उत्तराखंड से था सुषमा स्वराज का किस्मत कनेक्शन... ऐसे बनी थीं राज्यसभा सांसद

19 साल पहले लॉटरी के ज़रिए सुषमा स्वराज उत्तराखण्ड को मिली थीं.

Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: August 7, 2019, 12:50 PM IST
उत्तराखंड से था सुषमा स्वराज का किस्मत कनेक्शन... ऐसे बनी थीं राज्यसभा सांसद
राज्यसभा सांसद चुने जाने के दौर को याद करते हुए उत्तराखण्ड सरकार में मंत्री मदन कौशिक कहते हैं कि उन्होंने तब कहा था कि देखो किस्मत ने मुझे देवभूमि की सेवा करने के लिए चुना है.
Manish Kumar
Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: August 7, 2019, 12:50 PM IST
दिवंगत सुषमा स्वराज का उत्तराखण्ड से ऐसा गहरा नाता था जिसे किस्मत की बात कह सकते हैं. 19 साल पहले लॉटरी के ज़रिए सुषमा स्वराज उत्तराखण्ड को मिली थीं. अजीब बात है न ! प्रदेश के बंटवारे के समय की घटनाएं जिनके ज़हन में हैं, उन्हें याद याद होगा कि साल 2000 में केन्द्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उत्तराखण्ड को अलग राज्य का दर्जा दिया था. विधायकों से लेकर सांसदों तक का बंटवारा हुआ. अविभाजित यूपी से राज्यसभा के सांसदों का भी बंटवारा हो रहा था और यह तय करना था कि उत्तराखण्ड से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कौन करेगा. कोई फ़ॉर्मूला नहीं सूझा तो तय हुआ कि लॉटरी निकाली जाए. उत्तराखण्ड के लिए तय की गई तीन सीटों के लिए जो लॉटरी निकाली गई उसमें सुषमा स्वराज का भी नाम आया. इस तरह वे उत्तराखण्ड से राज्यसभा की सांसद बनीं. उनके साथ अन्य दो संघप्रिया गौतम और मनोहर कांत ध्यानी भी लॉटरी से सांसद चुने गए थे.

राज्यसभा सांसद चुने जाने के दौर को याद करते हुए उत्तराखण्ड सरकार में मंत्री मदन कौशिक कहते हैं कि उन्होंने तब कहा था कि देखो किस्मत ने मुझे देवभूमि की सेवा करने के लिए चुना है. कौशिक बताते हैं कि अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने बहुत कुछ उत्तराखण्ड के विकास के लिए किया...

एम्स ऋषिकेश 

उत्तराखण्ड से राज्यसभा का सांसद रहते हुए सुषमा स्वराज की इस प्रदेश को सबसे बड़ी देन ऋषिकेश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना थी. भाजपा के एक नेता ने बताया कि तब एम्स की स्थापना कहां की जाए इसे लेकर  बड़ी खींचतान मची थी.

देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार के नेताओं के बीच होड़ मची थी कि उनके क्षेत्र में ही एम्स की नींव रखी जाये लेकिन, सुषमा स्वराज ने ऐसा निर्णय लिया जिससे कोई असमहत नहीं हो पाया. उन्होंने बोला था कि इसकी स्थापना ऐसी जगह होनी चाहिए जहां से सभी के लिए सहूलियत हो और इसी के मद्देनजर एम्स की स्थापना हरिद्वार और देहरादून के बीच ऋषिकेश में की गई.

दूरदर्शन केन्द्र 

हरिद्वार बाई पास रोड पर बना दूरदर्शन का भवन भी सुषमा स्वराज की देन है. आज इस केन्द्र से उत्तराखण्ड के ग्रामीण इलाकों तक रेडियो और टीवी पर स्थानीय भाषा के प्रोग्राम पहुंच रहे हैं. इसे भी सुषमा स्वराज ने अपने सूचना प्रसारण मंत्री रहते हुए सेंक्शन किया था.
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सुषमा स्वराज ही वह पहली सांसद हैं जिन्होंने सरकारी स्कूलों में पहली बार लड़कियों को होने वाली परेशानी की सुध ली थी. टॉयलेट बनवाने पर पिछले सालों में मोदी सरकार जो अभियान चला रही है उस अभियान को सुषमा स्वराज 19 साल पहले उत्तराखण्ड में चला चुकी हैं. तब स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट की व्यवस्था नहीं हुआ करती थी. राज्यसभा सांसद के फण्ड से उन्होंने बड़ा बजट दिया था जिससे स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से टॉयलेट बनवाए गए थे. ​

उत्तराखण्ड से उनके लगाव और इसे विकास के रास्ते पर ले जाने के उनके प्रयासों के कारण ही बड़ी संख्या में यहां के नेता दिल्ली उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए गए हैं. अब वह हमारी यादों में हैं लेकिन ये यादें हमेशा अमिट रहेंगी.

न्यूज़ 18 की भी उन्हें श्रद्धांजलि. ​

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First published: August 7, 2019, 12:41 PM IST
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