसंख्या को लेकर कड़े कदम उठाने के निर्देश तो ​दे दिए हैं, लेकिन यह सियासी मुद्दा बन सकता है क्योंकि हरीश रावत ने इस मामले में सरकार को चेतावनी दी है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 25, 2021, 13:51 IST
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देहरादून. कथित लव जिहाद के कानून को और सख्त बनाए जाने के उत्तराखंड के ऐलान के बाद अब राज्य में ‘लैंड जिहाद’ को लेकर हलचल मच गई है. उत्तराखंड के बीजेपी नेता अजेंद्र अजय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखकर ऐतराज़ जताया था कि एक समुदाय विशेष के लोग पहाड़ों में ज़मीनें खरीदकर अपने पूजा स्थल बना रहे हैं. अजय ने इसे लैंड जिहाद कहा था. इस बात के एक महीने से भी कम समय के भीतर राज्य सरकार ने कहा, ‘पता चला है कि कुछ हिस्सों में एक आबादी विशेष के दखल के चलते कुछ समुदायों के सामने पलायन की समस्या खड़ी हो गई है.’ इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है.

राज्य सरकार ने जो आधिकारिक बयान जारी किया है, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उसमें कहा गया, ‘कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनने की आशंका है. इस स्थिति पर चिंता ज़ाहिर करते हुए, सरकार ने डीजीपी, सभी ज़िला ​मजिस्ट्रेटों और एसएसपी स्तर के अधिकारियों को समस्या से निपटने के निर्देश दिए हैं.’ साथ ही, सरकार ने कई इलाकों में शांति समितियां बनवाए जाने की बात भी कही है.

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हरीश रावत ने सिलसिलेवार ट्वीट किए.

कौन हैं अजय, जिन्होंने उठाया मुद्दा
पिछले महीने लैंड जिहाद का मुद्दा सीएम धामी के सामने रखने वाले अजय इससे पहले तब सुर्खियों मेंं आए थे, जब 2018 में उन्होंने ‘केदारनाथ’ फिल्म की रिलीज़ को प्रतिबंधित किए जाने की मांग उठाई थी. उनकी मांग के बाद राज्य में इस फिल्म को बैन भी किया गया था. ‘लैंड जिहाद’ के साथ ही अजय ने एक समुदाय विशेष की आबादी बढ़ने और पहाड़ों के कुछ समुदायों के सामने पलायन की समस्या का मुद्दा भी उठाया था. अजय दावा कर चुके हैं कि एक समुदाय विशेष ‘चोरी छुपे’ अपने पूजास्थल बना रहा है, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो रहा है.

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कांग्रेस ने सरकार को कैसे चेताया?
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के चुनाव अभियान के प्रमुख हरीश रावत ने इस मामले में दखल देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘जनसंख्या वृद्धि दर का क्षेत्र के हिसाब से अध्ययन करना आवश्यक है. जिन राज्यों में अशिक्षा व कुपोषण है, स्वास्थ्य सेवाएं कमज़ोर हैं, वहां जनसंख्या वृद्धि दर गरीब तबकों में ज़्यादा है, जिनमें सभी जाति-धर्मों के लोग सम्मिलित हैं. सरकार इस दर को नियंत्रित करने के उचित कदम उठाए लेकिन समुदाय विशेष को टारगेट कर उसका राजनीतिक फायदा न उठाए. यह चिंताजनक विषय है.’

Uttarakhand News: 2005 में लापता पर्वतारोही का शव तब मिला, जब चोटी नापने पहुंचे आर्मी जवान!

हिमालयीन पर्वत चोटी का एक मनोरम दृश्य. (File Photo)

स्वर्णिम विजय वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय सेना ने पर्वतारोहियों का खोजी दल गंगोत्री पार्क की दूसरी सबसे बड़ी चोटी की खोज यात्रा पर भेजा था, जहां 16 साल पुराने लापता दल के सदस्य का शव मिला, ऐसा माना जा रहा है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 25, 2021, 11:46 IST
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देहरादून. गंगोत्री नेशनल पार्क की एक पर्वत चोटी की ऊंचाई नापने के लिए गए आर्मी के जवानों के एक दल के सामने एक हैरतअंगेज़ घटना पेश आई, जब गुरुवार को उन्हें पहाड़ों में एक सालों पुराना शव मिला. इस शव के बारे में कहा जा रहा है कि 2005 में इसी चोटी की ऊंचाई नापने के लिए जो दल आया था, उन्हीं में से एक का शव हो सकता है क्योंकि उस वक्त कुछ पर्वतारोही लापता हो गए थे. राज्य में गढ़वाल अंचल में स्थित हिमालय रेंज के बीच गंगोत्री नेशनल पार्क की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है सतोपंथ, जिसकी ऊंचाई 7075 मीटर मानी जाती है. यहां सेना का एक खोज दल आया हुआ था.

बॉर्डर ज़िले उत्तरकाशी में भारतीय सेना के बेस के कुछ जवान खोज दल के दौरान इसलिए पहुंचे थे क्योंकि यह अभियान स्वर्णिम विजय वर्ष के उत्सव से जुड़े कार्यक्रम के तहत चलाया जा रहा था. इसी दौरान इन्हें एक पर्वतारोही का शव मिला. सेना के एक अफसर के हवाले से एचटी ने अपनी खबर में लिखा कि जवानों के दल ने शव के अवशेष लिये और गुरुवार को उन्हें गंगोत्री बेस पर लेकर आए.

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क्या आर्मी के जवान का ही है शव?
पहचान गोपनीय रखते हुए सेना के अफसर के हवाले से खबर में कहा गया, ‘पर्वत चोटी की ऊंचाई नापने के लिए 12 सितंबर को एक खोजी दल रवाना हुआ था, जिसमें 25 जवान थे. जब ये दल कठिन मौसम में पहाड़ी रास्तों गुज़र रहा था, तब एक शव मिला. हमें लगता है कि 2005 में सेना का ही जो एक दल चोटी को नापने के लिए गया था, यह शव उन्हीं में से किसी पर्वतारोही का हो सकता है. हालांकि अभी हम इसकी शिनाख्त नहीं कर सके हैं.’

