उत्तराखंड में हायर एजुकेशन का बुरा हाल, राज्य की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में 7 साल बाद शुरू हुआ ये कोर्स

श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी से कुल 51 सरकारी पीजी कॉलेज संबद्ध हैं. इन्हीं 51 सरकारी पीजी कॉलेज में यूनिवर्सिटी ने पीएचडी कोर्स के लिए गाइड तय कर दिए हैं.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 6, 2019, 7:41 PM IST
उत्तराखंड में हायर एजुकेशन का बुरा हाल, राज्य की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में 7 साल बाद शुरू हुआ ये कोर्स
सात साल बाद शुरू हुआ पीएचडी का कोर्स.
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 6, 2019, 7:41 PM IST
जूनियर (स्कूल) एजुकेशन के लिए उत्तराखंड के कई शहर देशभर में मशहूर हैं. मसलन मसूरी, नैनीताल और देहरादून के स्कूल दशकों से लोगों को फेवरेट एजुकेशन डेस्टिनेशन रहे हैं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि हायर एजुकेशन में अब तक स्टेट अपना कोई खास मुकाम हासिल नहीं कर पाया है. हालात ये हैं कि राज्य की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी कही जाने वाली श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी में पहली बार पीएचडी कोर्स अब शुरू हो रहा है.

सात साल भी है स्‍टूडेंट्स को इसका इंतजार
साल 2012 में श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी बनने के बाद से अब तक यूनिवर्सिटी के हज़ारों स्टूडेंट्स पास आउट हो चुके हैं और सैकड़ों स्टूडेंट्स पीजी कर चुके हैं. जबकि 7 सालों से तमाम स्टूडेंट्स को पीएचडी करने के लिए सिर्फ इंतजार करना पड़ा. हालांकि इस बार स्टूडेंट्स के लिए पीएचडी कोर्स शुरू होने वाला है.

फर्स्ट बैच में 70 स्टूडेंट्स और 51 गाइड

श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी से कुल 51 सरकारी पीजी कॉलेज संबद्ध हैं. इन्हीं 51 सरकारी पीजी कॉलेज में यूनिवर्सिटी ने पीएचडी कोर्स के लिए गाइड तय कर दिए हैं.वहीं इस बार 70 स्टूडेंट्स को यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का मौका मिलेगा. यूनिवर्सिटी के कुलपति यूएस रावत का कहना है कि जल्द ही एंट्रेस एग्जाम के बाद प्री-पीएचडी कोर्स में एडमिशन हो जाएंगे और पहली बार यूनिवर्सिटी में पीएचडी कोर्स की शुरुआत हो रही है.

उत्तराखंड में हायर एजुकेशन की हालत खराब होने की वजह से रिसर्च एजुकेशन का एरिया कभी डेवलप नहीं हो पाया.


क्यों हुई पीएचडी कोर्स में इतनी देरी?
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साल 2009 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया था और तभी से यूनिवर्सिटी के संबद्ध ज्यादातर कॉलेजों के सामने तस्वीर साफ नहीं थी. हालांकि 2012 में श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी बनने के बाद सरकारी डिग्री कॉलेजों ने राहत की सांस ली और गढ़वाल यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी को ट्रांसफर कर दिए गए. लेकिन बीते 7 सालों में हालात इतने खराब रहे हैं कि यूनिवर्सिटी ऋषिकेश में कैंपस के लिए संघर्ष कर रही है और ऐसे में पीएचडी जैसे इंपार्टमेंट कोर्स के लिए कभी काम नहीं हो पाया.

रिसर्च फील्ड में आज भी पिछड़ा उत्तराखंड
किसी भी एजुकेशन सिस्टम में रिसर्च का रोल सबसे खास होता है, लेकिन उत्तराखंड में हायर एजुकेशन की हालत खराब होने की वजह से रिसर्च एजुकेशन का एरिया कभी डेवलप नहीं हो पाया. उत्तराखंड में टेक्निकल, मेडिकल और आयुर्वेद यूनिवर्सिटीज़ में रिसर्च सेक्टर करीब-करीब ज़ीरो है. हालात ये हैं कि कोर्स ही ढंग से नहीं चल पा रहे. इसी का नतीजा है कि स्टेट के सबसे ज्यादा कॉलेजों को एफिलिएशन देने वाली श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी को पीएचडी कोर्स शुरू करने में 7 साल का वक्त लग गया.

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First published: August 6, 2019, 7:35 PM IST
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