Union Budget 2018-19 Union Budget 2018-19

कैलाश मानसरोवर के लिए बढ़ाई गई आर्थिक सहायता, अब 30,000 रुपये मिलेंगे

News18Hindi
Updated: January 12, 2018, 10:53 AM IST
कैलाश मानसरोवर के लिए बढ़ाई गई आर्थिक सहायता, अब 30,000 रुपये मिलेंगे
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Updated: January 12, 2018, 10:53 AM IST
उत्तराखंड से कैलाश मानसरोवर जाने वाले स्थानीय तीर्थ यात्रियों को आर्थिक सहायता सरकार ने 5,000 रुपये बढ़ा दी है. अब तक यह राशि 25,000 रुपये थी, इसे बढ़ाकर अब 30,000 रुपये कर किया जाएगा.

प्रदेश के पर्यटन, तीर्थाटन, और संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में यह ऐलान किया. उन्होंने विभाग में संचालित गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत संचालित छह महीने की कार्यशालाओं में प्रतिभागी शिष्यों को एक हज़ार रुपये प्रतिमाह मानदेय की स्वीकृति भी दी. वर्तमान में कार्यशाला में गुरु को 3 हज़ार रुपये प्रतिमाह और वाद्य-यंत्र बजाने वाले को 2 हज़ार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है.

वर्तमान वित्तीय वर्ष में पौड़ी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में इस तरह की 14 कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है. संस्कृति मंत्री की पहल पर फचली छह अगस्त से नौ अगस्त तक हरिद्वार में सम्पन्न नमो नाद कार्यशाला में प्रदेश के 1,242 ढोल-दमाऊ वादकों द्वारा विभिन्न तालों में वादों का प्रदर्शन किया गया था.

संस्कृति मंत्री ने प्रदेश की अन्य महान विभूतियों की जयंती को भी योजना में जोड़ने के निर्देश दिए. वर्तमान में संस्कृति विभाग द्वारा 10 सितम्बर को भारत रत्न पण्डित गोविन्द बल्लभ पन्त और 24 दिसम्बर को इन्द्रमणि बडोनी की जयन्ती मनाई जाती है. उन्होंने विक्टोरिया क्रॉस सम्मानित दरबान सिंह और गबर सिंह तथा अन्य महान विभूतियों की जयन्ती आयोजन के भी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए.

सतपाल महारजा ने पर्यटन विभाग द्वारा संरक्षित स्मारकों, जिनमें पहुंच मार्ग नहीं है, के निर्माण हेतु क्षेत्रीय विधायकों से सहयोग हेतु उनकी ओर से पत्र तैयार करने के निर्देश दिए. वर्तमान में पुरातत्व विभाग के अन्तर्गत 71 पुरातात्विक स्थल/स्मारक हैं, जिनमें 47 संरक्षित एवं 24 संरक्षणाधीन हैं तथा पर्यटन विभाग द्वारा 42 पुरातात्विक स्थल/स्मारक का अनुरक्षण किया जा रहा है, जिनमें कतिपय स्थलों में पहुंच मार्ग नहीं हैं.

संस्कृति मंत्री ने संस्कृति विभाग के अधीन स्थानीय संग्रहालयों, पिथौरागढ़ और देहरादून में निर्माणाधीन संग्रहालय, में उत्तराखण्ड की संस्कृति के अभिलेख एवं कलाकृत्तियों को संरक्षित करने के साथ-साथ इन संग्राहालयों में पाण्डुलिपियों का डिजिटाइजेशन भी कराने के निर्देश दिए. उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से प्रसिद्ध स्थलों जैसे भगवान कृष्ण की पौराणिक गाथा से जुड़ी चन्द्रापुरी, पाण्डवों के इतिहास से जुडे़ लाखामण्डल व अन्य तथा भगवान राम की पौराणिक गाथाओं से जुड़े देवप्रयाग, कमलेश्वर आदि स्थलों के आस-पास अवस्थापना विकास प्रस्ताव सम्बन्धित स्थल का निशुल्क साहित्य प्रकाशन करने की आवश्यकता पर बल दिया.

संस्कृति मंत्री ने युवा साहित्यकारों और कलाकारों में प्रेरणा पैदा करने के लिए प्रदेश के साहित्यकारों और कलाकारों को सम्मानित करने की योजना का भी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश निदेशक संस्कृति को दिए.

उन्होंने देहरादून हवाई अड्डे में यहाँ की संस्कृति की झलक प्रदर्शन की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे पर्यटकों में संस्कृति के प्रति आकर्षण के साथ-साथ संस्कृति का परिचय भी कराया जा सके. इसके लिए उन्होंने स्थानीय कलाकारों को भी सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए.

संस्कृति मंत्री ने विभाग के अधीनस्थ अल्मोड़ा, पौड़ी तथा देहरादून में संचालित भातखण्डे हिन्दुस्तानी संगीत महाविद्यालय, वृद्ध एवं विपन्न कलाकारों, लेखकों को मासिक पेंशन, राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में एपण, लोक सहित्व, वाद्य-यंत्रों को संरक्षित करने, स्वामी विकेकानन्द के उत्तराखण्ड से जुड़ी स्मृतियों को संरक्षित करने, पारम्परिक मेलों, पुस्तक प्रकाशन और संस्कृति से जुड़ी स्वायत्तशासी संस्थाओं को अनुदान, अनुसूचित जाति बाहूल्य क्षेत्रों में सास्कृतिक भवन निर्माण प्रस्तावों की प्रगति जनजाति कला एवं संस्कृति का अभिलेखीकरण, संरक्षण तथा उन्नयन आदि योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की.

बैठक में निदेशक संस्कृति बीना भट्ट, अनुभाग अधिकारी संस्कृति गीता शरद, प्रधानाचार्य भातखण्डे अल्मोड़ा योगेश पन्त, प्रधानाचार्य भातखण्डे हिन्दुस्तानी संगीत महाविद्यालय देहरादून अरुण कुमार शर्मा और सहायक निदेशक आशीष कुमार सहित संस्कृति विभागीय अधिकारी मौजूद थे.

 
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