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इसी अफसर ने यह भी कहा कि फिलहाल शव पुलिस को सौंपा गया है. इधर, उत्तरकाशी के एसपी मणिकांत मिश्रा ने पुष्टि करते हुए बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और डीएनए टेस्ट भी किया जाएगा और उसके नतीजों के बाद आगे की कार्रवाई होगी. सेना ने कहा है कि अगर यह कन्फर्म हो जाता है कि शव सेना के लापता जवान का ही था, तो उसके परिवार को पूरे सैन्य सम्मान के ​साथ शव सौंप दिया जाएगा.

उत्तराखंड सरकार के बड़े फैसले: डॉक्टरों को तोहफा, 3 लाख कर्मचारियों को DA में बढ़ोत्तरी की सौगात

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी. (File Photo)

Uttarakhand Cabinet Meeting : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में हुई कैबिनेट बैठक में डीए को 11 फीसदी बढ़ाने के फैसले के अलावा होम्योपैथी और आयुर्वेदिक विभागों के डॉक्टरों व कर्मचारियों के लिए भी प्रोत्साहन राशि का ऐलान किया गया.

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  • LAST UPDATED : September 25, 2021, 09:04 IST
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देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने लाखों कर्मचारियों को बड़ी सौगात देते हुए महंगाई भत्ते यानी डीए में 11% की बढ़ोत्तरी के साथ ही राज्य के लिए और भी कुछ बड़े फैसले दिए. शुक्रवार को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने बताया कि डीए बढ़ाए जाने के बाद राजकोष पर हर साल 1800 करोड़ रुपये का भार बढ़ेगा. यही नहीं, इसके अलावा आयुर्वेदिक और होम्यापैथी से जुड़े उन डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए भी पुरस्कार के तौर पर एकमुश्त रकम का ऐलान सरकार ने ​किया, जिन्होंने कोविड के दौरान महत्वपूर्ण सेवाएं दीं.

लंबे समय से थी डीए को लेकर मांग
न्यूज़18 ने शुक्रवार को ही आपको बताया था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में डीए बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई थी. इस फैसले के बाद तकरीबन 1,60,000 कर्मचारियों और 1,50,000 पेंशनरों को इसका लाभ मिलेगा और इस बढ़े हुए भत्ते का भुगतान इस साल की 1 जुलाई से लागू किया जाएगा. वास्तव में यह मांग काफी समय से चल रही थी और भारतीय पेंशनर मंच ने प्रधानमंत्री को ​भी इस बारे में लिखा था. कोविड के चलते पिछले साल अप्रैल में वित्त मंत्रालय ने डीए बढ़ाने के प्रस्ताव को होल्ड कर दिया था.

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सरकार ने ऐसे खोला तोहफों का पिटारा
सीएम धामी की घोषणा के मुताबिक अब कोरोना संक्रमण की दोनों लहरों के समय में सेवाएं देने वाले आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों को 10,000 रुपये की रकम तोहफे के तौर पर दी जाएगी. वहीं, इन विभागों के सी और डी ग्रुप के कर्मचारियों को 3000 रुपये बतौर प्रोत्साहन दिए जाएंगे. इसके अलावा, राज्य सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर VAT की दरें 20 से सिर्फ 2% कर दी हैं.

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धामी सरकार ने राज्य के सात इं​जीनियरिंग इंस्टीट्यूटों के लिए 31 मार्च 2022 तक काम के लिए अनुबंध पर टीचरों को रखने के दरवाज़े भी खोले. इस तरह से टीचरों के वेतन पर अगले छह महीनों में सरकार करीब 3.83 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

Exclusive : मंदिरों पर सरकार का आधिपत्य मंज़ूर नहीं, विरोध में जल्द छेड़ा जाएगा अभियान : विहिप

विहिप के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार. (न्यूज़18 क्रिएटिव इमेज)

विश्व हिंदू परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार ने news18 पर खास तौर से बयान देते हुए कहा कि मंदिरों पर सरकारी व्यवस्था नहीं होना चाहिए. उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहितों के लगातार विरोध के मद्देनज़र इसे बड़ा बयान माना जा रहा है.

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  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 21:55 IST
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प्रीत‍ि
नई दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद जल्द ही मंदिरों पर सरकार के आधिपत्य के विरोध में एक मुहिम छेड़ने के मूड में है. इस मुहिम के मुखिया और विश्व हिंदू परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार का साफ कहना है कि देश भर में सभी मंदिरों पर सरकार का कोई आधिपत्य नहीं होना चाहिए. आलोक कुमार ने न्यूज़18 के साथ खास बातचीत में कहा कि सरकार का जब अधिपत्र मंदिरों पर होता है, तो मंदिरों में जो काम होने चाहिए, वो काम नहीं हो पाते हैं. जैसे पहले मंदिरों में स्कूल हुआ करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाता है.

उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड को लागू किया गया है, जिसके चलते चारों धाम सहित कई मंदिर सरकार के प्रबंधन के अधीन आ गए हैं. वहीं, उत्तराखंड में इस बोर्ड का विरोध लंबे समय से तीर्थ पुरोहित कर रहे हैं. इस बारे में आलोक कुमार ने कहा, ‘मैं हाल में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिला था. मैंने उनसे कहा था कि मंदिरों को सरकारों के अधीन नहीं होना चाहिए. इस पर उन्होंने विचार विमर्श करने के लिए कहा है.

