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FRI में सक्रिय हैं तस्कर, चंदन के पेड़ भी काटे.... लेकिन कार्रवाई पर संस्थान खामोश

Sunil Navprabhat | ETV UP/Uttarakhand
Updated: December 7, 2017, 7:56 PM IST
FRI में सक्रिय हैं तस्कर, चंदन के पेड़ भी काटे.... लेकिन कार्रवाई पर संस्थान खामोश
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के जंगलों में लकड़ी तस्कर सक्रिय हैं, जो न सिर्फ़ सूखे पेड़ों के कटान के नाम पर हरे-भरे पेड़ों को काट रहे हैं बल्कि बेशकीमती चंदन के पेड़ भी काट रहे हैं. लेकिन इस पर एफ़आरआई की चुप्पी है, चौकाने वाली बात है.
Sunil Navprabhat | ETV UP/Uttarakhand
Updated: December 7, 2017, 7:56 PM IST
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के जंगलों में लकड़ी तस्कर सक्रिय हैं, जो न सिर्फ़ सूखे पेड़ों के कटान के नाम पर हरे-भरे पेड़ों को काट रहे हैं बल्कि बेशकीमती चंदन के पेड़ भी काट रहे हैं. लेकिन इस पर एफ़आरआई की चुप्पी है, चौकाने वाली बात है.

हाल ही में एफ़आरआई में कटान के लिए स्वीकृत 78 पेड़ों के साथ ही छह से अधिक चीड़ के विशालकाय हरे पेड़ काट दिए गए थे. यह सूचना मिलने पर न्यूज़ 18 की टीम मौके पर पहुंची.

क्या आप यकीन करेंगे कि मई और जून महीने में ही एफआरआई में लाखों रुपये कीमत के चंदन के दस पेड़ों पर तस्करों ने आरियां चला डालीं. हाल के सालों में कुल 25 पेड़ों को तस्करों ने काट डाला है, वह भी तब जब एफआरआई चारों ओर से सुरक्षा दीवार से घिरा हुआ है.

sandal wood tree cut down fri

450 हेक्टेयर में फैले एफआरआई में बड़ी संख्या में चंदन के पेड़ हैं. लेकिन, ताज्जुब की बात यह है कि बेहद सुरक्षित माने जाने वाले देश के इस संस्थान में भी चंदन के पेड़ों पर आरियां चल रही हैं.

इस साल के मई और जून के महीने एफ़आरआई के चंदन के पेड़ों के लिए ठीक नहीं रहे. एफ़आरआई  के रिकॉर्ड के मुताबिक इन दो महीनों में ही दस पेड़ काटे गए हैं.

रिकॉर्ड के मुताबिक 12 मई को सबसे ज़्यादा चार पेड़ काटे गए. उसके बाद 15 और 26 मई को एक-एक पेड़ काटा गया. जून में फिर चार पेड़ काटे गए.

इसके बाद एफ़आरआई ने चार कर्मचारियों को निकाल दिया. लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि ये पेड़ आखिर काटे किसने. न तो एफ़आरआई ने इस मामले में आंतरिक जांच की और न ही पुलिस से जांच करने का आग्रह किया.

sandal wood tree cut down fri 3

एफआरआई प्रशासन इस मामले में कुछ बोलने को तैयार भी नहीं है. इस मामले में एक तथ्य यह भी है कि विभाग को तस्करों के पेड़ काटने से कुछ कमाई हो गई है.

दरअसल चंदन तस्कर काटे गए सभी पेड़ों को लेकर भागने में कामयाब नहीं हो सके और काटे गए पेड़ों को एफ़आरआई ने ज़ब्त कर लिया. इसमें से एक लॉट की नीलामी से संस्थान को 32 लाख रुपये की कमाई भी हुई है.
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