जानिए- कहां से मिली त्रिवेंद्र सरकार को धर्म स्वतंत्रता विधेयक की प्रेरणा

उत्तराखंड भी अब मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर धर्म स्वतंत्रता से जुड़े कड़े कानून वाला राज्य बन जाएगा. जाहिर है लव जेहाद जैसे मामलों पर हल्ला मचाने वाले नेताओं को भी मुंह खोलने का मौका मिल जाएगा.

Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 14, 2018, 7:59 PM IST
जानिए- कहां से मिली त्रिवेंद्र सरकार को धर्म स्वतंत्रता विधेयक की प्रेरणा
फ़ाइल फ़ोटोः नैनीताल हाईकोर्ट
Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 14, 2018, 7:59 PM IST
देवभूमि उत्तराखंड में जिस धर्म स्वतंत्रता विधेयक पर हंगामा खड़ा हो गया है, दरअसल ये विधेयक राज्य सरकार की देन सीधे नहीं है. राज्य सरकार को मुद्दा कहीं और से मिला. लेकिन स्वभाव के मुताबिक उत्तराखंड की भगवा सरकार ने उसे लपक लिया. विधेयक को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है और अब विधानसभा में लाने की तैयारी है.

12 मार्च को चार घंटे की मैराथन कैबिनेट बैठक के बाद त्रिवेंद्र सरकार भी कुछ उसी तर्ज पर काम करती नजर आई जैसा भाजपा शासित राज्यों में होता आया है. प्रदेश में पहली बार धर्म स्वतंत्रता विधेयक को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. अब जबरन धर्म परिवर्तन करना या झूठ बोलकर शादी करना गैर जमानती अपराध होगा.

फैसला भले ही सरकार ने लिया हो लेकिन इसकी चिंगारी कहीं और से निकली थी और आधार कहीं और से मिला. दरअसल 20 नवंबर, 2017 को नैनीताल हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायधीश राजीव शर्मा की एकलपीठ ने झूठ बोलकर धर्म परिवर्तन और शादी के एक मामले में सुनवाई के दौरान अपने फैसले में इस विधेयक की ज़रूरत बताई थी और अब सरकार ने इस पर अमल कर दिया.

नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार को सलाह दी थी कि सरकार चाहे इस मामले में कानून बना सकती है. कोर्ट ने बाकायदा मध्य प्रदेश के धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 और हिमाचल प्रदेश के धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2006 का भी हवाला दिया था. कोर्ट के इस फैसले और सुझाव का असर हुआ और अब उत्तराखंड की त्रिवेंद्र कैबिनेट ने कड़े प्रावधनों के साथ धर्म स्वतंत्रता विधेयक को मंजूरी दे दी है.

मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं और प्रदेश में भी ऐसा हो चुका है. परिवार टूटते हैं. लिहाजा सरकार ने यह कदम उठाया है.

बहरहाल उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक कब लागू होगा, इस पर अभी संशय है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में भी इस नए विधेयक को पास कराना पड़ेगा. फिलहाल वजह कोई भी रही लेकिन उत्तराखंड भी अब मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर धर्म स्वतंत्रता से जुड़े कड़े कानून वाला राज्य बन जाएगा. जाहिर है लव जेहाद जैसे मामलों पर हल्ला मचाने वाले नेताओं को भी मुंह खोलने का मौका मिल जाएगा.
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