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उत्तराखंड में चार धाम संबंधी तीर्थ पुरोहित लंबे समय से देवस्थानम बोर्ड को भंग किए जाने की मांग कर रहे हैं.

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यूपी के मंदिरों पर भी कुमार ने की बात
जहां तक बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर समेत उत्तर प्रदेश के मंदिरों की बात है, वो भी सरकार के अधीन हैं. ‘उसको लेकर भी हम बात कर रहे हैं कि वहां भी सरकार का आधिपत्य नहीं होना चाहिए. हालांकि इस विषय पर अभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कोई बात हमारी नहीं हुई है. लेकिन आने वाले समय में हम एक प्रपोज़ल तैयार कर केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्य सरकारों को भेजेंगे.’

उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला, सरकार ने महंगाई भत्ता 11% बढ़ाने पर लगाई मुहर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी. (File Photo)

CM Dhami Cabinet Meeting : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक ले रहे हैं, जिसमें कुछ अहम फैसले किए जाने हैं. जानिए किन योजनाओं पर मंथन चल रहा है और कौन से मामले फैसले के इंतज़ार में हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक शुक्रवार दोपहर चल रही है, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिये जाने की संभावना है. यह बैठक अभी जा रही है लेकिन बड़ी खबर यह आई है कि कैबिनेट मीटिंग में महंगाई भत्ते में 11% की वृद्धि पर मुहर लग चुकी है. मंत्रिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय स्थित वीरचंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में चल रही है. इस बैठक में स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, उद्योग और शिक्षा आदि विभागों से संबंधित कई मामलों पर चर्चा और फैसले होने हैं.

सबसे अहम मामला इस बैठक में वन निगम में स्केलर संवर्ग अधिकारियों के प्रमोशन से जुड़ा है. इस मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक उप समिति बनी थी, जो अपनी रिपोर्ट तैयार कैबिनेट के सामने रख सकती है और कैबिनेट इस मामले में फैसला आज की बैठक में ले सकती है. इसके अलावा, खबरों की मानें तो कर्मचारियों के लिए गोल्डन कार्ड योजना में संशोधन और उद्यानों को लीज़ पर दिए जाने जैसे मुद्दों पर भी कोई फैसला संभव है.

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इधर, उपनल कर्मचारी लंबे समय से समान कार्य, समान वेतन समेत कई मांगें कर रहे हैं. इनके मामले के लिए भी एक समिति बनी थी, हालांकि इस समिति को रिपोर्ट को कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी. गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को सीएम धामी ने एक कार्यक्रम में आयुष्मान भारत योजना के गोल्डन कार्डधारक मरीज़ों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कार्ड मुफ्त बनाए जाने और तय अस्पतालों में एक हफ्ते में इलाज के क्लेम निपटाए जाने की बात कही थी. इस योजना में किडनी ट्रांसप्लांट का इलाज मुफ्त करने और प्रदेश के सभी परिवारों को योजना से जोड़ने की बात भी कही थी.

चार धाम आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद कम होने से पुरोहित नाराज, विपक्ष हमलावर; इधर E-Pass की समय-सीमा तय

उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम. (File Photo)

Char Dham Yatra: उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू होने से रौनक लौटी है, लेकिन कांग्रेस ने कहा कि राज्य सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है. तीर्थ पुरोहित सरकारी इंतज़ामों से नाराज़ हैं तो भाजपाई भी श्रद्धालुओं को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

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  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 17:58 IST
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देहरादून. उत्तराखंड में चार धाम यात्रा लम्बे समय बाद शुरू हुई है लेकिन श्रद्धालुओं की सीमित संख्या की बाध्यता से विवाद शुरू हो गया है. विपक्ष का कहना है कि सरकार तीर्थ यात्रियों के लिए पर्याप्त इंतज़ाम और कोर्ट में पुख्ता दलीलें नहीं दे सकी इसलिए अब सीमित संख्या में ही श्रद्धालु पहुंच पा रहे हैं. इधर पुरोहित और पुजारी लोग भी देवस्थानम बोर्ड की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं.

इसी बीच , चार धाम यात्रा के रजिस्ट्रेशन की ज़िम्मेदारी संभाल रहे देवस्थानम बोर्ड ने साफ कर दिया है चूंकि भारी संख्या में रजिस्ट्रेशन करवाए जा रहे हैं इसलिए सीमित संख्या के हिसाब से 15 अक्टूबर तक के लिए ही बुकिंग की जा सकेगी.अदालत में सुनवाई के बाद कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक हर रोज़ केदारनाथ में 800, बद्रीनाथ में 1000, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 400 श्रद्धालु ही दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं. इस सीमित संख्या के बारे में कांग्रेस ने कहा कि सरकार बस यात्रा को ही शुरू करवाकर जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है.

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कांग्रेस और तीर्थ पुरोहित क्यों हैं नाराज़?

उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कि सरकार ने कोर्ट में ठीक से पैरवी की होती तो निश्चित ही ज़्यादा से ज़्यादा श्रद्धालुओं के लिए चार धामों के दरवाज़े खुल सकते थे. खबरों की मानें तो गोदियाल ने सरकार पर सीमित संख्या से ही इतिश्री मान लेने का आरोप लगाया. वहीं, पुरोहितों ने देवस्थानम बोर्ड की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए. उनका कहना है कि श्रद्धालुओं को कई परेशानियां पेश आ रही हैं. पुरोहितों, पुजारियों व स्थानीय व्यवसायियों में सरकारी बदइंतज़ामी व सीमित संख्या को लेकर भारी नाराजगी है.

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चार धाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन सीमित संख्या के नियम के आधार पर किए जा रहे हैं.

