टीचर्स, पेरेंट्स चाहते हैं कि 10वीं, 12वीं की क्लास हो शुरू... 14 को कैबिनेट तय करेगी कि स्कूल खोलें या नहीं

शुक्रवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने राज्य के सभी जिलों से पैरेंट्स और टीचर्स की राय और सुझाव लिए.
शुक्रवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने राज्य के सभी जिलों से पैरेंट्स और टीचर्स की राय और सुझाव लिए.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूल में पढ़ रहे हर बच्चे की कोरोना से सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हम सबकी है और प्राइवेट हो या सरकारी स्कूल कोई अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता.

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देहरादून. उत्तराखंड में 15 अक्टूबर के बाद स्कूल खुलेंगे या नहीं इस पर छाई धुंध 14 अक्टूबर को छंट सकती है. राज्य के शिक्षा विभाग ने स्कूल खोलने को लेकर ज़िलाधिकारियों के माध्यम से सभी ज़िलों के अभिभावकों, प्राइवेट स्कूलों की राय जानी थी. शिक्षा विभाग तक यह सूचना पहुंच गई हैं. शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के अनुसार ज़्यादातर जगहों से जो सुझाव आए हैं उनमें कहा गया कि 10 वीं और 12 वीं क्लास की पढ़ाई शुरू कर दी जाए. शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब ये सुझाव कैबिनेट में रखे जाएंगे और फिर 14 अक्टूबर को सरकार फैसला लेगी कि इस मामले में क्या करना है?

सबकी ज़िम्मेदारी है 

अगर सरकार ने टीचर्स और पेरेंट्स के सुझाव को माना तो 15 अक्टूबर से 10वीं और 12वीं क्लास की पढ़ाई शुरू हो सकती है और करीब 7 महीने बाद स्कूलों में लगे ताले स्टूडेंट्स के लिए खुल सकते हैं. शुक्रवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने राज्य के सभी जिलों से पैरेंट्स और टीचर्स की राय और सुझाव लिए.



पेरेंट्स और टीचर्स ने यह कहते हुए स्कूल खोलने को ज़रूरी बताया कि ऑनलाइन एजुकेशन का गलत इस्तेमाल भी हो रहा है जिससे बच्चों के बिगड़ने का डर है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूल में पढ़ रहे हर बच्चे की कोरोना से सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हम सबकी है और प्राइवेट हो या सरकारी स्कूल कोई अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता.
स्कूल चाहते थे, उन्हें कोई कुछ न कहे

बता दें कि प्राइवेट स्कूलों ने कहा था कि अगर स्कूल में किसी बच्चे को कोरोना होता है, तो स्कूल की ज़िम्मेदारी तय न की जाए. इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों की एक संस्था तो तीन महीने तक स्कूल न खोले जाने की बात भी कर रही है.

उत्तराखंड में कोरोना के बाद सबसे ज़्यादा सवाल स्कूल एजुकेशन को लेकर खड़े हुए हैं. जहां प्राइवेट स्कूल अब भी ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर फ़ीस वसूल रहे हैं वहीं सरकारी स्कूलों के ज़्यादातर बच्चे तो इससे भी वंचित हैं. दरअसल सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज़्यादातर बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए संसाधन ही नहीं है.
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