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और भी तरीके हैं प्लास्टिक बैन के प्रति जागरुकता के... बच्चों को लाइन में लगाने से बाल आयोग नाराज़

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: November 5, 2019, 4:29 PM IST
और भी तरीके हैं प्लास्टिक बैन के प्रति जागरुकता के... बच्चों को लाइन में लगाने से बाल आयोग नाराज़
लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के लिए देहरादून नगर निगम की मानव श्रृंखला में शामिल होने के लिए सड़कों पर ट्रैफ़िक के बीच पैदल जाते स्कूली बच्चे.

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCRU) ऊषा नेगी (Usha Negi) ने यह भी कहा कि वह नगर निगम को पत्र लिखकर इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेंगी.

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देहरादून. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे वाली सरकार के समय में देहरादून नगर निगम (Dehradun Municipal Corporation) ने लिम्का बुक रिकॉर्ड्स (Limca Book of Records) बनाने के लिए बच्चियों को स्कूल से निकालकर कई घंटे के लिए सड़क पर लाइन में लगा दिया. नगर निगम के रिकॉर्ड के लिए पूरा शहर जाम (Jam in city) से परेशान था तो बच्चे कई किलोमीटर पैदल चलकर नगर निगम के ड्रीम को पूरा करने के लिए लाइन में अपनी जगह ढूंढ रहे थे. बाल आयोग (State Commission for Protection of Child Rights Uttarakhand) इस सबसे नाराज़ नज़र आया और कहा कि बच्चों में जागरुकता फैलाने के और भी तरीके हैं. दून में ही हुए एक प्रयोग से यह बात साबित भी हो चुकी है.

बच्चों को शामिल करने के आदेश  

नगर निगम देहरादून सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैन के ख़िलाफ़ जागरुकता फैलाने के नाम पर रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है. इसके लिए पूरे शहर को ज़ीरो ट्रैफ़िक ज़ोन घोषित कर दिया गया था और एसएसपी ने लोगों से एमरजेंसी की सूरत में ही घरों से बाहर निकलने की अपील की थी. रिकॉर्ड के लिए लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स की टीम को भी बुला लिया गया था.

मानव श्रृंखला के लिए जगह कम न पड़ जाए इसलिए स्कूली बच्चों को भी इसमें शामिल करने का फ़ैसला किया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक रैलियों में बच्चों को शामिल करने पर रोक लगा चुका है लेकिन नगर निगम को लगा कि पर्यावरण जागरुकता के नाम पर अपने रिकॉर्ड के लिए वह बच्चों का इस्तेमाल कर सकता है. इसलिए शिक्षा विभाग के निदेशक आरके कुंवर से 5000 बच्चों को इस मानव श्रृंखला में शामिल होने के लिए कहलवा दिया गया.

सड़कों पर दौड़ते दिखे स्कूली बच्चे

9 बजे से बनने वाली मानव श्रृंखला के लिए सुबह से राजधानी के सरकारी, गैर सरकारी स्कूलों में बच्चों को बुला लिया गया था. इसके बाद इन्हें मानव श्रृंखला में अपनी जगह बनाने के लिए कई किलोमीटर चलना भी पड़ा.

human chain, children on road, सरकारी-गैर सरकारी स्कूलों के बच्चे ट्रैफ़िक के बीच में कई किलोमीटर तक मानव श्रृंखला में अपनी जगह पर खड़े होने के लिए चले.
सरकारी-गैर सरकारी स्कूलों के बच्चे ट्रैफ़िक के बीच में कई किलोमीटर तक मानव श्रृंखला में अपनी जगह पर खड़े होने के लिए चले.

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न्यूज़ 18 की टीम को कई जगह बच्चे ख़तरनाक ढंग से ट्रैफ़िक पार करते भी दिखे क्योंकि घंटों से जाम में खड़े लोगों का सब्र टूटने लगा था और वह लाइन लगाकर जाते स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच से गाड़ियां ले जा रहे थे. ज़ाहिराना तौर पर बच्चों के साथ चल रहे शिक्षकों की बात सुनने को कोई तैयार नहीं था.

बाल आयोग नाराज़

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने इस पर नाराज़गी जताई. न्यूज़ 18 से बातचीत में ऊषा नेगी ने कहा कि वह शहर से बाहर थीं और उन्हें सुबह ही इस बारे में पता चला. उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को अपने किसी अभियान में शामिल करने से पहले नगर निगम को शिक्षा विभाग के साथ ही बाल आयोग से भी बात करनी चाहिए थी, अनुमति लेनी चाहिए थी.

usha negi, child commission, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि वह नगर निगम को पत्र लिखकर इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेंगी.
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि वह नगर निगम को पत्र लिखकर इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेंगी.


ऊषा नेगी ने कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता लाने की कोशिश अच्छी बात है लेकिन इसके लिए बेहतर तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. स्कूलों से बातचीत कर, बेहतर प्रोग्राम बनाकर यह काम किया जा सकता है. इसके लिए बच्चों को सड़क पर उतारने की कतई ज़रूरत नहीं थी.

ऊषा नेगी ने यह भी कहा कि वह नगर निगम को पत्र लिखकर इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेंगी.

जागरुकता के सफल प्रयोग

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने ठीक कहा कि बच्चों में प्लास्टिक बैन के प्रति जागरुकता फैलाने के बेहतर तरीके मौजूद हैं. गैर सरकारी संस्था गति फ़ाउंडेशन ने देहरादून स्मार्ट सिटी के दायरे में आने वाले 20 सरकारी स्कूलों में प्लास्टिक वापसी का सफल अभियान चलाया है.

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गति फ़ाउंडेशन ने देहरादून के सरकारी स्कूलों में प्लास्टिक वापसी का सफल अभियान चलाया है.


इस अभियान के तहत इन स्कूलों में बच्चों को प्लास्टिक से होने वाले नुक़सान के बारे में बच्चों को बताया गया और उन्हें प्रेरित किया गया कि वह अपने घरों में भी प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की कोशिश करें.

कपड़े के थैले बनाए बच्चों ने 

गति फ़ाउंडेशन के फ़ाउंडर अनूप नौटियाल बताते हैं कि इससे बच्चों में काफ़ी जागरुकता आई और सभी स्कूलों में बच्चे अपने घरों और आस-पास से प्लास्टिक वेस्ट जमाकर स्कूलों में लाए. कुछ स्कूलों में तो बड़े बच्चों ने कपड़े के थैले भी बनाकर अपने परिजनों को दिए ताकि प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग कम किया जाए. नौटियाल कहते हैं कि इस प्रयोग के बाद बच्चों में प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम करने की आदत बनते दिखी.

gati foundation plastic wapasi abhiyan, गति फ़ाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष अनूप नौटियाल के अनुसार प्लास्टिक वापसी अभियान के दौरान कई बच्चों ने कपड़े के थैले बनाकर अपने परिजनों को दिए ताकि पन्नियों का इस्तेमाल कम हो.
गति फ़ाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष अनूप नौटियाल के अनुसार प्लास्टिक वापसी अभियान के दौरान कई बच्चों ने कपड़े के थैले बनाकर अपने परिजनों को दिए ताकि पन्नियों का इस्तेमाल कम हो.


जागरुकता के लिए बच्चों को मानव श्रृंखला में शामिल करने के सवाल पर अनूप नौटियाल कुछ नहीं कहते लेकिन यह ज़रूर कहते हैं कि बच्चों में जागरुकता पैदा करने के लिए बेहतर तरीके हैं और इनमें स्कूलों का सहयोग लिया जाना चाहिए.

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First published: November 5, 2019, 1:18 PM IST
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