भाजपा कार्यकर्ता भी चाहते हैं, संख्या बढ़े

कांग्रेस, पुरोहित और व्यवसायी ही नहीं, अब भाजपा के कार्यकर्ता भी सीमित संख्या को लेकर परेशान नज़र आ रहे हैं. एक खबरके मुताबिक़ भाजपा के जिलाध्यक्ष दिनेश उनियाल ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से केदारनाथ में 2500, बद्रीनाथ में 3000, गंगोत्री में 1500 और यमुनोत्री में 1200 श्रद्धालु प्रतिदिन तक संख्या को बढवाने की मांग की. उनियाल ने सीएम को बताया कि किस तरह की व्यवस्थाओं से समस्या को सुलझाया जा सकता है. स्थानीय कारोबार के लिहाज़ से उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ई पास में खामी पाए जाने पर श्रद्धालुओं को लौटाए जाने के बजाए पास के ही तीर्थ और धार्मिक पर्यटन स्थलों पर डायवर्ट किया जाए.

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कितना हुआ रजिस्ट्रेशन और कब तक होगा?

बीते 18 सितंबर से चार धाम यात्रा शुरू होने के बाद बताया जा रहा है कि 70 हज़ार से ज़्यादा तीर्थयात्री देवस्थानम बोर्ड के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. चूंकि संख्या सीमित रखने के आदेश हैं इसलिए इसी आधार पर सीमित ई पास जारी किए जा रहे हैं. पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर के हवाले से खबरों में कहा गया कि 15 अक्टूबर तक वेबसाइट से बुकिंग की जा सकेगी. लेकिन एक अन्य खबर में यह भी कहा गया है कि बद्रीनाथ के लिए 15 अक्टूबर तक की बुकिंग फुल हो चुकी है.

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उत्तराखंड में पिछले दिनों आप की रैली में भारी जनसैलाब उमड़ा था. (File Photo)

Uttarakhand Election Politics: रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल नैनीताल से यह ‘रोजगार गारंटी यात्रा’ शनिवार से शुरू करेंगे. भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा और कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के बाद राज्य में आम आदमी पार्टी अपनी यात्रा में जनता से सीधे जुड़ा रोजगार का मुद्दा उठाने जा रही है.

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देहरादून. बीजेपी-कांग्रेस के बाद अब आम आदमी पार्टी ने भी अपनी यात्रा निकालने का ऐलान कर दिया, जिसकी शुरुआत 25 सितंबर को नैनीताल से होगी. राज्य की सभी 70 विधानसभाओं में पहले चरण में आम आदमी पार्टी ‘रोजगार गारंटी यात्रा’ की शुरुआत करने जा रही है. हर विधानसभा में 1 दिन रहने के साथ ही जनता से संवाद करते हुए रोज़गार को लेकर आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल बात करेंगे. इस दौरान बेरोज़गारों से सुझाव लिये जाएंगे. यह यात्रा पहले चरण में 25 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक 9 विधानसभा क्षेत्रों में चलाई जाएगी. पहले इस यात्रा का पूरा कार्यक्रम जानिए.

पहला चरण, 9 विधानसभा में होगी यात्रा

25 सितंबर : नैनीताल
26 सितंबर : भीमताल
27 सितंबर : रानीखेत
28 सितंबर : सल्ट
29 सितंबर : द्वाराहाट
30 सितंबर : सोमेश्वर
1 अक्टूबर : अल्मोड़ा
2 अक्टूबर : कपकोट
3 अक्टूबर : बागेश्वर

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आम आदमी पार्टी ने मीडिया को रोज़गार गांरटी यात्रा के बारे में जानकारी दी.

70 दिन-70 विधानसभा क्षेत्र-70 यात्रा

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रोज़गार गारंटी योजना को प्रदेश के युवाओं और जनता का बहुत अच्छा समर्थन मिलने के बाद अब आप के सीएम प्रत्याशी कर्नल अजय कोठियाल रोज़गार गारंटी यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, जो सभी 70 विधानसभाओं में आयोजित की जाएगी ताकि प्रदेश के हर घर तक केजरीवाल द्वारा की गई घोषणाएं सही जानकारी के साथ पहुंच सकें. आप के दिनेश मोहनिया ने बताया कि 70 विधानसभाओं मे चलने वाली यह यात्रा कुल 70 दिनों की होगी.

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उद्यमियों, युवाओंं से सुझाव भी किए जाएंगे साझा

इसके तहत कर्नल कोठियाल अपनी टीम के साथ एक एक दिन हर विधानसभा में जाएंगे और लोगों को रोज़गार संबंधी जानकारी देंगे. इसके साथ ही, युवाओं और वहां के उद्यमियों से बातचीत कर सुझाव भी साझा किए जाएंगे ताकि रोज़गार के और बेहतर विकल्प युवाओं को मिल सकें. गौरतलब है कि केजरीवाल की रोज़गार संबंधी घोषणा के बाद बेरोज़गारी राज्य में बड़ा मुद्दा बन चुकी है. हालांकि भाजपा और कांग्रेस इसे चुनावी स्टंट बताकर आलोचना कर चुके हैं.

उत्तराखंड चुनावः कांग्रेस को राहुल गांधी से ज्यादा प्रियंका पर भरोसा, यूथ वोटरों को जोड़ने की चाहत

राहुल गांधी की इस बैठक में प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल रहीं. (फाइल फोटो)

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी जहां पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह को लाने की तैयारी में है, तो कांग्रेस को प्रियंका गांधी से बड़ी आस है. पार्टी चाहती है कि राहुल से ज्यादा दौरे प्रियंका गांधी के हों.

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देहरादून. उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी अपने स्टार प्रचारकों (Star Campaigners) को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बना रही है. इलेक्शन कैम्पेन में युवा वोटरों को खींचने के लिए कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि वह प्रियंका गांधी को उत्तराखंड ला सके. बताया जाता है कि 2017 हो या 2019 का चुनाव, राहुल गांधी कोई बड़ा असर छोड़ पाने में नाकाम रहे और बीजेपी ने इस बात का भरपूर फायदा उठाया. अब कांग्रेस को उम्मीद है कि जो फायदा राहुल गांधी के दौरों से नहीं हुआ, उसकी भरपाई प्रियंका कर सकेंगी.

