बिल्डर ने समय से नहीं दिया फ्लैट तो उपभोक्ता फोरम ने सुनाया यह फरमान...

उत्तराखंड में बिल्डर ने फ्लैट के लिए दो लोगों से एडवांस में पैसे लिए लेकिन इसके बावजूद उन्हें कब्जा नहीं दिया. इतना ही नहीं, बिल्डर ने एडवांस में ली गई धनराशि तक वापस करने से मना कर दिया.

News18 Uttarakhand
Updated: July 13, 2019, 9:22 AM IST
बिल्डर ने समय से नहीं दिया फ्लैट तो उपभोक्ता फोरम ने सुनाया यह फरमान...
प्रतीकात्मक फोटो: देहरादून में फ्लैट का कब्जा नहीं दिए जाने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला
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Updated: July 13, 2019, 9:22 AM IST
उत्तराखंड में बिल्डर ने फ्लैट के लिए दो लोगों से एडवांस में पैसे लिए लेकिन इसके बावजूद उन्हें कब्जा नहीं दिया. इतना ही नहीं, बिल्डर ने एडवांस में ली गई धनराशि तक वापस करने से मना कर दिया. दोनों उपभोक्ता न्याय मांगने जिला उपभोक्ता फोरम देहरादून पहुंच गए. उपभोक्ता फोरम ने बिल्डर को दोनों उपभोक्ताओं से ली गई धनराशि लौटाने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही बिल्डर को दोनों ही उपभोक्ताओं को मानसिक पीड़ा पहुंचाए जाने के बतौर 25-25 हजार रुपये भी देने को भी कहा गया है. फोरम ने बिल्डर को आदेश दिया कि यशवंत पाल को 2.70 लाख की धनराशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से अदा की जाए, जबकि विजय वर्मा को 3.19 लाख की धनराशि दी जाए. इसके साथ ही केस लड़ने के खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये भी अदा किए जाएं.

यह है मामला



फ्लैट बुक-flat booking
देहरादून के जाखन निवासी यशवंत पाल और कंडोली निवासी विजय वर्मा ने वर्ष 2009 में गणपति बिल्डर्स से फ्लैट बुक कराया था.


देहरादून के जाखन निवासी यशवंत पाल और कंडोली निवासी विजय वर्मा ने वर्ष 2009 में गणपति बिल्डर्स से फ्लैट बुक कराया. फ्लैट की कीमत 16.99 लाख रुपये तय हुई थी. उपभोक्ता यशवंत, विजय और बिल्डर के बीच वर्ष 2009 के नवंबर में कांट्रैक्ट भी हुआ. इस कांट्रैक्ट के अनुसार बिल्डर को दो साल के भीतर दोनों ही उपभोक्ताओं को फ्लैट का कब्जा देना था. ऐसा नहीं होने पर प्रति माह पांच हजार रुपये के हिसाब से बिल्डर को पेनाल्टी देनी थी. फ्लैट की एवज में बिल्डर ने यशवंत पाल और विजय वर्मा से कुछ रकम एडवांस भी लिए थे. बिल्डर ने आश्वासन दिया कि जल्द ही टाउनशिप तैयार करके फ्लैट का कब्जा उन्हें दे दिया जाएगा, लेकिन तय समय पर फ्लैट नहीं दिया गया.

बिल्डर ने दिया ये तर्क

बिल्डर ने फोरम के समक्ष कहा कि कंस्ट्रक्शन का काम पूरा नहीं हो पाया है. गणपति बिल्डर ने फ्लैट के निर्माण कार्य पूरा नहीं होने की वजह वहां पास ही कूड़ा जमा होने के कारण काम तेजी से नहीं आ पाई. बिल्डर ने फोरम के सामने यह दलील दिया कि बारिश ज्यादा होने के चलते निर्माण सामाग्री देहरादून में कम आने पर कार्य में देरी हुई. बिल्डर ने संबंधित लोगों पर फ्लैट लेने का इच्छुक नहीं होने का भी आरोप लगाया और वाद खारिज करने का तर्क दिया. दोनों उपभोक्ताओं ने फोरम के समक्ष साक्ष्य और शपथ पत्र प्रस्तुत किए.

फोरम ने  सुनाया ये फैसला
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फोरम ने दस्तावेजों को गौर से पढ़ा और बिल्डर और उपभोक्ताओं की बहस सुनी. इसके बाद फोरम ने कहा कि बिल्डर ने फ्लैट का लोक लुभावन विज्ञापन देकर उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित किया इसलिए बिल्डर की यह जिम्मेदारी बनती थी कि वह समय पर फ्लैट मुहैया कराए.

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