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अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए 2533.90 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट

अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए 2533.90 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट

संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक सदन में अनुपूरक बजट पेश करने के लिए जाते हुए.

बजट में चार धाम श्राइन बोर्ड (Char Dham Shrine Board) के लिए 10 करोड़ रुपये का भी प्रावधान किया गया है.

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देहरादून. शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 2533.90 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया. इसमें सरकार ने वित्तीय वर्ष के शेष बचे तीन माह में अपने अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने पर जोर दिया है. शहरी व ग्रामीण अवस्थापना सुविधाओं के विकास, सड़कों, पुलियों, पेयजल, ड्रेनेज के साथ ही दूरदराज गांवों और सीमांत क्षेत्रों के लिए बजट में बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है. बजट में चार धाम श्राइन बोर्ड के लिए 10 करोड़ रुपये का भी प्रावधान किया गया है.

राजस्व मद में 1606 करोड़ रुपये 

संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने गुरुवार शाम चार बजे विधानसभा के पटल पर अनुपूरक बजट पेश किया. 2533.90 करोड़ रुपये के इस बजट में राजस्व मद में 1606 और पूंजीगत मद में 927.56 करोड़ रुपये रखा गया है. अनुपूरक राशि से वेतन मद में कुल 166.65 करोड़ रुपये और पेंशन आदि मदों में 37.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं.

2021 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीणों को आवास देने पर जोर देते हुए 75 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया गया है. केंद्रीय योजनाओं पर ढांचागत विकास के दारोमदार का अंदाजा इससे लग सकता है कि केंद्र सहायतित योजनाओं के तहत 848.11 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है.

सड़क निर्माण के लिए 190 करोड़ रुपये

राज्य में आने वाले महीनों में सड़कों व पुलिया का निर्माण तेजी से होगा. सड़क बनाने के लिए राज्य सेक्टर में 150 करोड़ रुपये, केंद्रीय सड़क निधि से 30 करोड़ रुपये की राशि दी गई है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना आपातकालीन निधि के तहत 10 करोड़ रुपये रखे गए हैं.

इसी तरह ग्रामीण सड़कों और ड्रेनेज के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है. प्रदेश के मार्गों, पुलियों के अनुरक्षण कार्य के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

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Chardham Yatra: गंगोत्री-यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में नहीं होगी तकलीफ अगर पढ़ लेंगे ये खबर

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Uttarakhand News: नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से चारधाम यात्रा पर लगी रोक हटने के बाद अब पुलिस विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस दौरान कोरोना नियमों का कड़ाई से पालन करवाया जाएगा, साथ ही सीमित संख्या में यात्रियों को दर्शन की अनुमति होगी.

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देहरादून. नैनीताल हाईकोर्ट ने गुरुवार को आदेश जारी कर चार धाम यात्रा पर लगी रोक को हटा दिया है. इसके साथ ही पुलिस विभाग ने अब चारधाम यात्रा की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के अनुसार सभी जिला कप्तानों को उचित दिशा निर्देश दे दिए गए हैं और यात्रा का संचालन कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही करवाया जाएगा. अशोक कुमार ने बताया कि इस दौरान हर दिन यात्रियों की संख्या को सीमित रखा गया है. साथ ही चारधाम पर आने वाले यात्रियों को कोविड नेगेटिव होने की रिपोर्ट या फिर कोरोना वैक्सीनेशन की दोनों डोज का सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य होगा. ऐसा नहीं होने पर उन्हें यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलेगी. साथ ही मौके पर भी यात्रियों की कोरोना जांच करवाने का प्रावधान किया गया है.

क्या होंगे नए नियम

  • अब केदारनाथ में 800, बद्रीनाथ में 1200, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 400 यात्रियों को ही हर दिन दर्शनों की अनुमति होगी.
  • अब यात्री किसी भी कुंड में स्नान नहीं कर सकेंगे.
  • यात्रियों को कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट या फिर कोरोना वैक्सीनेशन की दोनों डोज के सर्टिफिकेट दिखाने होंगे.
  • यात्रियों को फेस मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य कोरोना नियमों का पालन करना होगा, ऐसा नहीं
  • करने पर जुर्माने और सजा का प्रावधान है.

सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी एसएलपी
गौरलतब है कि हाईकोर्ट ने 26 जून को कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य में चारधाम यात्रा पर रोक लगा दी थी. इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोट्र में एसएलपी दायर की थी. लेकिन फिर कुछ दिन पहले ही प्रदेश सरकार ने एसएलपी वापस ले ली गई थी. जिसके बाद गुरुवार को हाईकोर्ट में यात्रा को लेकर निर्णय लिया गया है.

मिलेगी राहत…
हाईकोर्ट की ओर से यात्रा पर लगी रोक हटाए जाने से राज्य सरकार सहित यात्रा से जुड़े व्यवसाइयों को बड़ी राहत मिली है. इससे तीर्थ पुरोहितों और उत्तरकाशी, चमोली व रुद्रप्रयाग जिले के निवासियों को भी राहत की उम्मीद है जो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से यात्रा से जुड़े हैं.

AAP का दावा, 'सेल्फी विद टेंपल' मुहिम से जुड़े हज़ारों उत्तराखंडी, जानिए इस अभियान की वजह

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उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के इस अभियान को वोटरों को लुभाने का हथकंडा कहा तो आप ने भी दोनों पार्टियों पर निशाना साधा. जानिए क्या है पूरा मामला और कैसे आप की वेबसाइट से जुड़ रहे हैं लोग.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 16, 2021, 13:39 IST
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देहरादून. उत्तराखंड चुनावी माहौल में सभी सियासी पार्टियां जनमत के लिए अपने स्तर पर मुहिम छेड़ रही हैं. इसी सिलसिले में आम आदमी पार्टी ने पहल करते हुए उत्तराखंड में ‘सेल्फी विद टेंपल’ मुहिम शुरू कर दी है. देवभूमि कहे जाने वाले राज्य में हाल में इस मुहिम के शुरू होने के बाद से अब तक करीब 25 हज़ार लोगों के जुड़ जाने का दावा भी आप ने किया. इस अभियान के तहत पार्टी ने लोगों से अपील की है कि वह राज्य स्थित अपने विशेष लगाव वाले किसी मंदिर के सामने सेल्फी खींचकर पोस्ट करने को कहा है, जिसकी मौजूदा हालत में सुधार की ज़रूरत हो. यही नहीं, ऐसे मंदिर की स्थिति सुधारने को लेकर आप ने लोगों से उनकी राय भी मांगी है.

आम आदमी पार्टी के नेता नवीन पिरशाली के हवाले से खबरों में कहा गया कि इस मुहिम के साथ सिर्फ चार दिनों में 22,976 लोग जुड़े, जिन्होंने अपने सुझाव देकर बताया कि राज्य के किस मंदिर की स्थिति को किस तरह बेहतर किया जा सकता है. पिरशाली ने यह भी कहा कि उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक राजधानी बनाए जाने के संबंध में आप ने सफलतापूर्वक वेबसाइट लॉंच की, जिसके माध्यम से यह मुहिम चल रही है.

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आप का दावा है कि उसका सेल्फी विद टेंपल ​अभियान चर्चित और लोकप्रिय हो रहा है. (Symbolic Image)

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वास्तव में, इस अभियान के दो मकसद बताए गए हैं. आप का दावा है कि लोगों के सुझावों से राज्य के मंदिरों को विश्व पटल पर पर्यटन के नक्शे और पहचान के लिहाज़ से बेहतर करने में मदद मिलेगी. दूसरी ओर, चर्चा यह भी ​है कि देवभूमि में चुनाव जीतने के लिए लोगों की धार्मिक भावना के साथ जुड़ाव के लिहाज़ से आप का यह अभियान मील का पत्थर भी साबित हो सकता है. विपक्षियों के इस तरह के हमले पर भी आप ने निशाना साधते हुए साफ कहा कि लोग इस मुहिम के साथ हैं और विपक्षियों को तकलीफ किस बात की है अगर आप ने उत्तराखंड को हिंदू आस्था की राजधानी बनाने का मिशन शुरू किया है.

रेप और बच्चों के यौन शोषण मामलों का रिपोर्ट कार्ड, 9 राज्यों के बीच उत्तराखंड में कितने खराब हैं हालात?

