त्रिवेंद्र सिंह का फॉरेस्ट गार्ड भर्ती का फैसला पलटेगी तीरथ सरकार, ये हो सकती है नई व्यवस्था

त्रिवेंद्र सिंह का एक और फैसला पलटेगी तीरथ सरकार, फॉरेस्ट गार्ड भर्ती अब डीएफओ स्तर पर कराने की तैयारी

त्रिवेंद्र सिंह का एक और फैसला पलटेगी तीरथ सरकार, फॉरेस्ट गार्ड भर्ती अब डीएफओ स्तर पर कराने की तैयारी

त्रिवेंद्र सरकार ने फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से कराने का जो फैसला लिया था, उसे पलटकर अब डीएफओ स्तर पर ही भर्ती कराने की कवायद चल रही है. तीरथ सिंह रावत सरकार की ओर से इस पर जल्द फैसला हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2021, 5:47 PM IST
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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) की तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) सरकार जल्द ही त्रिवेंद्र सरकार का एक और फैसला पलट सकती है. त्रिवेंद्र सरकार ने फॉरेस्ट गार्ड (Forest Guard) की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से कराने का जो फैसला लिया था, उसे पलटकर अब डीएफओ स्तर पर ही भर्ती कराने की कवायद चल रही है. तीरथ सिंह रावत सरकार की ओर से इस पर जल्द फैसला हो सकता है. तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री बनते ही पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कई फैसले पलट दिए हैं.

उत्तराखंड में डीएफओ स्तर पर फॉरेस्ट गार्ड भर्ती का मामला हमेशा ही विवादों में रहा है. साल 2013 में राजाजी पार्क में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती घोटाले की फाइल अब भी क्लोज नहीं हो पाई है. पारदर्शिता बनी रहे इसके लिए त्रिवेंद्र सरकार ने 2017 में फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से कराने का निर्णय लिया था. 1213 फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती चयन प्रक्रिया अभी भी आयोग में लंबित है. वन मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि इसमें लंबा समय लग रहा है. लिहाजा डीएफओ स्तर पर ही फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती हो इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है.

इस मामले पर विपक्ष के अपने अलग तर्क हैं. विपक्ष को आयोग की जगह डीएफओ को भर्ती का अधिकार देने की मंत्री की मंशा पर खोट नजर आ रहा है. कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना कि चुनाव नजदीक हैं. ऐसे में अपने लोगों को एडजस्ट करने का रास्ता खोजा जा रहा है.

डीएफओ स्तर पर फॉरेस्ट गार्ड की भर्तियां पहले भी विवादों में रही हैं, अब एक बार फिर से उसी ट्रेक पर जाना कितना सही होगा यह कहा नहीं जा सकता. यही कारण है कि फॉरेस्ट मिनिस्टर के इस फैसले पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
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