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वेतन काटे जाने से कर्मचारी नाराज़, फिर से आंदोलन का ऐलान... इस बार काम का हर्जा नहीं

सरकार के सामूहिक अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के फ़ैसले के बाद कर्मचारी संगठनों ने फिर से आंदोलन करने का ऐलान किया है.
सरकार के सामूहिक अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के फ़ैसले के बाद कर्मचारी संगठनों ने फिर से आंदोलन करने का ऐलान किया है.

कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर आंदोलन करने का ऐलान किया है, हालांकि इस बार कर्मचारी काम का हर्जा करने से बच रहे हैं.

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उत्तराखंड में एक बार फिर कर्मचारी संगठन और सरकार आमने सामने आ गए हैं. सरकार ने कड़ा रुख दिखाते हुए 31 जनवरी को अवकाश पर गए कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट दिया है तो इससे नाराज़ कर्मचारी संघों ने आंदोलन का ऐलान कर  दिया है.

उत्तराखंड में हड़ताल कोई नई बात नहीं है. नया है तो सरकार का एक्शन प्लान. ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार ने आंदेालनों को लेकर सिर्फ कड़ी चेतावनी ही नहीं दी उस पर अमल भी किया. सरकार ने नो वर्क, नो पे के आदेश के बावजूद सामूहिक अवकाश पर गए कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट लिया गया है.

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इसके साथ ही सरकार ने कर्मचारियों से वार्ता की और जिन बिंदुओं पर सहमति बनी उन्हें मंजूर कर लिया. शेष मांगों के परीक्षण के लिए कमेटी गठित कर दी गई लेकिन अब एक दिन का वेतन काटने का आदेश वापस लेने की मांग मानने से सरकार ने साफ़ तौर पर इनकार कर दिया है.
सरकार के इस अप्रत्याशित रुख से कर्मचारी संगठन सकते में हैं. कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर आंदोलन करने का ऐलान किया है, हालांकि इस बार कर्मचारी काम का हर्जा करने से बच रहे हैं. विभिन्न कर्मचारी संगठनों की कोओर्डिनेशन कमेटी के संयोजक दीपक जोशी के अनुसार 12-13 को प्रदेश भर के कर्मचारी काले फ़ीते बांधकर काम करेंगे और सरकार के फ़ैसले का विरोध करेंगे.

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इसके बाद 15 तारीख की शाम सभी ज़िलों में 6.30 बजे से एक कैंडल मार्च रखा गया है, जो ज़ाहिराना तौर पर ऑफ़िस की छुट्टी हो जाने के बाद निकाला जाएगा. इसके बाद कर्मचारी संगठन 24 तारीख को ज़िला स्तरीय रैली निकालेंगे. ख़ास बात यह है कि यह दिन रविवार है.

जोशी के अनुसार उसी दिन प्रांतीय नेतृत्व बैठक करेगा और अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान करेगा. हालांकि राज्य सरकार ने लॉलीपॉप और डंडा वाला जो खेल खेला है उसके बाद फिर हड़ताल पर जाने का कर्मचारियों का फ़ैसला आसान नहीं रहेगा.

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