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NCRB Report Released : हिमालय के बीच बसे नौ भारतीय राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में अपराध की स्थिति चिंताजनक है. हालांकि इन आंकड़ों पर राज्य की पुलिस ने इसे 'इंसाफ के प्रति सकारात्मक नज़रिया' बताया है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 16, 2021, 09:19 IST
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देहरादून. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने भारत में साल 2020 के लिए नौ हिमालयीन राज्यों के संबंध में बलात्कार और बच्चों के यौन शोषण मामलों को लेकर जो आंकड़े जारी किए, उनमें उत्तराखंड का नाम सबसे ऊपर रहा. अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के मुकाबले उत्तराखंड में 2020 में बलात्कार के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किए गए, जिनकी संख्या ब्यूरो ने 487 बताई. महिलाओं के खिलाफ अपराध पर मंगलवार रात एनसीआरबी ने जो रिपोर्ट जारी की, उसके मुताबिक राज्यवार कुछ और अहम बातें जानिए.

सबसे ज़्यादा रेप केस की लिस्ट में उत्तराखंड के बाद हिमाचल प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा, जहां 331 मामले दर्ज किए गए. त्रिपुरा में 79 और मेघालय में 67 ऐसे मामले रहे जबकि सबसे कम रेप केसों की संख्या मिज़ोरम में रही, जहां 33 मामले दर्ज हुए. इसी तरह उत्तराखंड बच्चों के प्रति किए जाने यौन अपराधों की सूची में भी अव्वल रहा. राज्य में 573 ऐसे केस दर्ज किए गए, जिनमें POCSO एक्ट के तहत अपराध दर्ज हुआ. कुछ और मामलों में भी उत्तराखंड की हालत गंभीर बताई गई.

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महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले में उत्तराखंड की स्थिति चिंताजनक हुई.

ड्रग्स तस्करी उत्तराखंड में बड़ा सिरदर्द
साल 2020 के संदर्भ में एनसीआरबी के आंकड़ों से यह ज़ाहिर हुआ कि उत्तराखंड में ड्रग्स कारोबार भी एक बड़ी समस्या है. नारकोटिक्स एक्ट के तहत 1282 केस दर्ज ​हुए. हालांकि इस मामले में उत्तराखंड, हिमाचल से पीछे रहा, जहां 1538 ऐसे केस मिले. ड्रग्स तस्करी उत्तराखंड में प्रमुख समस्या के तौर पर उभरकर आ चुकी है और सरकार ने हाल में यह घोषणा भी कि इसकी रोकथाम के लिए जल्द ही एक ‘एंटी ड्रग पॉलिसी’ भी बनाई जाएगी.

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क्या है आंकड़ों पर उत्तराखंड की सफाई?
एनसीआरबी के आंकड़ों पर देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता के तौर पर महानिरीक्षक अमित सिन्हा के हवाले से खबरों में कहा गया, ‘POCSO और रेप के मामले इसलिए बढ़े हुए दिख रहे हैं क्योंकि राज्य की पुलिस इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए ऐसे केस बगैर ढिलाई बरते दर्ज कर रही है. न्याय की आस में ऐसे केस दर्ज कराने में पीड़ितों को भी बल मिला है क्योंकि राज्य पुलिस की प्राथमिकता है कि ऐसे मामलों में न्याय हो सके.’

सितंबर में ज़रूरत से ज़्यादा तरबतर हो चुका उत्तराखंड, अभी और बारिश के आसार

सितंबर में ज़रूरत से ज़्यादा तरबतर हो चुका उत्तराखंड, अभी और बारिश के आसार

Monsoon in Uttarakhand : मौसम विभाग की चेतावनी है कि कम से कम आज और भारी बारिश हो सकती है. यलो अलर्ट जारी किया गया है. राज्य में भारी बारिश को लेकर खासकर यात्रियों के लिए हिदायतें जारी की गई हैं. आंकड़ों जानिए बारिश का पूरा मिज़ाज.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 16, 2021, 07:45 IST
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देहरादून. पिछले महीने भारी और लगातार बारिश से तबाही की तस्वीरें सामने आने के बाद लग रहा था कि सितंबर में मानसून की रफ्तार उत्तराखंड में कुछ थमेगी. लेकिन ताज़ा स्थिति यह है कि सितंबर के महीने में राज्य में 13 फीसदी तक ज़्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है और मौसम विभाग की चेतावनी यह भी है कि बाकी बचे महीने में अभी और बारिश होगी. इस महीने में बागेश्वर ज़िले में सामान्य से 200 फीसदी तक ज़्यादा बारिश दर्ज की गई है जबकि राजधानी देहरादून समेत कुछ ज़िलों में इस महीने में औसत से कम पानी बरसा है. कुल मिलाकर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून अभी और सुर्खियां रचने के मूड में है.