कांग्रेस का इलेक्शन कैम्पेन 2022 के लिए कैसा होगा, ये कैम्पेन कमेटी के चेयरमैन हरीश रावत को तय करना है लेकिन चुनाव में इस बार प्रियंका गांधी को उत्तराखंड लाने की तैयारी है. यूथ वोटर को खींचने के लिहाज़ से इस रणनीति को अहम् माना जा रहा है और यह भी तय है कि आएंगे तो राहुल गांधी भी. हरीश रावत का कहना है कि राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी को भी इस बार चुनाव प्रचार में लाने की कोशिश की जा रही है.

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उत्तराखंड चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी स्टार प्रचारकों के दौरों के बारे में रूपरेखा बना रही है.

क्या है प्रियंका बनाम राहुल चर्चा?

उत्तराखंड में राहुल गांधी के मुकाबले प्रियंका गांधी कितनी असरदार होंगी, ये तो चुनाव का रिजल्ट बताएगा, हालांकि बीजेपी ने इस मामले में कांग्रेस पर कटाक्ष शुरू कर दिए हैं. बीजेपी नेताओं का दावा है कि कांग्रेस नेताओं और राज्य की कई विधानसभाओं में राहुल गांधी के बारे में धारणा अच्छी नहीं है. बीजेपी विधायक दिलीप रावत ने दावा किया कि 2017 में कई कांग्रेस विधायकों ने राहुल गांधी को अपने क्षेत्र में बुलाने से मना कर दिया था, इस बार भी यही होगा.

पीएम मोदी पर होगा प्रचार का दारोमदार

दूसरी तरफ, उत्तराखंड चुनाव के लिए बीजेपी के प्रचार का पूरा दारोमदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर माना जा रहा है. पीएम मोदी के केदारनाथ दौरे को लेकर प्लानिंग चल रही है तो भाजपा अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे नामों को भी चुनावी अखाड़े में लाने की पूरी कोशिश में है. ऐसे में, कांग्रेस की कोशिश है कि राहुल गांधी से ज़्यादा प्रियंका गांधी को प्रचार में उतारा जाए ताकि युवाओं को साधने में कामयाबी मिले.

UK TET 2021: टीईटी के लिए आवेदन की लास्ट डेट नजदीक, जानें डिटेल

UK TET 2021:   उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है.

UK TET 2021: उत्तराखंड टीईटी 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया जारी है और अंतिम तिथि में 6 दिनों का समय और बजा है. अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए 30 सितंबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं.   

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  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 15:55 IST
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नई दिल्ली (UK TET 2021). उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया जारी है. अभ्यर्थी उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट ukutet.com के जरिए 30 सितंबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं.आवेदन की प्रक्रिया 1 सितंबर 2021 से जारी है.

अभ्यर्थी ध्यान रखें कि निर्धारित अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. अभी परिषद  की ओर से परीक्षा तिथि नहीं घोषित की गई है.

UK TET 2021: शैक्षणिक योग्यता
प्राइमरी शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए अभ्यर्थी का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना अनिवार्य है. साथ ही अभ्यर्थी के पास बीईबीएड, डीएलएड या डीएड  की भी डिग्री होनी चाहिए. वहीं कक्षा 6 से 8वीं तक शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए अभ्यर्थी का स्नातक पास के साथ बीटीसी या डीएलएड होना चाहिए.

UK TET 2021: आवेदन फीस
सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए दोनों पेपर के लिए 1000 रुपए आवेदन फीस निर्धारित की गई है. वहीं एससी व एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को दोनों पेपर के लिए 500 रुपए आवेदन फीस देना होगा.

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UK TET 2021: ऐसे करें आवेदन
-सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ukutet.com पर जाएं.
-होम पेज पर New Registration पर क्लिक करें.
-अब Proceed  to Registration  पर क्लिक करें.
-यहां मांगी गई जानकारी को दर्ज कर सबमिट करें.
-अब आवेदन की प्रक्रिया शुरू करें.
-सभी दस्तावेजों को अपलोड कर सबमिट करें.

अब BJP की शहीद सम्मान यात्रा : हर शहीद के घर से मिट्टी लेकर 'पांचवा धाम' बनाएगी उत्तराखंड सरकार

भाजपा शहीद सम्मान यात्रा को 'गेमचेंजर' की तरह मान रही है.

Uttarakhand Election 2022 : अक्टूबर में उत्तराखंड में 'शहीद सम्मान यात्रा' निकालने जा रही भाजपा ने एक बड़ी आबादी तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. जानिए कि इस यात्रा का मकसद क्या होगा, आंकड़े क्या कहते हैं और भाजपा की क्या रणनीति है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 13:21 IST
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देहरादून. उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों से करीब चार महीने पहले भाजपा राज्य के हर गांव तक पहुंचकर बड़ी तादाद वाले वोटरों के बीच पहुंचने की रणनीति बना रही है. अक्टूबर के महीने में ‘शहीद सम्मान यात्रा’ के माध्यम से बीजेपी ने हर गांव तक मौजूदा और सेवानिवृत्त सैनिकों के परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य बनाया है. भाजपा मुख्यालय से बनी इस रणनीति के तहत राज्य में पार्टी को निर्देश जारी किए जा रहे हैं और दावा किया जा रहा है कि राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं को नया जोश देने के लिहाज़ से भी यह यात्रा महत्वपूर्ण साबित होगी.

