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इस वजह से उत्तराखंड में साफ़ हो गई आम आदमी पार्टी

इस वजह से उत्तराखंड में साफ़ हो गई आम आदमी पार्टी

उत्तराखंड में आप के संस्थापक सदस्य रहे रणवीर चौधरी अरविंद केजरीवाल के साथ.

उत्तराखंड में आप के संस्थापक सदस्य रहे रणवीर चौधरी अरविंद केजरीवाल के साथ.

आप उत्तराखंड के संस्थापक सदस्य रणवीर चौधरी कहते हैं कि वह एक अच्छा विकल्प देना चाहते थे लेकिन आम आदमी पार्टी इस पर खरी नहीं उतरी.

देहरादून. अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी एक समय उत्तराखंड में भी पूरे दमखम के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही थी. 2014 के चुनाव में आप ने उत्तराखंड में चुनाव भी लड़ा था हालांकि उसे कोई सीट नहीं मिल पाई थी. इसके बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं के इरादे बुलंद थे और दिल्ली की तर्ज पर उत्तराखंड में भी विकल्प देने के लिए वह तैयार थे. फिर ऐसा क्या हुआ कि पार्टी बुरी तरह बिखर गई?

सुनिए संस्थापक सदस्य की बात

आम आदमी पार्टी की उत्तराखंड इकाई का गठन 2012 में दिल्ली में पार्टी के गठन के साथ ही हो गया था. रणवीर चौधरी उत्तराखंड में आप के संस्थापक सदस्यों में थे. वह उत्तराखंड में आप के संयोजक, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं.

रणवीर चौधरी कहते हैं कि वह और उनके जैसे बहुत सारे अन्य लोग आम आदमी पार्टी में उत्तराखंड के लिए शामिल हुए थे. वह अपने प्रदेश में एक अच्छा विकल्प देना चाहते थे और दुर्भाग्य से आम आदमी पार्टी इस पर खरी नहीं उतरी.

चौधरी कहते हैं कि आप का फ़ोकस उत्तराखंड में कभी रहा ही नहीं. 2013 की आपदा में राहत के लिए आप की उत्तराखंड इकाई ने बहुत काम किया. हम लोग केजरीवाल जी से कहते रहे कि आप भी आओ लेकिन वह नहीं आए. 2016 में इतनी उथल-पुथल हुई तब भी बार-बार आग्रह के बावजूद वह नहीं आए, एक ट्वीट तक नहीं आया उनका.

राजनीति ही छोड़ गए नौटियाल

आप के प्रदेशाध्यक्ष रहे अनूप नौटियाल 2014 में पार्टी के टिकट पर टिहरी सीट से चुनाव भी लड़े थे. उन्हें हार मिली थी और 2016 में उन्हीं के नेतृत्व में बहुत से पार्टी कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी. अब अनूप नौटियाल एक एनजीओ एसडीसी चलाते हैं, जो शहरी विकास और प्लास्टिक उन्मूलन के क्षेत्र में काम करता है.

नौटियाल राजनीति को पूरी तरह विदा कह चुके हैं हालांकि आप के उत्तराखंड में सफल न होने के मामले पर वह भी रणवीर चौधरी का समर्थन करते हैं. वह कहते हैं उस समय (2013 से 2016) तक आम आदमी पार्टी की प्राथमिकता स्वाभाविक रूप से दिल्ली ही थी और उत्तराखंडी ही नहीं किसी भी राज्य का निवासी अपने राज्य के लिए काम करना चाहेगा. आप ने उत्तराखंड की उपेक्षा की तो इसी वजह से उन लोगों ने पार्टी छोड़ी.

कौन हो सकता है विकल्प

रणवीर चौधरी कहते हैं कि दिल्ली के चुनावों परिणामों से साफ़ और बड़ा संदेश मिला है कि देश और प्रदेश को विकल्प की तलाश है. आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में विकल्प देने में असफल रही और आज इसका कोई आधिकारिक संगठन तक राज्य में नहीं है.

तो क्या उत्तराखंड क्रांति दल राज्य में विकल्प दे सकता है?

चौधरी कहते हैं यह तो यूकेडी पर निर्भर करता है कि वह खुद को कितना संगठित कर पाती है और विकल्प के रूप में खुद को राज्य में कैसे पेश कर पाती है. अगर वह ऐसा कर पाए तो उत्तराखंड में राजनीतिक विकल्प के सवाल का वह जवाब हो सकती है.

Tags: Aam aadmi party, AAP, Dehradun news, Delhi Assembly Election 2020, Uttarakhand news

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