1 से 14 सितंबर तक के आंकड़े जारी करते हुए मौसम विभाग ने सरप्लस वर्षा हो जाने की बात इस तरह कही कि इस अवधि में 115.9 मिमी बारिश की अपेक्षा रहती है, लेकिन 131 मिमी हो चुकी है. ये अनुमान भी ज़ाहिर किया कि आने वाले दिनों में खास तौर पर कुमाऊं अंचल में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है. यहां मंगलवार से यलो अलर्ट जारी किया गया है, जो आज गुरुवार के लिए भी लागू है.

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कहां कैसे रहे बारिश के आंकड़े?
बागेश्वर में 202 फीसदी ज़्यादा तक बारिश हो गई क्योंकि 77.4 मिमी औसत रहता है लेकिन 14 दिनों में आंकड़ा 234 मिमी का रहा. चमोली में 144 फीसदी और चंपावत में भी 58 फीसदी ज़्यादा बारिश हुई. पहाड़ी ज़िलों के उलट मैदानी इलाकों में इस दौरान कम बारिश दर्ज की गई. नैनीताल में 41%, यूएस नगर में 39%, हरिद्वार में 30% और देहरादून में औसत से 25% कम बारिश दर्ज की गई.

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क्या है और बारिश का अनुमान?
आंचलिक मौसम केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के हवाले से खबरों में कहा गया कि कम से कम 16 सितंबर तक तो राज्य में बारिश के आसार बने हुए ही हैं. ‘कुमाऊं अंचल के ज़िलों में गढ़वाल अंचल के ज़िलों से ज़्यादा बारिश होगी.’ गौरतलब है कि भारी बारिश के चलते लगातार खबरें बनी हुई हैं कि आम रास्ते और हाईवे ठप हो रहे हैं. सड़कों, पुलों के टूटने और भूस्खलन होने की सुर्खियां भी बनी हुई हैं. सिर्फ पौड़ी गढ़वाल ज़िले में ही 36 सड़कें ठप होने की खबर आ चुकी है, जिसमें पीएम ग्रामीण सड़क योजना की करीब दो दर्जन सड़कें चौपट हो चुकी हैं. यानी भारी बारिश का कहर सबसे ज़्यादा गांवों और ग्रामीणों पर टूट रहा है.

BJP में कलह: मंत्री हरक सिंह ने ढेंचा बीज पर कही थी ये बात, फिर त्रिवेंद्र रावत कुछ यूं दिया जवाब

BJP में कलह: मंत्री हरक सिंह ने ढेंचा बीज पर कही थी ये बात, फिर त्रिवेंद्र रावत कुछ यूं दिया जवाब

uttarakhand BJP: कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने ढेंचा बीज घोटाले का जिक्र कर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत पर निशाना साधा था. इसके जवाब में त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि हमारे यहां कहा जाता है- 'गधा जो होता है, वो ढेंचा-ढेंचा करता है.' इस बयान के बाद एक बार फिर उत्तराखंड बीजेपी के अंदर का घमासान सामने आ गया है.

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देहरादून. ढेंचा बीज घोटाले (dhencha seed scam) को लेकर शुरू हुए इस विवाद के बीच बुधवार शाम त्रिवेंद्र रावत (trivendra rawat) ने एक ऐसा विवादित बयान दे दिया, जिसने इस पूरे प्रकरण में आग में घी डालने का काम कर दिया है. त्रिवेंद्र रावत ने हरक सिंह के बयान को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि हमारे यहां कहा जाता है – “गधा जो होता है, वो ढेंचा-ढेंचा करता है.” त्रिवेंद्र रावत के इस बयान के बाद अब बीजेपी में चल रही अंदरूनी रार खुलकर सड़कों पर आ सकती है. हालांकि, हरक सिंह रावत की ओर से अभी इस बयान पर कोई रिएक्शन नहीं आया है.

