BJP सरकार के लिए चुनौती बनी हेदरादून की ये समस्‍या, 18 साल में नहीं सुधरे हालात

देहरादून शहर का नगर निगम राज्य का सबसे बड़ा निगम है, लेकिन ट्रैफिक सिस्टम बहुत खराब है.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 11, 2019, 2:44 PM IST
BJP सरकार के लिए चुनौती बनी हेदरादून की ये समस्‍या, 18 साल में नहीं सुधरे हालात
देहरादून की शान कहे जाने वाले घंटाघर और पहचान कही जाने वाले पलटन मार्किट के सामने पार्किंग खोजने से नहीं मिलती.
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 11, 2019, 2:44 PM IST
पहाड़ों की रानी मसूरी किसी पहचान की मोहताज नहीं है, लेकिन अगर आपको मसूरी की वादियों की सैर करनी है तो सफर देहरादून से शुरू होता है. उत्तराखंड बनने से पहले देहरादून भी बड़ी-बड़ी हस्तियों का फेवरेट डेस्टिनेशन था. आज शहर की सूरत इतनी बिगड़ चुकी है कि टूरिस्ट एक सेकेंड सूकुन से रुक नहीं सकता. कोई टूरिस्ट अगर चंद घंटों के लिए भी देहरादून की सैर करना चाहे, तो वो पैदल नहीं चल सकता, क्योंकि पैदल चलने के लिए गाड़ी से उतरना होगा और गाड़ी प्राइवेट हो या कमर्शियल उसे पार्क करना पड़ेगा. हालांकि ऐसा होगा तब, जब पार्किग की व्यवस्था होगी.

पार्किंग है नहीं और पैदल चल नहीं सकते
देहरादून शहर के बीचोंबीच घंटाघर के सामने पलटन मार्केट है,जहां टूरिस्ट घूमना चाहता है. हालात ये हैं कि स्मार्ट सिटी की प्रोजेक्ट में शामिल इस मार्केट में टू-व्हीलर तो दूर आप पैदल नहीं चल सकते. देहरादून के आम लोगों को धक्के खाकर मार्केट में खरीददारी की आदत पड़ चुकी है, लेकिन टूरिस्ट के लिए ये किसी बुरे अनुभव से कम नहीं होता. वैसे टूरिस्ट को पलटन मार्केट आने का मौका कम नहीं मिलता है, क्योंकि देहरादून की शान कहे जाने वाले घंटाघर और पहचान कही जाने वाले पलटन मार्किट के सामने पार्किंग खोजने से नहीं मिलती.

जाम में बीतता है ज्यादा वक्त

कहने को देहरादून शहर का नगर निगम राज्य का सबसे बड़ा नगर निगम है और यह राज्‍य की राजधानी, लेकिन ट्रैफिक सिस्टम का हाल इतना खराब है कि शहर के सेंट्रल एरिया में लोकल हों या टूरिस्ट, ज्यादा वक्त जाम में बीतता है. जबकि स्कूल खुले हों तो दोपहर में आप वक्त पर अपनी मंजिल तक पहुंचना भूल जाइए. देहरादून की सड़कों से गुजरने पर आपको ज्यादातर रेड लाइट खराब नज़र आएंगी और इसका भी जाम में अहम सहयोग है.

निगम, पुलिस और प्रशासन सब नाकाम
मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक, डीजीपी से लेकर डीएम तक, सब देहरादून में रहते हैं, लेकिन 18 सालों में कोई भी सरकार राजधानी का सिस्टम नहीं सुधार पाई. बड़े-बड़े नेताओं और अधिकारियों की गाड़ियां सायरन बजाते हुए अपने लिए रास्ता बना लेती हैं और जो टूरिस्ट एक बार देहरादून घूमना चाहता है वो ज्यादातर वक्त ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या से जूझ रहा होता है.
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First published: August 11, 2019, 2:44 PM IST
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