उत्तराखंड में हो सकती है 2013 से भी भयंकर तबाही, छा रहे संकट के बादल

नीति गांव से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर बन रही झील उत्तराखंड मेंं कभी भी बड़ी तबाही मचा सकती है. ये नई झील 2001 से बननी शुरू हुई और अब तेजी से फैल रही है.

News18 Uttarakhand
Updated: September 7, 2018, 10:45 AM IST
उत्तराखंड में हो सकती है 2013 से भी भयंकर तबाही, छा रहे संकट के बादल
सैटेलाइट से मिली तस्वीर में नीचे कोने में दिखती झील
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Updated: September 7, 2018, 10:45 AM IST
उत्तराखंड में एक और झील वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा की तरह तबाही की पटकथा लिखने जा रही है. समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो एक बार फिर प्रदेश में बड़ी तबाही मच सकती है. ये तस्वीरें देखने में अपने आप में डरावनी लगती हैं. सेटेलाइट के मिली ये तस्वीरें उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र की हैं.

नीति घाटी की ये तस्वीरें संकेत दे रही हैं कि प्रदेश में 2013 से भी भयंकर तबाही मच सकती है. नीति गांव से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति दो ग्लेशियरों कमेंट और रायकाणा ग्लेशियर के मुहाने पर एक झील का निर्माण हो रहा है.

ये झील 2001 से ही अपने अस्तित्व में आई जो 2018 में एक बहुत बड़ी झील के रूप में विकसित होने लगी है. ये कभी भी उत्तराखंड में आफत ला सकती है. उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र यूसेक उपग्रह से प्राकृतिक झीलों के चित्रों का अवलोकन कर रहा था कि अचानक ज्ञान हुआ कि नीति गांव से ऊपर इस झील को सेटेलाइट से देखा गया. हर साल इस झील का क्षेत्रफल करीब 500 मीटर से 700 मीटर तक बढ़ता नजर आ रहा हैं जो कि चिंता का बड़ा विषय है.

ग्लेशियर पर झील बनने को लेकर जब जानकारों से बात गई तो एक खौफनाक बात पता चली. उनका कहना है कि ग्लेशियरों के मुहाने पर बनी झील हमेशा मोरेन पर बनती है, लेकिन ये बनती और टूटती रहती हैं. यदि कोई झील लम्बे समय तक और क्षेत्रफल में बढ़ रही है तो वो अवश्य ही हानिकारक है.

क्योंकि मोरेन की क्षमता बहुत कम होती है जैसे झील में कोई बड़ी हलचल होती है तो इससे बड़ी तबाही भी हो सकती है. जैसे कि 2013 में केदारनाथ के ऊपर बनी चोराबाड़ी ताल ग्लेशियरों के मुहाने पर ही थी, जिसके फटने से बड़ी आपदा प्रदेश में आई थी. उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र यूसेक उपग्रह से प्राकृतिक झीलों की चित्रों का अवलोकन के दौरान मंडरा रहा ये खतरा सामने आने के बाद वैज्ञानिक इस पर चिंता जताने लगे हैं.

(रिपोर्ट- सत्येंद्र बर्तवाल)
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