दरअसल, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने न्यूज 18 को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में त्रिवेंद रावत के कृषि मंत्री रहते हुए सामने आए ढेंचा बीज घोटाले को लेकर कहा था कि हमारी सरकार आने पर हरीश रावत त्रिवेंद्र रावत को जेल भेजना चाहते थे. मैंने बतौर कृषि मंत्री त्रिवेंद्र रावत के समर्थन में दो पेज की नोटिंग की, जिसके चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हो पाया और वो जेल जाने से बच गए. हरक ने कहा था कि यदि वो जेल चले जाते तो 2017 में मुख्यमंत्री भी नहीं बन पाते.

इस बयान के न्यूज 18 पर चलते ही सियासी गलियारों में हंगामा मच गया था. आम आदमी पार्टी ने इसे बकायदा मुद्दा बनाते हुए प्रेस कान्फ्रेंस कर कहा कि पिछले बीस सालों से बीजेपी और कांग्रेस ऐसी ही मिलीभगत कर प्रदेश को लूट रहे हैं. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि बीजेपी संगठन को हस्तक्षेप कर मंत्री हरक सिंह रावत को तलब करना पड़ा. बुधवार को मंत्री हरक सिंह रावत मंत्री धन सिंह रावत को साथ लेकर एक ही कार से बलबीर रोड स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचे. यहां महामंत्री संगठन अजेय कुमार और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के साथ करीब आधे घंटे तक तक बंद कमरे में बातचीत हुई. मीटिंग से बाहर निकलने के बाद मदन कौशिक ने इसे एक सामान्य मुलाकात बताया, तो हरक ने भी कहा कि सरकार और संगठन के मुद्दों पर जरूरी बातचीत हुई.

पत्रकारों द्वारा ढेंचा बीज घोटाले के उनके बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर हरक ने बचते बचाते कहा कि उनका बयान सही था, उस पर वे आज भी कायम हैं. इसके बाद मामला करीब-करीब शांत माना जा रहा था, लेकिन इसके कुछ ही घंटों के बाद सामने आए त्रिवेंद्र रावत के बयान ने आग में घी डालने का काम कर दिया है.

UKMSSB Recruitment 2021 : टेक्नीशियन के 300 से अधिक पदों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी

UKMSSB Recruitment 2021 : टेक्नीशियन के 300 से अधिक पदों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी

Sarkari Naukri 2021 : उत्तराखंड उत्तरखंड मेडिकल सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की ओर से टेक्नीशियन सहित विभिन्न पदों पर 12वीं पास के लिए भर्ती निकली है. इसके लिए आवेदन ऑनलाइन करना है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 15, 2021, 18:30 IST
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नई दिल्ली. UKMSSB Recruitment 2021 : उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में टेक्नीशियन पदों पर होने वाली भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है. उत्तराखंड मेडिकल सर्विस सेलेक्शन बोर्ड ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 अक्टूबर कर दी है. इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर तक ही थी. उत्तराखंड मेडिकल सर्विस सेलेक्शन बोर्ड टेक्नीशियन भर्ती के तहत लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन और रेडियोथेरेपी टेक्नीशियन के साथ सीएसएसडी टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन, ऑडियोमेट्री टेक्नीशियन, डेंटल टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, रिसेप्शनिस्ट और रेडियो ग्राफिक टेक्नीशियन पदों कुल 306 वैकेंसी है. इसके लिए आवेदन यूकेएमएसएसबी की वेबसाइट https://ukmssb.org/ पर जाकर ऑनलाइन करना होगा. नोटिफिकेशन के अनुसार योग्य अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा.

वैकेंसी का विवरण

लैब टेक्नीशियन- 104 पद
ओटी टेक्नीशियन- 62 पद
सीएसएसडी टेक्नीशियन- 63 पद
रेडियो थेरेपी टेक्नीशियन- 05 पद
ईसीजी टेक्नीशियन- 04 पद
ऑडियोमेट्री टेक्नीशियन- 02 पद
डेंटल टेक्नीशियन- 16 पद
फिजियो थेरेपिस्ट- 06 पद
ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट- 08 पद
रिसेप्शनिस्ट- 02 पद
रेडियोग्राफिक टेक्नीशियन- 34 पद

आवश्यक योग्यता-

लैब टेक्नीशियन- अभ्यर्थी का साइंस विषयों के साथ इंटरमीडिएट पास होना जरूरी है.
ओटी टेक्नीशियन- अभ्यर्थी का साइंस विषयों के साथ इंटरमीडिएट पास होना जरूरी है.
सीएसएसडी टेक्नीशियन, रेडियो थेरेपी टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन, ऑडियोमेट्री टेक्नीशियन, डेंटल टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, रिसेप्शनिस्ट, रेडियोग्राफिक टेक्नीशियन- इंटरमीडिएटट पास होने के साथ संबंधित विषय में डिप्लोमा या डिग्री.

