उत्तराखंड में कटेंगे पेड़ और लगेंगे हिमाचल, हरियाणा में! यहां जानिए क्यों

हरेला पर्व पर हर साल उत्तराखंड में लाखों पौधे रोपे जाते हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)
हरेला पर्व पर हर साल उत्तराखंड में लाखों पौधे रोपे जाते हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

70 फ़ीसदी से ज़्यादा भूभाग वाले प्रदेश में नहीं है क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए ज़मीन

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देहरादून. उत्तराखंड में विकास योजनाओं के लिए जो पेड़ कटेंगे उनकी क्षतिपूर्ति के लिए भविष्य में हिमाचल, हरियाणा और यूपी में पेड़ लगाए जाएं तो आश्चर्य मत कीजिएगा. यह ठीक वैसे ही होगा जैसे बांध के लिए डुबाया टिहरी को गया और पेड़ लगाए गए यूपी के बरेली क्षेत्र के ललितपुर में. यह बात अजीब लग सकती है लेकिन उत्तराखंड के क्षेत्रफल में वन 70 फ़ीसदी से ज़्यादा भू-भाग पर हैं. वन विभाग के पास ज़मीन ही नहीं है कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा सके. इसलिए ऐसी स्थिति पैदा हुई है.

9000 हैक्टेयर का बैकलॉग

पर्यावरण एवं विकास योजनाओं में बैलेंस बना रहे, इसके लिए विभिन्न योजनाओं के निर्माण के लिए जो वन भूमि निर्माण एजेंसियों या अन्य विभागों को ट्रांसफर की जाती है उसके एवज में दोगुनी भूमि पर पौधे लगाने पड़ते हैं. इस क्षतिपूरक वनीकरण कहा जाता है. इसका पूरा पैंसा पैंसा कैंपा फंड में जमा होता है और फिर कैंपा के माध्यम से विभाग को जहां वनीकरण कराना होता है, पैसा रिलीज़ कर वनीकरण कराया जाता है.



समस्या यह है कि उत्तराखंड में ज़मीन ही नहीं बची है जहां क्षतिपूरक वनीकरण किया जा सके. स्थिति यह है कि उत्तराखंड में विभिन्न योजनाओं के लिए दी गई वन भूमि के सापेक्ष 9000 हेक्टेयर का बैकलॉग है यानी इतनी ज़मीन पर वनीकरण किया जाना है.
हरियाणा, हिमाचल में ज़मीन की तलाश

इस नौ हजार हेक्टेयर में से इस साल 3500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वनीकरण करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन जब वनीकरण की बारी आई तो पता चला कि वन विभाग के पास 3500 हेक्टेयर भी जगह नहीं बची है. पूरे प्रदेश में खंगालने के बाद मात्र दो से ढाई हजार हेक्टेयर ज़मीन ही उपलब्ध हो पाई. सवाल उठता है कि शेष सात हजार हेक्टेयर वनीकरण के लिए जमीन कहां से आएगी?

वन विभाग के मुखिया जयराज का कहना है कि क्षतिपूरक वनीकरण के लिए जो ज़मीन ट्रांस्फर की गई थी वह अधिकांश जगह आपदा के कारण समाप्त हो चुकी है. इसके लिए वन विभाग अब हरियाणा, हिमाचल और यूपी में ज़मीन तलाशने पर विचार कर रहा है.

चारधाम रोड़ परियोजना के पेड़ कैसे लगे?

उत्तराखंड में चारधाम रोड़ परियोजना के तहत अभी तक एक्वायर की गई ज़मीन के एवज में 1725 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पेड़ लगाए जाने थे. वन विभाग का दावा है कि इसमें से करीब 1500 हेक्टेयर भूमि में पेड़ लगाए जा चुके हैं. सवाल उठता है कि चारधाम रोड परियोजना के लिए जमीन कहां से आ गई?

दरअसल केंदीय परियोजना के लिए मानक है कि रिज़र्व फॉरेस्ट क्षेत्र यानी की डिग्रेडेड एरिया में भी वनीकरण किया जा सकता है लेकिन राज्य की परियोजना के मामले में क्षतिपूरक वनीकरण की रिजर्व फॉरेस्ट में अनुमति नहीं है. अब राज्य सरकार ने केंद्र से मांग की है कि राज्य की परियोजना के लिए भी रिज़र्व फॉरेस्ट एरिया में वनीकरण की छूट दी जाए.
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