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‘राज्य के हितों का संरक्षण करे सरकार, समूह-ग मामले में कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दे’

‘राज्य के हितों का संरक्षण करे सरकार, समूह-ग मामले में कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दे’

समूह-ग पर हाईकोर्ट के फ़ैसले से स्थानीय युवा छला हुआ महसूस कर रहे हैं और सरकार पर हाईकोर्ट में मामले की ठीक से पैरवी न करने का आरोप लगा रहे हैं.

समूह-ग पर हाईकोर्ट के फ़ैसले से स्थानीय युवा छला हुआ महसूस कर रहे हैं और सरकार पर हाईकोर्ट में मामले की ठीक से पैरवी न करने का आरोप लगा रहे हैं.

राज्य आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती कहते हैं कि अब तक रही सरकारों ने तो राजधानी गैरसैंण बनाई और न ही वह पहाड़ के युवाओं के लिए राज्य में पक्की नौकरी चाहते हैं.

    नैनीताल हाइकोर्ट के समूह-ग की नौकरियों के लिए सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण की अनिवार्यता ख़त्म करने के बाद अब इन नौकरियों के लिए देश भर से कोई भी दावेदारी कर सकता है. इस फ़ैसले से स्थानीय युवा छला हुआ महसूस कर रहे हैं और सरकार पर हाईकोर्ट में मामले की ठीक से पैरवी न करने का आरोप लगा रहे हैं. इससे राजनीतिक पार्टियों को बैठे-बिठाए एक मुद्दा मिल गया है और यूकेडी, कांग्रेस भी सरकार पर निशाना साध रहे हैं.

    हाईकोर्ट के एक फैसले ने प्रदेश के युवाओं, राज्य आंदोलनकारियों, विपक्षी पार्टियों को सरकार को कटघरे में खड़ा करने का मौका दे दिया है. जनसंघर्षों के बाद बनाए गए राज्य में राज्य आंदोलनकारियों की अहम भूमिका रही है जो इस फैसले के बाद सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा रहे हैं.

    राज्य आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती कहते हैं कि अब तक रही सरकारों ने तो राजधानी गैरसैंण बनाई और न ही वह पहाड़ के युवाओं के लिए राज्य में पक्की नौकरी चाहते हैं. अपने वजूद की जंग लड़ रही यूकेडी के ज़िलाध्यक्ष विजय बौड़ाई कहते हैं कि सरकार को कोर्ट में सही तरीके से पैरवी करवानी चाहिए थी. अब इस फैसले के बाद युवाओं का भविष्य अंधकारमय नज़र आ रहा है.

    फैसले के बाद सबसे ज्यादा आहत युवा नज़र आ रहे हैं जिन्हें 2019 में निकलने वाले वैकन्सी का बेसब्री से इंतजार था, जिस पर आयोग ने रोक लगा दी है. अब कांग्रेस भी इस मामले में सरकार को घेरने में पीछे नज़र नहीं आ रही है. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग रही हैं और इन्हें देखते हुए सरकार को इनके संरक्षण के लिए कोशिश करनी चाहिए. वह सलाह देती हैं कि सरकार को चाहिए कि हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दे.

    विपक्षी पार्टियां इस मामले पर सरकार पर निशाना तो साध रही हैं लेकिन सरकार उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को इस पर क्या दिशा-निर्देश देती है देखना यह काफी दिलचस्प होगा क्योंकि सरकार के उसी फैसले  पर उत्तराखण्ड के युवाओं का रोज़गार का भविष्य तय होगा.

    ....तो उत्तराखंड के युवाओं को ही नहीं मिलेगी अब राज्य में नौकरी

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