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चार धाम श्राइन बोर्ड विधेयक से ये आशंकाएं हैं तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारियों को... कहा हंगामे में बिल पास करवाएगी सरकार

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: December 9, 2019, 7:11 PM IST
चार धाम श्राइन बोर्ड विधेयक से ये आशंकाएं हैं तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारियों को... कहा हंगामे में बिल पास करवाएगी सरकार
चार धाम तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारियों के साथ कांग्रेस विधायकों ने भी गिरफ़्तारी दी.

'आईएएस अधिकारियों का बोर्ड में दबदबा होगा तो वह मनमानी करेंगे और धार्मिक परंपराओं को लेकर तीर्थ पुरोहितों के साथ उनका टकराव बढ़ेगा.'

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देहरादून. चार धाम श्राइन बोर्ड प्रबंधन विधेयक (Char Dham Shrine Board Management bill) विधानसभा के पटल पर रखे जाने के बाद चारधाम के तीर्थ पुरोहितों (tirth purohit) और हक-हकूकधारियों (haq-haqookdhari) का प्रदर्शन तेज़ हो गया है. आज देहरादून (dehradun) में विरोध कर रही देवभूमि तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत के 50 तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों ने गिरफ्तारी दी. जल्द ही 200 से ज़्यादा तीर्थ पुरोहितों के गिरफ़्तारी देने का दावा किया गया है. तीर्थ पुरोहितों ने आशंका जताई कि बीजेपी सरकार विधानसभा में हंगामे के बीच ये विधेयक भी पारित कर देगी जो धार धाम ही नहीं सारी सनातन परंपराओं के लिए बहुत हानिकारक साबित होगा.

सीईओ को असीमित अधिकार 

तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी महापंचायत के प्रवक्ता बृजेश सती ने कहा कि ये चार धाम श्राइन बोर्ड प्रबंधन विधेयक चार धाम समेत 51 मंदिरों को आईएएस अधिकारियों के मनमर्ज़ी से चलाने के लिए ही बनाया गया है. विधेयक में आईएएस अधिकारियों की भरमार है और खानापूर्ति के लिए तीर्थ पुरोहितों को रखा गया है.

सती कहते हैं कि बोर्ड के सीईओ को असीमित अधिकार दे दिए गए हैं. वह तीर्थ पुरोहितों को रखने, निकालने, उनकी आमदनी सब तय करेंगे और इसकी वजह से भविष्य में संघर्ष होना तय है. जिस बोर्ड में सीईओ के फ़ैसलों को चुनौती दी जानी है वह भी सरकार के ही नियंत्रण में रहेगा इसलिए तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों को वहां से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

आस्था का महत्व नहीं जानते 

सती कहते हैं कि आईएएस अधिकार जब तक अपने पद पर रहेगा तभी तक वह श्राइन बोर्ड में शामिल रहेगा. चूंकि आईएएस अधिकारियों के भी शासन की ज़रूरत के अनूसार ट्रांस्फ़र होते रहते हैं इसलिए इस बात की संभावना कम ही है कि वह सदियों पुरानी परंपराओं को समझ पाएगा.

तीर्थ पुरोहित महापंचायत के प्रवक्ता ने आज ही अल्मोड़ा में एएसआई अधिकारियों के जूते पहनकर जागेश्वर धाम में घूमने का उदाहरण दिया. जागेश्वर के पुजारियों के विरोध पर एएसआई अधिकारियों ने उनसे बदतमीजी भी की और जिस अंगीठी से वह आग सेक रहे थे उसे फिंकवा दिया.सती कहते हैं कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्रों का महत्व न समझने, ऐसे मामलों की संवेदनशीलता से परिचित न होने और समाज की भावनाओं का आदर न करने की वजह से ही ऐसी घटनाएं होती हैं और बोर्ड बनने के बाद इसकी आशंका बहुत बढ़ जाएगी.

बदरीनाथ में भिड़ गए थे SDM और BKTC CEO

सती याद दिलाते हैं कि आईएएस अधिकारियों के धार्मिक संस्थाओं में अत्यधिक दखल की वजह से इसी साल मई में बदरीनाथ में भी बवाल हो चुका है. 24 मई को जोशीमठ के एसडीएम वैभव गुप्ता बदरीनाथ धाम में गुजरात धर्मशाले स्थित सीईओ के कक्ष में पहुंचे और उनकी कुर्सी पर बैठ गए और उनसे मंदिर से जुड़ी पत्रावलियां भी तलब कीं. सीईओ के इस पर ऐतराज़ जताने के बाद दोनों में तीखी बहस हुई थी.

बदरीनाथ धाम के इतिहास में पहली बार भगवान को भोग के लिए दो घंटे इंतज़ार करना पड़ा था. सती कहते हैं कि क्योंकि आईएएस अधिकारियों का बोर्ड में दबदबा होगा तो वह मनमानी करेंगे और ऐसी घटनाएं बढ़ना तय हो जाएगा.

पलायन बढ़ेगा

बोर्ड के गठन के बाद चार धाम और सभी 51 धार्मिक स्थलों पर सारी सरकारी संपत्तियां बोर्ड के अधिकार में आ जाएंगी. हालांकि विधेयक में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन सभी मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आस-पास निजी संपत्तियों का क्या होगा लेकिन तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों को इस बात की आशंका बहुत ज़्यादा है कि सरकार बरसों की मेहनत से बनाई गई उनके गेस्ट हाउस, ढाबों, होटलो पर भी कब्ज़ा कर लेगी.

सती कहते हैं कि इस बात की आशंका बहुत ज़्यादा है और देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन पर स्थानीय लोगों की निर्भरता को देखते हुए यह बहुत घातक सिद्ध होने वाला. जब अपने घरों के पास से रोज़गार का ज़रिया छिन जाएगा तो पलायन और बढ़ेगा.

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First published: December 9, 2019, 7:09 PM IST
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