आयु सीमा– 18 से 42 वर्ष

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उत्तराखंड चुनावः AAP के प्रदेश अध्यक्ष SS कलेर ने दिया इस्तीफा, CM धामी के खिलाफ ठोकेंगे ताल

उत्तराखंड चुनावः AAP के प्रदेश अध्यक्ष SS कलेर ने दिया इस्तीफा, CM धामी के खिलाफ ठोकेंगे ताल

Uttarakhand Elections 2022 : आम आदमी पार्टी ने चुनाव के लिए पूरी तरह कमर कस ली है. सीएम पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ अपने प्रत्याशी को तकरीबन तय करते हुए आप ने कांग्रेस की तर्ज़ पर अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है.

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देहरादून. उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों को देखते हुए आम आदमी पार्टी अपने संगठन को मज़बूत करने में जुट गई है. आप के खेमे में चुनावी माहौल के चलते मंगलवार का दिन गहमागहमी भरा रहा. पहले प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वो अब एक पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर काम करेंगे. इसके कुछ देर बाद ही प्रदेश में आप के प्रभावी नेता कर्नल अजय कोठियाल ने नए अध्यक्षों के नामों के साथ ही विधानसभा चुनाव की कमान संभालने वाले अन्य नेताओं की नियुक्ति का ऐलान भी कर दिया. यह पूरा मामला जानिए और यह भी कि कलेर के इस्तीफे को किस तरह समझा जाना चाहिए.

कर्नल कोठियाल ने मंगलवार को बड़ी घोषणा करते हुए गढ़वाल, कुमाऊं और तराई क्षेत्र से तीन कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम का भी खुलासा किया. भूपेश उपाध्याय को कुमाऊं, पूर्व आईपीएस अनन्त राम चौहान को गढ़वाल और प्रेम सिंह राठौर को तराई इलाकों के लिए कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का ऐलान किया गया.

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उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने मीडिया को नई चुनावी टीम के बारे में जानकारी दी.

इसके साथ ही विधानसभा चुनाव कैंपेन कमेटी की भी घोषणा करते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति की गई है. प्रदेश के दो पार्टी उपाध्यक्षों को यह जिम्मेदारी दी गई. दीपक बाली को विधानसभा चुनाव कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया जबकि बसंत कुमार को कैंपेन कमेटी का उपाध्यक्ष. इस ऐलान के साथ ही पार्टी ने कहा, ‘पार्टी ऐसे लोगों को ही जगह देगी, जो लोग नवनिर्माण की सोच रखते हों और जो पार्टी के 3 सी के फाॅर्मूले पर फिट बैठते हों.’ बता दें कि कुछ ही हफ्तों पहले कांग्रेस ने भी इसी तर्ज़ पर अपनी चुनावी टीम बनाई थी.

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कलेर के इस्तीफे का मतलब?
आप की नई चुनावी टीम की घोषणा से पहले कलेर ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे की घोषणा की तो साफ हो गया कि आप नए सिरे से चुनावी टीम बनाने जा रही है. जब कलेर के भविष्य को लेकर चर्चा हुई तो बात साफ हुई कि वो चुनाव लड़ने के लिए आप के महत्वपूर्ण खिलाड़ी होंगे. उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने अब तक जो सम्मान दिया है, उसके लिए मैं आभारी रहूँगा. अब अपनी ही विधानसभा में काम करूंगा.’ आप के मुताबिक आगामी चुनाव में सीएम धामी के खिलाफ कलेर चुनावी ताल ठोकेंगे.

