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न कोरोना का डर, न प्रशासन के डंडे की फिक्र... भीड़ भरे बाज़ार में धड़ल्ले से बिक रहा है मुर्गे-मछली का मांस
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: March 20, 2020, 8:57 PM IST
न कोरोना का डर, न प्रशासन के डंडे की फिक्र... भीड़ भरे बाज़ार में धड़ल्ले से बिक रहा है मुर्गे-मछली का मांस
छह नंबर पुलिया पर बनी सब्ज़ी मंडी के बीच में ही भी सड़क पर तख्त डालकर मछली बेची जा रही है और उसके पीछे दुकान में मुर्गे का मांस भी बेचा जा रहा है.

उत्तराखंड में एक भी वैध स्लॉटर हाउस नहीं है और हाईकोर्ट अवैध रूप से मांस के लिए जानवर काटे जाने को बेहद सख़्त है.

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कोरोना के डर कई प्रदेशों में नॉन वेज की मार्केट बुरी तरह गिर गई है और कई जगह तो यह 10-20 रुपये तक बिकने या मुफ़्त में बांटे जाने की भी ख़बरें हैं. देहरादून में लेकिन स्थिति अलग है. यहां ज़्यादातर मीट की दुकानें पिछले कई दिनों से बंद हैं क्योंकि उत्तराखंड में एक भी वैध स्लॉटर हाउस नहीं है और हाईकोर्ट अवैध रूप से मांस के लिए जानवर काटे जाने को बेहद सख़्त है. इसकी वजह से सालों से यहां मीट-मुर्गे का मांस बेचने वाली पुरानी दुकानें तो बंद हो गई हैं लेकिन सड़क पर ठेली लगाकर खुलेआम मछली-मुर्गे बेचे जा रहे हैं.

हाईकोर्ट की फटकार

बता दें कि देहरादून निवासी वरुण सोबती ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि सितंबर, 2018 में जारी हाईकोर्ट के आदेश का राज्य सरकार नहीं कर पाई है. हाईकोर्ट ने इस आदेश में राज्य में अवैध रूप से चल रहे स्लॉटर हाउसों को बंद करने और खुले में पशु वध पर रोक लगाने को कहा था. याचिका में चीन के मीट बाज़ार से कोरोना फैलने का ज़िक्र भी किया गया है और दून में दूसरे राज्यों से कटान के लिए जानवर लाए जाने पर रोक लगाने की मांग की है.

इसी महीने की 16 तारीख को इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ज़िलाधिकारी  निर्देश सरकार को दिए थे। याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी कर दून वैली को रेड जोन में रखा है। कहा गया है कि दून वैली में जिंदा जानवरों का आयात किया जा रहा है।



याचिका पर पिछली सुनवाई में कोर्ट ने डीएम से अब तक कदम उठाए कदमों का ब्यौरा देने को कहा था लेकिन सोमवार को पेश डीएम की रिपोर्ट से कोर्ट संतुष्ट नहीं हो सकी और 23 मार्च को ज़िलाधिकारी को कोर्ट में तलब कर दिया था.

chicken shop closed dehradun, अपनी बंद दुकान के आगे बैठे मुकेश कहते हैं कि उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ सकती है.
अपनी बंद दुकान के आगे बैठे मुकेश कहते हैं कि उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ सकती है.


भूखे मरने की नौबत न आ जाए

हाईकोर्ट की सख़्ती के बाद ज़िला प्रशासन हरकत में आया और 18 तारीख को पछवादून इलाके में मीट-मुर्गा बेचने वाली 72 दुकानों को सील कर दिया गया. देहरादून के मीट कारोबारियों को चेतावनी प्रशासन ने चेतावनी दे दी है कि अगर अवैध रूप से मांस बेचते पकड़े गए तो दुकानें सील कर दी जाएंगी.

देहरादून के रिंग रोड पर सूचना भवन के सामने सालों से मीट की दुकान चला रहे मुकेश पूछते हैं कि उनकी क्या गलती है? वह कहते हैं कि स्लॉटर हाउस बनाना तो सरकार का काम है न. सरकार अपना काम नहीं कर पा रही और सज़ा मिल रही है उन्हें. मुकेश कहते हैं कि ऐसा ही चलता रहा तो उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी.

यहां धड़ल्ले से चल रहा है सब

लेकिन सब मुकेश की तरह निराश और हताश नहीं हैं. भूखे मरने की नौबत उसके सामने आएगी जिसे प्रशासन का डर हो. मुकेश की दुकान से सौ मीटर दूर 6 नंबर पुलिया के चौराहे से चंद कदम दूर धड़ल्ले से मछली बिक रही है. फ़र्क यह है कि मुकेश के पास सालों से किराए की दुकान है जिसके सील हो जाने का उन्हें डर है लेकिन सड़क किनारे एक तख्त डालकर अवैध रूप से मछली काट रहे व्यक्ति को कोई डर नहीं.

fish sold in dehradun, 6 नंबर पुलिया के पास रिंग रोड पर अवैध रूप से लगी दुकानों में धड़ल्ले से मछली बेची जा रही है.
6 नंबर पुलिया के पास रिंग रोड पर अवैध रूप से लगी दुकानों में धड़ल्ले से मछली बेची जा रही है.


छह नंबर पुलिया पर बनी सब्ज़ी मंडी के बीच में ही भी सड़क पर तख्त डालकर मछली बेची जा रही है और उसके पीछे दुकान में मुर्गे का मांस भी बेचा जा रहा है. बेहद भीड़ भरे इस इलाक़े में लोग सब्ज़ियां भी ले रहे हैं और मन करने पर मच्छी-मुर्गा भी.

साफ़ है कि यहां न लोगों को कोरोना का ख़ौफ़ सता रहा है और न ही सड़क पर मांस बेचने वालों को प्रशासन का कोई डर है.

हमने इस संबंध में देहरादून के फ़ूड सेफ़्टी ऑफ़िसर से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. जैसे ही उनसे बात होगी, हम उनका पक्ष भी प्रकाशित करेंगे.

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First published: March 20, 2020, 8:47 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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