शहीदों के घर की मिट्टी से BJP बनाएगी ‘सैन्य धाम’
समाचार एजेंसी एएनआई की खबर की मानें तो राज्य की भाजपा सरकार हर उस घर में पहुंचेगी, जहां से कोई भी सदस्य देश के लिए शहीद हुआ हो. भाजपा कार्यकर्ता ऐसे हर घर से सम्मान स्वरूप मिट्टी इकट्ठी करेंगे. इस मिट्टी से शहीदों की याद में ‘सैन्य धाम’ का निर्माण करवाया जाएगा. सैन्य कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उत्तराखंड चूंकि सैनिकों की भूमि है इसलिए सैन्य धाम बनना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि शहीदों बाबा जसवंत सिंह और बाबा हरभजन सिंह के मंदिर भी बनवाए जाएंगे.

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उत्तराखंड सरकार में सैन्य कल्याण मंत्री गणेश जोशी.

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फौजी वोटरों के आंकड़े पर नज़र
जोशी ने दावा किया कि राज्य में बनने वाला यह ‘पांचवा धाम’ देश के युवाओं को प्रेरित करेगा. इधर, मौजूदा और रिटायर्ड ‘फौजियों’ की संख्या पर अगर नज़र डाली जाए तो उत्तराखंड में यह आंकड़ा करीब 4.5 लाख लोगों का है. इनके पूरे परिवार के वोटों का हिसाब लगाया जाए और यह और तीन से चार गुना तक हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक कहा गया है कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज़ से भाजपा इस रणनी​ति को ‘गेमचेंजर’ मान रही है.

गंगोत्री धाम जा रही कार खाई में गिरने से एक की मौत, उधर बद्रीनाथ नेशनल हाईवे ठप, जानिए डिटेल्स

चमोली में भूस्खलन से बंद हुआ हाईवे. (Image:ANI)

चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra 2021) के लिहाज़ से दो अहम खबरें आई हैं. एक तो चमोली ज़िले में भूस्खलन के चलते हाईवे बंद हो गया है. वहीं, उत्तरकाशी में एक सड़क रात के अंधेरे में तब हुआ जब यूपी के यात्री गंगोत्री की तरफ जा रहे थे.

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  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 10:28 IST
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देहरादून. उत्तराखंड में चार धाम यात्रा जारी है, लेकिन इसी बीच मौसम के चलते एक प्राकृतिक व्यवधान पैदा होने की खबर आई है. चमोली में बद्रीनाथ जाने वाला नेशनल हाईवे भूस्खलन के चलते एक बड़े जोड़ के बीच ठप हो गया है. दूसरी ओर उत्तरकाशी से एक सड़क हादसे की खबर है, जिसमें एक कार के करीब 100 मीटर गहरी खाई में गिर जाने से एक की मौत हो गई जबकि तीन अन्य घायल बताए जा रहे हैं. ये दोनों ही ज़िले चार धाम यात्रा के लिहाज़ से बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम यात्रा के लिए अहम हैं.

गंगोत्री धाम जा रहे थे यूपी के श्रद्धालु
उत्तरकाशी में हुए सड़क हादसे के बारे में एक खबर में बताया गया कि दुर्घटना दरबानी क्षेत्र के पास हुई. उत्तर प्रदेश के औरैया ज़िले के पर्यटक उस कार में सवार थे, जो खाई में जा गिरी. सूत्रों के हवाले से दी गई इस खबर में कहा गया है कि रात 9:30 बजे गंगोत्री धाम की तरफ जा रहे इन श्रद्धालुओं की कार के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना पर पुलिस, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंचीं. राहत कार्य को रात में ही अंजाम दिया गया.

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बद्रीनाथ हाईवे ठप होने के बारे में एएनआई ने ​ट्वीट किया.

हाईवे ठप होने से होगी मुश्किल
ज़िला आपदा प्रबंधन ​अधिकारी देवेंद्र पटवाल के हवाले से बताया गया कि हादसे में मारे गए व्यक्ति की शिनाख्त 32 वर्षीय हर्ष मिश्रा के रूप में हुई. वहीं, 29, 28 और 34 वर्षीय अंशुल, रमेश सिंह और विशाल कुशवाहा हादसे में घायल हुए. दूसरी तरफ, चमोली ज़िले में भूस्खलन का हादसा हुआ. समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट में बताया कि ज़िले के जोशीमठ और सैलंग के बीच बद्रीनाथ नेशनल हाईवे शुक्रवार सुबह ब्लॉक हो गया.

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गौरतलब है कि चार धाम यात्रा के लिए सबसे ज़्यादा भीड़ बद्रीनाथ धाम के लिए ही उमड़ रही है. न्यूज़18 आपको यह खबर भी दे चुका है कि देवस्थानम बोर्ड के द्वारा जो रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं, तय संख्या के हिसाब से बद्रीनाथ के लिए 15 अक्टूबर तक के लिए श्रद्धालुओं की बुकिंग पूरी हो चुकी है. ऐसे में, इस हाईवे के ठप होने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, प्रशासन यात्रियों से सतर्क रहते हुए यात्रा करने की हिदायतें भी जारी कर रहा है.

हाथियों ने बदल दी उत्तराखंड जाने वाली ट्रेनों की चाल, बदला समय, देखें पूरी लिस्ट

जंगली जानवरों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने अब उत्तराखंड के जंगलों में ट्रेनों की स्पीड कम करने का फैसला लिया है. (सांकेतिक फोटो)

Uttarakhand News: जंगली जानवरों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने लिया बड़ा फैसला, अब जंगलों से गुजरने वाली ट्रेनों की रफ्तार भी रहेगी कम, वहीं आगमन और प्रस्थान के समय में भी हुआ बड़ा बदलाव.