Exclusive : हरीश रावत का बड़ा बयान, "कांग्रेस में 'ऑल इज़ वेल', दलबदल की चाल BJP को महंगी पड़ेगी"

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  • LAST UPDATED : September 15, 2021, 15:30 IST
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प्रीति
देहरादून.
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने न्यूज़18 पर exclusive बयान देते हुए कहा है कि कांग्रेस में ‘ऑल इज़ वेल’ है. रावत ने कहा कि ‘हमारी पार्टी का कोई विधायक नहीं, सिर्फ एक विधायक गया है. कांग्रेस ने उन्हें सम्मान दिया लेकिन वह संभाल कर नहीं रख पाए. अब उनके क्षेत्र में घमासान मचा हुआ है.’ रावत ने साफ तौर पर भाजपा पर दलबदल की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा हमेशा से इसी कोशिश में रहती है और ‘उसका मानना है कि दलबदल के ज़रिये विपक्ष को हतोत्साहित किया जा सकता है. लेकिन इस बार वह इसका नुकसान खुद भुगतेगी.’

वास्तव में मामला कांग्रेस नेता किशोर उपाध्याय से जुड़ी अटकलों का है. हाल में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व उत्तराखंड से सांसद अनिल बलूनी ने एक ट्वीट में कहा कि कांग्रेस का एक प्रमुख नेता भाजपा में शामिल होने जा रहा है. तभी से ये अटकलें चल पड़ीं कि किशोर उपाध्याय दिल्ली में क्यों हैं और क्या वही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं! इस मामले में उल्टे भाजपा पर निशाना साधते हुए हरीश रावत ने न्यूज़18 के साथ खास बातचीत की.

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उपाध्याय पर क्या बोले रावत?
कांग्रेस से किशोर उपाध्याय के नाराज़ होने की चर्चाओं को लेकर हरीश रावत ने कहा, ‘वह एक अच्छे नेता हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. अब उनको और कितना सम्मान चाहिए, ये मैं नहीं समझ सकता हूं! हां इतना ज़रूर कहूंगा कि उपाध्याय पार्टी के मूड को समझते हैं.’ क्या उपाध्याय भाजपा में जा रहे हैं? इस सवाल पर हरीश रावत ने कहा, ‘ये भाजपा है, यह कुछ भी कह सकती है. कल को ये भी कह सकती है कि हरीश रावत भाजपा में जा रहे हैं.’

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‘अंजाम भुगतने को तैयार रहे भाजपा’
भाजपा के संपर्क में कांग्रेस के कुछ और विधायकों के हाने के बारे में भी हरीश रावत ने बातचीत करते हुए कहा कि अगर भाजपा ऐसा कुछ करती है तो इसका नुकसान भाजपा को ही होगा क्योंकि अब लोगों की सहानुभूति भाजपा के प्रति नहीं है. लोग भाजपा से काफी नाराज़ हैं और अगर अब भाजपा गुस्से में घी डालने का काम करती है, तो उसका दुष्परिणाम भाजपा को ही भुगतना होगा.

ट्रांसफर से बचने के लिए फर्ज़ी सर्टिफिकेट लगा रहे पुलिस अफसर! उत्तराखंड सरकार ने कहा जांच की जाए

ट्रांसफर से बचने के लिए फर्ज़ी सर्टिफिकेट लगा रहे पुलिस अफसर! उत्तराखंड सरकार ने कहा जांच की जाए

उत्तराखंड में विभागीय प्रक्रियाओं और फिर कोविड के चलते लंबे समय से पुलिस विभाग में हज़ारों ट्रांसफर अटके हुए थे. अब पुलिस अफसर बहानेबाज़ी करके डटे हुए हैं, तो सरकार सख्त रवैया अपनाने पर आ गई है.

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  • LAST UPDATED : September 15, 2021, 15:06 IST
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देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने उन पुलिस अफसरों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का फैसला कर लिया है, जो आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं या किसी तरह की बहानेबाज़ी कर रहे हैं. अस्ल में मामला तबादलों से जुड़ा है. पुलिस विभाग में लंबे समय से पेंडिंग चल रहे तबादलों को हरी झंडी मिलने के बाद 4 सितंबर को ट्रांसफर आदेश जारी किए गए थे, लेकिन इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं कि बहाने बनाकर पुलिस अफसर आदेश तामील नहीं कर रहे हैं. अब प्रदेश के कार्मिक विभाग ने मन बना लिया है कि ऐसे अफसरों को न बख्शते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

