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कॉबेट टाइगर रिज़र्व में धांधलियों पर सख्ती, प्रमुखों समेत दो दर्जन से ज़्यादा अफसरों पर एक्शन

कॉबेट टाइगर रिज़र्व में धांधलियों पर सख्ती, प्रमुखों समेत दो दर्जन से ज़्यादा अफसरों पर एक्शन

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में गड़बड़ियों के मामले में एक्शन हुआ.

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में गड़बड़ियों के मामले में एक्शन हुआ.

Tiger Reserve Case : उत्तराखंड के वन विभाग पर लंबे समय से बड़े आरोप लग रहे थे. कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में अवैध निर्माण (Illegal Construction) और पेड़ कटाई का मुद्दा इतना बड़ा हो चुका है कि शीर्ष अदालतों (Top Courts) तक में इसे लेकर विचार और सुनवाई चल रही है. इस मामले में एक फैक्ट फाइंडिंग टीम (NTCA Team) ने दोषी अधिकारियों को सज़ा दिए जाने और उनके खिलाफ जांच (Departmental Inquiry) करवाए जाने की अनुशंसा की थी. अब एक्शन लेते हुए भारी तबादले (Transfers) किए गए हैं, लेकिन जांच होगी या नहीं? जानिए पूरा मामला.

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    देहरादून. उत्तराखंड के वन विभाग में दो दर्जन से ज़्यादा अफसरों के तबादले कर दिए गए हैं क्योंकि कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में भारी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए. रिज़र्व के बफ़र ज़ोन में अवैध निर्माण और बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने के मामले में अब सरकार ने एक तरह से अनुशासनात्मक कार्रवाई की है और वन विभाग के आला अधिकारियों समेत 29 को ट्रांसफर कर दिया है. रिज़र्व के भीतर चल रही इन गड़बड़ियों को लेकर पिछले दिनों काफी हंगामा हो चुका है और पेड़ काटे जाने व अवैध निर्माण पर रोक लगाने की मांग को लेकर मामले अदालतों में भी चल रहे हैं.

    उत्तराखंड वन विभाग ने जिन 29 अफसरों का तबादला किया है, उनमें राज्य के वन अमले के प्रमुख राजीव भरतरी और वाइल्डलाइफ के चीफ वार्डन जेएस सुहाग का नाम भी शामिल है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक 25 नवंबर की तारीख वाले एक आदेश के मुताबिक भरतरी की जगह वनों के मुख्य संरक्षक के पद पर सेवारत विनोद कुमार को दायित्व सौंपा गया है, जो इससे पहले उत्तराखंड के जैव विविधता बोर्ड की अगुवाई कर रहे थे. ताज़ा आदेश के मुताबिक भरतरी अब कुमार की जगह बोर्ड का कार्यभार संभालेंगे.

    आखिर क्यों हुई यह कार्रवाई?
    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अथॉरिटी यानी NTCA की एक फैक्ट खोजी टीम ने कॉर्बेट रिज़र्व के बफ़र ज़ोन के भीतर चल रहे अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई पर सख्त ऐतराज़ जताए थे. यही नहीं, फील्ड सर्वे के बाद NTCA टीम ने सख़्त कार्रवाई की पुरज़ोर सिफ़ारिश की थी. इस टीम ने कहा था कि रिज़र्व के कालागढ़ और मोरघट्टी ज़ोन में जिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते अवैध निर्माण हुआ, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए. साथ ही, इन अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए भी टीम ने सिफारिश की थी.

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब वन विभाग में एक्शन लेते हुए अधिकारियों को इधर उधर किया गया है, हालांकि अभी किसी जांच की बात सामने नहीं आई है. भरतरी की तरह सुहाग को भी मौजूदा पद से हटाया गया है, लेकिन वह सीएमएफएमपीए प्रोजेक्ट के सीईओ के तौर पर बने रहेंगे. आदेश के मुताबिक इको टूरिज़्म देख रहे मुख्य वन संरक्षक पराग मधुकर ढकाते अब सुहाग का प्रभार संभालेंगे.

    Tags: Corbett National Park tiger reserve, Corbett Tiger Reserve, Forest department, Transfer, Uttarakhand news

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