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ऐसे होगा अतिक्रमण मुक्त दून..., नगर-निगम ही करवा रहा है पर अवैध कब्जे
Dehradun News in Hindi

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: February 22, 2020, 10:42 AM IST
ऐसे होगा अतिक्रमण मुक्त दून..., नगर-निगम ही करवा रहा है पर अवैध कब्जे
निर्वाचन भवन के पीछे बेशकीमती ज़मीन पर रातों-रात ऐसी झुग्गियां डाली गईं जिन्हें मेयर ने बिजली कनेक्शन देने की सिफ़ारिश करवा दी.

देहरादून में अवैध कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों को नगर निगम की ओर से बिजली-पानी के कनेक्शन मिल गए और 10-15 साल पुराना निवासी होने का सर्टिफिकेट भी दे दिया गया.

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देहरादून. राजनेताओं ने वोट बैंक की राजनीति के लिए उत्तराखंड में कई झुग्गी बस्तियां विकसित कर ली गई हैं. हालात ये हैं कि आज उत्तराखंड में करीब 582 अवैध झुग्गी बस्तियां हैं. अस्थाई राजधानी देहरादून जहां से राज्य चलता है और सरकार के अलावा बड़े अधिकारी भी बैठते हैं, वहां जमीनों पर अवैध कब्ज़ों का खुला खेल सालों से चल रहा है. बहुत चिंताजनक बात यह है कि देहरादून में एक और अवैध बस्ती बनने जा रही है और इसे खुद नगर निगम ही तैयार करवा रहा है.

अतिक्रमणकारियों को मेयर की शह!
देहरादून के मसूरी बाइपास रिंग रोड में रानी पद्मावती की करीब 20 बीघा जमीन खाली पड़ी है. करोड़ों रुपए कीमत की इस जमीन पर सालों से भू-माफियाओं की नजर रही है. कई बार भू-माफिया इस पर कब्जा करने की कोशिश कर चुके हैं.

पिछले कुछ महीने में इस जमीन पर रातों-रात कई अवैध कब्जे हुए हैं. स्थानीय पार्षद नरेश रावत ने इस अतिक्रमण के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू किया तो उन्हें धक्का लगा नगर-निगम से ही. रावत कहते हैं कि कब्जा करने वाले सभी लोग बाहर के हैं और पहले भी कब्जा कर बस्ती में मकान बना चुके हैं.



वह कहते हैं कि इससे इलाके में कानून-व्यवस्था की भी समस्या पैदा हो रही है. पार्षद नरेश रावत अचरज जताते हैं कि जब वह बार-बार बाहरी लोगों के कब्जों का विरोध कर रहे हैं, तो मेयर क्यों उनके कब्जों को वैध करने के लिए उन्हें बिजली-पानी के कनेक्शन दे रहे हैं?



मनमानी
देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा की मेहरबानी से अतिक्रमणकारियों को बिजली-पानी के कनेक्शन मिल गए और रातों-रात झुग्गी बनाने वाले इन लोगों को मेयर ने 10-15 साल पुराना निवासी होने का सर्टिफिकेट भी दे दिया. इस बारे में पूछे जाने पर गामा यह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने कुछ महिलाओं को बिजली कनेक्शन देने को कहा था, लेकिन यह भी कहते हैं कि बिजली विभाग को यह निर्देश भी थे कि नियमानुसार कनेक्शन दिए जा सकते हैं तो ही दें.

लेकिन गामा यह नहीं बताते कि उन्होंने यह कनेक्शन देने से पहले स्थानीय पार्षद या पुलिस से बात क्यों नहीं की? वह यह भी नहीं बताते कि क्यों उन्होंने एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की शिकायत नहीं सुनी और उसकी बात के बजाय अतिक्रमणकारियों को तवज्जो क्यों दी?

स्लम में बदल रहा दून
खास बात यह है कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद देहरादून में हुए अवैध कब्जे हटाने का जो अभियान चल रहा है, उसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन के साथ नगर निगम की भी है. लेकिन शहर में जो 127 अवैध बस्तियां हैं इनको हटाने में तो निगम नाकाम साबित हो रहा है. चिंता इससे भी बढ़ जाती है कि निगम खुद ही अवैध कब्जे करवाकर देहरादून को स्लम में बदलने जा रहा है.

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देहरादून नगर निगम के लिए OUTSIDER हैं उत्तराखंड के मूल निवासी

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First published: February 21, 2020, 6:12 PM IST
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