कार्मिक विभाग को एक पत्र लिखते हुए राज्य के मुख्य सचिव एसएस संधू ने लिखा, ‘4 सितंबर के ट्रांसफर आदेश के बावजूद अब तक आदेश का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तुरंत विभागीय और अनुशासनात्मक एक्शन लिया जाए.’ यहां यह बात उल्लेखनीय है कि पहाड़ी इलाकों में तबादलों का मामला करीब डेढ़ साल से पेंडिंग था, जिसे इस महीने की शुरुआत में ही मंज़ूरी मिली थी. इसके बाद 4 तारीख को आदेश ​जारी किए जाने के बावजूद कई अफसर अब भी अपनी जगह पर डटे हुए हैं.

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फर्ज़ी मेडिकल सर्टिफिकेटों की होगी जांच
संधू ने अपने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि जो अफसर ट्रांसफर आदेश की तामील न कर पाने का कारण स्वास्थ्य बता रहे हैं, उनके द्वारा दिए गए मेडिकल प्रमाणपत्रों की जांच की जाए. इस बारे में एएनआई की खबर के मुताबिक संधू ने साफ लिखा कि मेडिकल प्रमाणपत्र अगर फर्ज़ी पाए जाते हैं तो राज्य का मेडिकल बोर्ड ऐसे सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ भी जांच और एक्शन ले. ज़ाहिर है कि तबादलों से बचने के लिए जाली सर्टिफिकेटों का खेल राज्य सरकार की जानकारी में आ चुका है.

उत्तराखंड को मिला नया राज्यपाल, चीन मामलों के एक्सपर्ट पूर्व ले. जनरल गुरमीत सिंह ने ली शपथ

उत्तराखंड को मिला नया राज्यपाल, चीन मामलों के एक्सपर्ट पूर्व ले. जनरल गुरमीत सिंह ने ली शपथ

देहरादून में स्थित राज भवन में एक कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश ने सिंह को पद की गोपनीयता एवं गरिमा की शपथ दिलवाई. जानिए पूर्व आर्मी उप प्रमुख का रिकॉर्ड किस तरह महत्वपूर्ण रहा है.

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  • LAST UPDATED : September 15, 2021, 12:50 IST
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देहरादून. भारतीय सेना से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड के नए राज्यपाल के तौर पर बुधवार को शपथ ग्रहण की. एक औपचारिक समारोह के दौरान राज भवन में शपथ ग्रहण के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी कैबिनेट के प्रमुख सदस्य उपस्थित थे. पीटीआई व अन्य समाचार एजेंसियों की खबर के मुताबिक राज भवन में हुए शपथ ग्रहण कार्यक्रम में सिंह को राज्य के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस आरएस चौहान ने शपथ दिलवाई. इस दौरान सीएम धामी और उनके कुछ मंत्रियों के अलावा मुख्य सचिव एसएस संधू और डीजीपी अशोक कुमार जैसे खास अधिकारी भी मौजूद थे.

वास्तव में उत्तराखंड की राज्यपाल के तौर पर बेबी रानी मौर्य ने पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया था. अपने कार्यकाल के पूरे होने के तीन साल पहले ही मौर्य के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड के लिए नए राज्यपाल के तौर पर कई मेडलों और सम्मानों से नवाज़े गए गुरमीत सिंह के नाम का ऐलान किया गया था. बुधवार को सिंह ने औपचारिक तौर पर उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर शपथ ले ली.

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गुरमीत सिंह के शपथ ग्रहण के संबंध में एएनआई ने ट्वीट किया.

कैसा रहा गुरमीत सिंह का सेवाकाल और रिकॉर्ड?
अपनी चार दशक की लंबी पारी में भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां निभाने के साथ ही गुरमीत सिंह को कई तरह से नवाज़ा गया था. वह आर्मी के उप प्रमुख रहने के साथ ही, रणनीतिक XV कॉर्प्स के कमांडर रहे थे, ​जो कश्मीर में एलओसी के मामले देखने के लिए बना था. मिलिट्री कार्रवाई के अतिरिक्त महानिदेशक के तौर पर सिंह ने चीन संबंधी रणनीतिक और ऑपरेशनल मामलों का दायित्व भी संभाला. बॉर्डर और एलओसी मामलों के संबंध में रणनीतिक बैठकों के लिए वह सात बार चीन दौरे पर भी गए थे.

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