उत्तराखंड में निजाम बदलने का एक महीना, पढ़ें कैसा रहा तीरथ सरकार का कार्यकाल

तीरथ सिंह रावत को त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर भाजपा ने सीएम बनाया था.

तीरथ सिंह रावत को त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर भाजपा ने सीएम बनाया था.

उत्तराखंड के नये सीएम के तौर पर तीरथ सिंह रावत (CM Tirath Singh Rawat) ने एक महीने का कार्यकाल पूरा कर लिया है. इस दौरान उन्‍होंने त्रिवेंद्र सरकार (Trivandra Government) के कई अहम फैसलों को बदला है.

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देहरादून. उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत सरकार (Tirath Singh Rawat Government) ने एक महीने का समय पूरा कर लिया है. इस एक महीने में सरकार ने जनता की नब्ज पकड़कर आगे बढ़ने का काम किया. जबकि सीएम ने आते ही बयान दिया था कि वो जनता का चेहरा पढ़ेंगे, उसकी आवाज सुनेंगे और फिर डिसीजन लेंगे. राज्‍य के अधिकारियों से कहा कि आप फाइलें देखो हम जनता का चेहरा देखेंगे. अपने कामकाज में तीरथ ने इस बात को प्रूव भी किया. फिर चाहे इसके लिए उन्हें अपनी ही सरकार के लिए गए एक के बाद एक कई फैसले क्यों न पलटने पड़ें. इसे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में पैदा हुई एंटी इनकम्बेंसी की काट के तौर पर भी देखा जा रहा है. त्रिवेंद्र सरकार (Trivandra Government) में मात्र रबर स्टॉम्प बनकर रह गए मंत्रियों को फ्री हैंड कर दिया गया है. इससे कामकाज में तेजी भी देखी जा रही है. अफसरशाही भी दबाव में है. जिलों में मंत्रियों तक कि बात को अनसुना कर देने वाले जिलाधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि जनप्रतिनिधियों से विचार विमर्श कर चलें. कैंप ऑफिस के बजाए ऑफिस में बैठकर प्रतिदिन दो घंटे जनता की समस्याओं को सुनें और सीएम ऑफिस को इसका फीड बैक भेजें.

कार्यकर्ता और पार्टी पदाधिकारी आसानी से सीएम से मुलाकात कर रहे हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक पदाधिकारी ने कहा कि कार्यकर्ता को इससे ज्यादा क्या चाहिए. उसे सम्मान मिल जाए, बस और कुछ नहीं चाहिए.

10 मार्च को सत्ता संभालते ही चंद घंटों के भीतर ही कुंभ को सबके लिए खोलने की घोषणा कर तीरथ ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे. हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्हें फिर से सख्ताई करनी पड़ी थी, लेकिन वह पब्लिक के बीच पॉजिटिव मैसेज देने में कामयाब रहे.


कोरोना काल में दर्ज मुकदमे वापस
मुख्‍यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कोविड काल में करीब साढ़े चार हजार लोगों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने के आदेश कर दिए. चमोली के घाट क्षेत्र के आंदोनकारियों पर दर्ज मुकदमे न सिर्फ वापस किए गए बल्कि त्रिवेंद्र रावत जिस सड़क की मांग को नियम विरुद्ध बताते हुए ग्रामीणों पर लाठीचार्ज तक करवा चुके थे. तीरथ ने उस सड़क को डेढ़ लेन में कन्वर्ट करने के आदेश जारी करने में देर नहीं लगाई. त्रिवेंद्र सरकार में बनाए गए जिला विकास प्राधिकरण परेशानी का सबब बन गए थे. इस फैसले को भी पलट दिया गया. ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शा पास करने की बाध्यता समाप्त कर दी गई. इससे लोगों ने राहत की सांस ली.

त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में कर्मकार कल्याण बोर्ड का मामला काफी सुर्खियों में रहा. इसको लेकर त्रिवेंद्र रावत और श्रम मंत्री हरक सिंह रावत के बीच ठनी रही. त्रिवेंद्र रावत ने शर्म बोर्ड को ही भंग कर दायित्व धारी को इसका अध्यक्ष बना दिया था.कई कर्मचारी भी हटा दिए गए थे. तीरथ रावत सरकार में एक बार फिर कर्मकार कल्याण बोर्ड श्रम मंत्री के अधीन आ गया है. तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के जो कर्मचारी हटाए गए थे उनकी हटाने के दिन से वापसी कर ली गई है.

ये दो बड़े फैसले भी तीरथ सरकार ने बदले



दो और बड़े फैसले भी तीरथ रावत ने इस एक महीने के कार्यकाल में पलट डाले. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने की घोषणा की थी .इस घोषणा का पार्टी के अंदर ही कई विधायकों और मंत्रियों ने भी विरोध करना शुरू कर दिया था. नये सीएम ने सत्ता संभालते ही इस पर पुनर्विचार की बात कही थी और इसी हफ्ते त्रिवेंद्र रावत सरकार के इस फैसले को भी स्थगित कर दिया गया.

त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल के सबसे बड़े और विवादास्पद फैसलों में से एक चार धाम देवस्थानम बोर्ड के गठन पर भी तीरथ सिंह रावत साफ कह चुके हैं कि गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ समेत सभी का 51 मंदिर जो बोर्ड में शामिल किए गए थे, उनको मुक्त कर दिया जाएगा. इससे चारों धामों के पंडा पुरोहित बेहद खुश हैं. विश्व हिंदू परिषद से लेकर संघ नेताओं ने भी तीरथ के इस बयान पर खुशी जाहिर की है. सांसद अजय भट्ट भी इस फैसले की खुलकर सराहना कर चुके हैं.


ग्राम पंचायत की बदलेगी किस्‍मत

कैबिनेट के फैसलों में भी तीरथ रावत के आम जनता तक पहुंचने के प्रयासों की झलक दिखी. इसी हप्ते हुई कैबिनेट में प्रदेश की हर ग्राम पंचायत को पंचायत भवन देने का फैसला लिया गया. इसके लिए तीन साल का समय निर्धारित किया गया है.

कुल मिलाकर तीरथ रावत सरकार के पास समय बहुत कम है और इस सीमित समय में तीरथ रावत के सामने आम जनता के मन में उतरने की चुनौती है. इसीलिए तीरथ रावत ने हर उस फैसले को पलटने में भी देर नहीं लगाई जिससे लोग अनकंफरटेबल महसूस कर रहे थे. हालांकि एक महीने के कार्यकाल में तीरथ रावत अपने भाषणों के लिए भी चरचा में रहे, लेकिन लोगों ने इसे भी उनकी सादगी के तौर पर स्वीकार कर लिया है.
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