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देहरादून. जंगली जानवरों और खासकर हाथियों के चलते उत्तराखंड आने जाने वाली कई ट्रेनों का समय बदल गया है. यही नहीं रेलवे ने अब उत्तराखंड के जंगलों से निकलने वाली कई ट्रेनों की स्पीड भी कम कर दी है. ट्रेनों का बदला हुआ समय 1 अक्टूबर से लागू होगा. रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार जंगली जानवरों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट लगातार ट्रेनों की स्पीड कंट्रोल की सलाह दे रहे थे. जिस पर रेलवे ने विशेष कमेटी बनाई थी.
कमेटी के सुझाव को मानते हुए रेलवे ने ट्रेनों की स्पीड कम करने का फैसला लिया है. जिसकी वजह से कुमाऊं से जाने वाली कई ट्रेनों किस समय में बदलाव हुआ है. यही नहीं उत्तराखंड आने वाली ट्रेन में भी कुछ देरी से पहुंचेंगी.

किन ट्रेनों का बदला है समय देखें पूरी लिस्ट

  1. 05013 जैसलमेर-काठगोदाम स्पेशल ट्रेन काठगोदाम स्टेशन पर वर्तमान समय 04.55 बजे के स्थान पर बदले समय 05.05 बजे पहुंचेगी.
  2. 03019 हावड़ा-काठगोदाम ट्रेन काठगोदाम पर वर्तमान समय 09.00 बजे के स्थान पर 09.25 बजे पहुंचेगी.
  3. 02040 नई दिल्ली-काठगोदाम ट्रेन काठगोदाम पर वर्तमान समय 11.40 बजे के स्थान पर 11.55 बजे पहुंचेगी.
  4. 04690 जम्मूतवी-काठगोदाम ट्रेन काठगोदाम पर वर्तमान समय 13.35 बजे के स्थान पर 13.45 बजे पहुंचेगी.
  5. 04667 कानपुर सेन्ट्रल-काठगोदाम ट्रेन काठगोदाम स्टेशन पर वर्तमान समय 14.40 बजे के स्थान पर 14.55 बजे पहुंचेगी.
  6. 02091 देहरादून-काठगोदाम ट्रेन काठगोदाम स्टेशन पर वर्तमान समय 23.35 बजे के स्थान पर 23.45 बजे पहुंचेगी.
  7. 04126 देहरादून-काठगोदाम ट्रेन काठगोदाम स्टेशन पर वर्तमान समय 07.15 बजे के स्थान पर 07.20 बजे पहुंचेगी.
  8. 04616 अमृतसर-लालकुआं ट्रेन लालकुआं स्टेशन पर वर्तमान समय 20.30 बजे के स्थान पर 21.05 बजे पहुंचेगी.
  9. 05060 आनन्द विहार टर्मिनस-लालकुआं ट्रेन लालकुआं स्टेशन पर वर्तमान समय 20.30 बजे के स्थान पर समय 21.05 बजे पहुंचेगी.
  10. 02353 हावड़ा-लालकुआं ट्रेन लालकुआं स्टेशन पर वर्तमान समय 06.55 बजे के स्थान पर 07.00 बजे पहुंचेगी.
  11. 05044 काठगोदाम-लखनऊ जं. ट्रेन काठगोदाम से वर्तमान समय 11.45 बजे के स्थान पर 11.15 बजे प्रस्थान करेगी. हल्द्वानी से वर्तमान समय 12.02 के स्थान पर 11.45 बजे छूटेगी. लालकुआं से वर्तमान समय 12.40 बजे के स्थान पर 12.30 बजे छूटेगी.
  12. 05036 काठगोदाम-दिल्ली ट्रेन काठगोदाम से वर्तमान समय 09.05 बजे के स्थान पर 08.45 बजे प्रस्थान करेगी. हल्द्वानी से वर्तमान समय 09.22 के स्थान पर 09.07 बजे छूटेगी. लालकुआं से वर्तमान समय 09.59 बजे के स्थान पर 09.45 बजे छूटेगी.
  13. 02039 काठगोदाम-नई दिल्ली ट्रेन काठगोदाम से वर्तमान समय 15.30 बजे के स्थान पर 15.10 बजे प्रस्थान करेगी. हल्द्वानी से वर्तमान समय 15.47 के स्थान पर 15.29 बजे छूटेगी. लालकुआं से वर्तमान समय 16.19 बजे के स्थान पर 16.04 बजे छूटेगी तथा रूद्रपुर सिटी से वर्तमान समय 16.44 बजे के स्थान पर 16.48 बजे छूटेगी
  14. 05314 रामनगर-जैसलमेर ट्रेन रामनगर से वर्तमान समय 22.20 बजे के स्थान पर 22.15 बजे प्रस्थान करेगी. काशीपुर से वर्तमान समय 22.55 बजे के स्थान पर 22.50 बजे छूटेगी.
    05356 रामनगर-दिल्ली ट्रेन रामनगर से वर्तमान समय 10.10 बजे के स्थान पर 10.00 बजे प्रस्थान करेगी. काशीपुर से वर्तमान समय 10.38 बजे के स्थान पर 10.35 बजे छूटेगी.
  15. 05059 लालकुआं-आनन्द विहार टर्मिनल ट्रेन लालकुआं से वर्तमान समय 04.30 बजे के स्थान पर 04.25 बजे प्रस्थान करेगी.
  16. 09076 रामनगर-बान्द्रा टर्मिनल ट्रेन रामनगर से वर्तमान समय 16.35 बजे के स्थान पर 16.30 बजे प्रस्थान करेगी.
  17. 05331 काठगोदाम-मुरादाबाद ट्रेन काठगोदाम से वर्तमान समय 08.15 बजे के स्थान पर 07.25 बजे प्रस्थान करेगी. – 05333 रामनगर-मुरादाबाद ट्रेन रामनगर से वर्तमान समय 07.20 बजे के स्थान पर 07.15 बजे प्रस्थान करेगी.
  18. 04689 काठगोदाम-जम्मूतवी विषेष गाड़ी काठगोदाम से वर्तमान समय 18.20 बजे के स्थान पर 18.15 बजे प्रस्थान करेगी. हल्द्वानी से वर्तमान समय 18.37 के स्थान पर 18.35 बजे छूटेगी. लालकुआं से वर्तमान समय 19.15 बजे के स्थान पर 19.10 बजे छूटेगी तथा रूद्रपुर सिटी से वर्तमान समय 19.45 बजे के स्थान पर 19.42 बजे छूटेगी. बिलासपुर रोड से वर्तमान समय 20.01 बजे के स्थान पर 19.58 बजे छूटेगी.

