कंचन चौधरी भट्टाचार्यः सकारात्मक सोच के साथ एक मानवीय चेहरा

उत्तराखंड के डीजी (कानून-व्यवस्था) अशोक कुमार की पूर्व डीजीपी को श्रद्धांजलि

News18 Uttarakhand
Updated: August 28, 2019, 8:02 PM IST
कंचन चौधरी भट्टाचार्यः सकारात्मक सोच के साथ एक मानवीय चेहरा
कंचन चौधरी भट्टाचार्य देश की दूसरी महिला आईपीएस अधिकारी थीं और किसी राज्य की पहली महिला पुलिस महानिदेशक. (फ़ाइल फ़ोटो)
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Updated: August 28, 2019, 8:02 PM IST
कंचन चौधरी भट्टाचार्य का नाम लेने पर एक मोहक मुस्कान लिये मुस्कराता सौम्य चेहरा सामने आता है. सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर एक संवेदनशील मानवीय चेहरा, जो स्वयं भी खुश रहता था और सदैव दूसरों को भी खुश देखना चाहता था. वह देश की दूसरी महिला आईपीएस अधिकारी थीं और किसी राज्य की पहली महिला पुलिस महानिदेशक. जब वह उत्तराखण्ड की तीसरी पुलिस महानिदेशक बनीं तो उप-निरीक्षक भर्ती प्रकरण के कारण उत्तराखण्ड पुलिस का मनोबल अत्यधिक गिरा हुआ था. उत्तराखण्ड का पुलिस महानिदेशक बनने पर उन्होंने सर्वप्रथम अपने सकारात्मक व्यक्तित्व के बल पर पुलिस का मनोबल ऊंचा उठाया. सकारात्मकता उनके व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता थी. छोटी-छोटी नकारात्मक चीजों को नज़रअंदाज़ करते हुए अपने करिश्माई व्यक्तित्व की इसी विशेषता के कारण पुलिस के आपसी मतभेदों से पार पाते हुए वे आगे बढ़ीं. उनके इसी प्रकार के व्यक्तित्व का असर उनके निर्णयों एवं नीतियों पर आगे देखने को मिला.

स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका दिया 

इसके अलावा उनमें एक अद्वितीय गुण था, दूसरे अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर प्रदान करना. इसी कारण अधिकारियों में नई पहल तथा नए-नए विचारों का संचरण होता था. मुझे याद है जब मैं पुलिस उप-महानिरीक्षक, मुख्यालय बना तो थाना चौकी के भवनों, पुलिस कॉलोनी, स्टेडियम, मेस आदि के निर्माण कार्यों के डिजाइन में मैंने परम्परागत तरीकों से हटकर नए डिजाइन तैयार करवाए. ये कार्यदक्षता और सौन्दर्य की दृष्टि से बेहतर थे. उन्होंने मेरी इस पहल को खुले दिल से सराहा, जिससे इस दिशा में मैं और आगे बढ़ता गया और उत्तराखण्ड पुलिस भवनों के भव्य डिजाइन बन पाए.

Tribute to Kanchan Chaudary Bhattacharya, Uttarakhand Police, देहरादून स्थित पुलिस लाइन में पूर्व डीजीपी कंचन चौधरी भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि दी गई.
देहरादून स्थित पुलिस लाइन में पूर्व डीजीपी कंचन चौधरी भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि देते डीजी (कानून-व्यवस्था) अशोक कुमार.


व्यक्तिगत रूप से मैं उन्हें वर्ष 1995-96 से जानता था, जब मेरी नियुक्ति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार के रूप में थी. उनकी माताजी की कोतवाली क्षेत्र में श्रवणनाथ नगर में एक धर्मशाला थी. वैसे तो मैंने उड़ान सीरियल के दौरान उनकी बहन कविता चौधरी को अभिनय करते देखा था. तभी पता चला कि यह सीरियल उनके जीवन को आधार बनाकर बनाया गया है. अस्सी के दशक में आए उड़ान सीरियल के माध्यम से आईपीएस अधिकारियों की कठिन ट्रेनिंग और फील्ड में उनके द्वारा झेली जाने वाली चुनौतियों से रूबरू होने का मौका मिला. पीड़ितों की मदद करने की प्रेरणा मिली.

अधिकारियों को भी रखतीं थीं तनावमुक्त 

यद्यपि केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर रहने के कारण उन्हें फील्ड पुलिस में कार्य करने का बहुत अवसर प्राप्त नहीं हुआ, फिर भी पुलिस महानिदेशक के रूप में उनका कार्यकाल हर दृष्टि से बहुत सफल रहा. अपराध और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से देखा जाए या संगठनात्मक ढांचे की दृष्टि से अथवा शिकायतों को लेकर आम जनता से मिलना हो, सभी क्षेत्र में उनका मानवीय चेहरा देखने को मिला.
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वह खुले दिल से, खुशी से सभी लोगों से मिलती थीं. सामान्यतः पुलिस महानिदेशक के पद पर आकर विपरीत परिस्थितियों में अधिकारी कभी-कभी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते परन्तु उनमें गजब का संयम था. वे स्वयं भी तनावमुक्त रहती थी और दूसरे अधिकारियों को भी तनावमुक्त रखती थीं.

Kanchan Chaudary Bhattacharya, कंचन चौधरी भट्टाचार्य देश की दूसरी महिला आईपीएस अधिकारी थीं और किसी राज्य की पहली महिला पुलिस महानिदेशक
कंचन चौधरी भट्टाचार्य के कार्यकाल में महिला पुलिसकर्मियों के जीवन में सुधार देखने को मिला.


महिला पुलिसकर्मियों का जीवन सुधरा 

इसके अलावा उनके समय में मसूरी में देश की दूसरी महिला कान्फ्रेंस का आयोजन हुआ था, जिसमें पुलिस में महिलाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई थी. उसके पश्चात महिला पुलिसकर्मियों के जीवन में सुधार देखने को मिला.

मैंने कंचन चौधरी मैडम को हमेशा एक अच्छे इन्सान के रूप में पाया.  58-60 साल की आयु में भी वह अत्यंत चुस्त-दुरूस्त थी. मेरे विचार से पुलिस महानिदेशक पद को सुशोभित करने वाले अधिकांश लोगों से अधिक फ़िट थीं. इसके बावजूद उनके असमय इस दुनिया से चले जाने से दिल को गहरा सदमा लगा है. कंचन चौधरी भट्टाचार्य के रूप में उत्तराखण्ड पुलिस और भारतीय पुलिस सेवा ने बहुत योग्य, संवेदनशील इन्सान और अधिकारी को खोया है, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती है. उनके असामयिक निधन पर मैं उन्हें हृदय से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

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First published: August 28, 2019, 5:57 PM IST
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