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गैरसैंण के विकास के लिए केंद्र से मांगे 1000 करोड़
Dehradun News in Hindi

Bhasha
Updated: November 19, 2016, 9:21 AM IST
गैरसैंण के विकास के लिए केंद्र से मांगे 1000 करोड़
ETV/Pradesh18

भाजपा विधायकों के बहिष्कार के बीच गैरसैंण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज गैरसैंण में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए केन्द्र से 1000 करोड़ रुपए दिए जाने की मांग करते हुए एक संकल्प पेश किया.

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  • Last Updated: November 19, 2016, 9:21 AM IST
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भाजपा विधायकों के बहिष्कार के बीच गैरसैंण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज गैरसैंण में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए केन्द्र से 1000 करोड़ रुपए दिए जाने की मांग करते हुए एक संकल्प पेश किया.

इसके साथ ही, रावत ने राज्य विधानसभा के 2017-18 के बजट सत्र को गैरसैंण में बने विधानसभा भवन में आयोजित करने का संकल्प भी पेश किया. दोनों संकल्पों को विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया.

इससे पहले, मुख्यमंत्री रावत ने गैरसैंण के विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यों के बारे में सदन को अवगत कराते हुए कहा कि गैरसैंण के मसले पर आम राय बनाने की कोशिश की जा रही है और गैरसैंण की भावना के अनुरूप यहां अवस्थापना सुविधाएं विकसित की जा रही है.

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के लिए गैरसैंण केवल नारों तक सीमित नहीं है बल्कि हमारा ध्येय गैरसैंण का समग्र विकास करना है और इसलिए हम बिजली, पानी के साथ ही यहां पूरे राज्य से सड़क सम्पर्क को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौचर हवाई पट्टी को बड़े जहाजों के आवागमन लायक बनाने हेतु प्रयास किया जा रहा है. इसके अलावा, चौखुटिया के रामदेवल में भी नया हवाई अड्डा बनाने का प्रस्ताव है.

गैरसैंण के मसले पर राज्य सरकार की ओर से अपना रूख स्पष्ट न किए जाने के विरोध में सत्र का बहिष्कार कर रही भाजपा का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां बदल गई है और राज्य बनने के बाद यदि गैरसैंण की भावना के अनुरूप कार्य किया गया होता तो लोग टाट पट्टी में भी राजधानी के सवाल पर बहस नहीं करते, लेकिन उन्होंने कहा कि आज लम्बा समय बीत गया है, सुविधाओं की जरूरत है और इसे राजनीतिक प्रश्न बनाने के बजाय हम धरातल पर कार्य कर रहे है.

रावत ने कहा कि आज परिस्थितियां बदल गई हैं. भावनाओं के साथ यथार्थवादी सोच के तहत हम कार्य कर रहे है. हमारी सोच है कि गैरसैंण में बेहतर टाउनशिप विकसित हो. पूरे राज्य से दिल से रक्त ले जाने वाली धमनियों की तरह इसकी कनेक्टिविटी हो. इसके लिए अलग-अलग इलाकों से सुविधाजनक और बेहतर सड़क तैयार करने की योजना चल रही है. सुबह सदन शुरू होने से पहले भी मुख्यमंत्री ने गैरसैंण को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी.चमोली जिले में स्थित गैरसैंण के गढ़वाल और कुमांउ के बीचोंबीच स्थित होने के कारण पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान इसे राज्य की प्रस्तावित राजधानी के रूप में प्रचारित किया गया था. राज्य आंदोलनकारी पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ में ही होने का तर्क देते हुए गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किए जाने के पक्षधर रहे हैं. हालांकि, कांग्रेस और भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक दल इस संबंध में अपना रूख स्पष्ट करने से अब तक सीधे तौर पर बचते रहे हैं.

साल 2013 में अब भाजपा में शामिल हो गए तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुखिया विजय बहुगुणा ने गैरसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास किया था जिसे गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की दिशा में एक कदम माना गया था.

गौरतलब है कि नवंबर, 2000 में उत्तराखंड बनने के समय स्थायी राजधानी के चयन का फैसला राज्य सरकार पर छोड़ते हुए देहरादून को उसकी अंतरिम राजधानी बना दिया गया था.

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First published: November 18, 2016, 11:17 PM IST
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