Weather Update : यूपी, एमपी समेत 9 राज्यों में अगले 3 दिन तक होगी झमाझम बारिश

देश के 9 राज्यों में अगले 3 दिन तक झमाझम बारिश की उम्मीद. (फाइल फोटो)

Weather Alert : आईएमडी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, राजस्थान, ओडिशा और कोलकाता में अगले 3 दिन तक होगी भारी बारिश होगी.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 23, 2021, 20:52 IST
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नोएडा. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने देश के 9 राज्यों में अगले 3 दिनों तक झमाझम बारिश की संभावना जताई है. उसने कहा है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, राजस्थान, ओडिशा और कोलकाता में अगले 3 दिन तक होगी भारी बारिश होगी. देश में इस साल मॉनसून समय सीमा को लांघ कर सक्रिय है. यही वजह है कि गुजरात, बंगाल और महाराष्ट्र के आसपास की नदियों में जलस्तर बढ़ रहा है. नतीजतन, कई बड़े इलाकों को जलभराव का सामना करना पड़ रहा है. IMD का पूर्वानुमान है कि यूपी, मध्य प्रदेश, समेत देश के कुल 9 राज्यों में झमाझम बारिश देखने को मिलेगी.

आईएमडी की बुलेटिन में बताया गया है कि वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम झारखंड और छत्तीसगढ़ के उत्तर में चक्रवाती सर्कुलेशन के साथ कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और अगले 24 घंटों के दौरान निम्न दबाव कमजोर हो सकता है. बुलेटिन के मुताबिक, अगले तीन दिनों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर उत्तरी छत्तीसगढ़ और उत्तरी मध्य प्रदेश में चक्रवाती सर्कुलेशन के आगे बढ़ने की उम्मीद है. इसके अलावा, एक चक्रवाती सर्कुलेशन पश्चिमी राजस्थान और उसके पड़ोस में निचले क्षोभमंडल स्तर पर स्थित है और 24 सितंबर तक इसके वहीं रहने की उम्मीद है.

यूपी में भी भारी बारिश

आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, कल यानी 24 सितंबर तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है. बुलेटिन में बताया गया है कि 26 सितंबर तक पूर्वी राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश के साथ भारी बारिश की संभावना है. 24 सितंबर तक छत्तीसगढ़, विदर्भ और मध्य प्रदेश में भारी बारिश होने की संभावना है. उत्तराखंड में 26 सितंबर तक भारी से भारी बारिश होगी. आईएमडी के मुताबिक, 24 सितंबर की शाम के आसपास पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जो संभवतः अगले 48 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर ओडिशा की ओर बढ़ेगा. इस प्रभाव के तहत 25 सितंबर से ओडिशा और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है.

PM नरेंद्र मोदी अगले महीने आ सकते हैं केदारनाथ! PMO से उत्‍तराखंड पहुंची टीम

अगले महीने केदारनाथ आ सकते हैं पीएम मोदी.

Uttarakhand Election 2022 : राज्य में पिछले हफ्ते से ही चार धाम यात्रा शुरू हुई है और करीब पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं. वहीं, केदारनाथ धाम नवनिर्माण के तहत विकास कार्य भी हुए हैं. इन सभी कारणों से पीएम मोदी का दौरा काफी अहम होगा.

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देहरादून. उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र सियासी सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं. अक्टूबर में भाजपा के बड़े नेता उत्तराखंड पहुंचेंगे. इसी सिलसिले में पीएम नरेंद्र मोदी का केदारनाथ दौरा अक्टूबर में बन सकता है. यहां काम का जायज़ा लेने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से एक टीम केदारनाथ पहुंची है. पीएमओ में सलाहकार भास्कर खुल्बे, आईएएस मंगेश घिल्डियाल अन्य अफसरों के साथ केदारनाथ पहुंचे हैं. ये टीम गुरुवार दोपहर 12 बजे तक यहां कामों और व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे. बताया जा रहा है कि 6 अक्टूबर के बाद प्रधानमंत्री मोदी केदारनाथ दौरे पर आ सकते हैं.

इसके पहले न्यूज़18 ने आपको बताया था कि कैसे बीजेपी अक्टूबर के महीने में पार्टी के शीर्ष नेताओं के उत्तराखंड दौरे तय कर रही है. फ़िलहाल प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के दौरों को लेकर स्थान, दिन और समय के बारे में रूपरेखा बनाई जा रही है. इसी रूपरेखा के तहत केदारनाथ में व्यवस्थाओं का जायज़ा लेने पीएमओ से टीम पहुंची है, जिससे माना जा रहा है कि पीएम मोदी यहां आने वाले हैं. पीएम मोदी का दौरा केदारनाथ धाम के नवनिर्माण के लिहाज़ से भी अहम हो सकता है.

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बीजेपी के दिग्गज नेता भी अक्टूबर में आएंगे

बताया जा रहा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का 1 अक्टूबर को उत्तराखंड आने का प्रोग्राम है, तो 16-17 अक्टूबर को अमित शाह के देहरादून और हरिद्वार के दौरे की तैयारी है. प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री के दौरे में सबसे अहम गृह मंत्री अमित शाह का दौरा माना जा रहा है, जो हरिद्वार में संतों से मुलाकात के साथ चुनावी मूड भी भांपकर जाएंगे.

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