उत्तराखंड के खराब सिस्टम की फिर खुली पोल, 2013 की आपदा के बाद भी कुछ नहीं बदला

Uttarakhand News-टिहरी सड़क हादसे में 10 बच्चों की जान चली गई. हैरानी की बात ये है कि 9 सीट वाली मैक्स जीप में 20 बच्चे सवार थे. इसने सरकार के खराब सिस्टम की पोल खोल दी है.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 8, 2019, 4:26 PM IST
उत्तराखंड के खराब सिस्टम की फिर खुली पोल, 2013 की आपदा के बाद भी कुछ नहीं बदला
शासन की कछुआ चाल बनी मुसीबत.
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 8, 2019, 4:26 PM IST
उत्‍तराखंड के टिहरी जिले में 6 अगस्त को हुई सड़क दुर्घटना में 10 बच्चों की जान चली गई, तो चमोली जिले में बस की छत पर बोल्डर गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई. इन दो बड़ीदुर्घटनाओं ने उत्तराखंड के खराब सिस्टम की पोल खोल दी है और इससे विभागों की लापरवाही जान पर भारी पड़ती नजर आ रही है.

शासन की कछुआ चाल बनी मुसीबत
साल 2013 में केदारनाथ में आई आपदा में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 5 हजार लोग काल के गाल में समा गए थे. इसके बाद 2018 में पौड़ी जिले के धुमाकोट में बस खाई में गिरने से 49 लोगों की मौत हो गई, लेकिन इतनी बड़ी आपदा और दुर्घटनाओं के बाद भी किसी ने कोई सबक नहीं सीखा. उत्तराखंड में सरकारें बदल रही हैं, लेकिन सुस्त शासन अपनी कछुआ चाल से काम में लगा है.

2013 की केदारनाथ आपदा को 6 साल बीत चुके हैं, लेकिन छोटी सी बारिश में प्रशासन के हाथ-पांव फूल जाते हैं.


आपदा-दुर्घटना के लिए इफेक्टिव सिस्टम नहीं
2013 की केदारनाथ आपदा को 6 साल बीत चुके हैं, लेकिन छोटी सी बारिश में प्रशासन के हाथ-पांव फूल जाते हैं. 9 पहाड़ी जिलों में आज भी आपदा से निपटने का कोई अलर्ट सिस्टम तैयार नहीं हो पाया है, तो सैटेलाइट फोन से लेकर एयर एंबुलेंस तक सिर्फ बातों में है. साफ है कि जमीन पर कुछ नज़र नहीं आता.

आपको बता दें कि टिहरी में हुई दुर्घटना में घायल बच्चों को जिस हेलीकॉप्टर से टिहरी लाया गया. उसमें जरूरी मेडिकल सुविधाएं नहीं थी. इसी तरह 2018 में धुमाकोट बस हादसे में दुर्घटना की सूचना कई घंटे बाद लगी और दुर्घटना स्थल से घायलों को निकालने में पूरा दिन लग गया था.
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एक-दूसरे पर टाल रहे जिम्‍मेदारी
टिहरी सड़क हादसे में 10 बच्चों की जान चली गई. हैरानी की बात ये है कि 9 सीट वाली मैक्स जीप में 20 बच्चे सवार थे. बावजूद इसके परिवहन मंत्री इसे परिवहन विभाग की लापरवाही नहीं मानते. उत्तराखंड के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य कहते हैं, 'इतनी बड़ी घटना हुई है जो हम सबके लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. दुखद है. लेकिन ये सिर्फ परिवहन विभाग ही नहीं, बल्कि सबकी सामूहिक भागीदारी है. परिवहन विभाग तो है ही, गृह विभाग और लोक निर्माण विभाग भी है. एक सामूहिक जिम्मेदारी है और सबको अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए. सड़कें कहीं खराब हैं और कहीं घुमावदार मोड़ हैं, लिहाजा ट्रैफिक नियमों का पालन किया जाना जरूरी है.

बड़े हादसे के बाद भी...
आपदा या दुर्घटना में तमाम लोगों के जान गंवाने के बाद भी उत्तराखंड में सरकारें और शासन कोई सबक नहीं सीखते. जबकि कोई संजीदा भी नजर आता है.

वरिष्ठ पत्रकार नीरज कोहली कहते हैं कि उत्तराखंड अलग राज्य तो बन गया, लेकिन कोई सिस्टम तैयार नहीं हो पाया, जिसका नतीजा ये रहा कि 13 जिलों वाले छोटे से राज्य में सरकार और शासन वक्त बिता रहे हैं. आपदा की स्थितियों से कैसे निपटा जाए और दुर्घटनाओं को कैसे रोका जाए, ये सोचने वाला कोई नहीं है. इतना नहीं सरकारें, जांच, मुआवजा और सस्पेंशन के अलावा कोई चौथा काम नहीं करती हैं.

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First published: August 8, 2019, 4:17 PM IST
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