'मंत्रियों का डेढ़ लाख बढ़ाते पलक न झपकी, सफ़ाईकर्मियों के 3270 के नाम पर सांप सूंघा'

सरकार के नुमाइंदे के रूप में कर्मचारियों से वार्ता करने आए सुनील उनियाल गामा ने कहा कि विधायकों और मंत्री से इन मामले को जोड़ेंगे तो समाधान नहीं निकल पाएगा.

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: May 17, 2018, 7:23 PM IST
'मंत्रियों का डेढ़ लाख बढ़ाते पलक न झपकी, सफ़ाईकर्मियों के 3270 के नाम पर सांप सूंघा'
सफ़ाई कर्मचारियों को दर्द इस बात का भी है कि उनके 109 रुपये बढ़ाने में शासन, प्रशासन और मंत्री तक को दिक्कत हो रही है, नियम-कानून के पेच लगाए जा रहे हैं लेकिन विधायकों, मंत्रियों का वेतन डेढ़ लाख रुपये तक बिना किसी आपत्ति के बढ़ा दिया गया.
satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: May 17, 2018, 7:23 PM IST
उत्तराखंड सरकार के खेल भी निराले हैं. बिना मांगे मंत्रियों और विधायकों की तनख़्वाह 120 फीसदी तक बढ़ा दी गई और राज्य में सबसे निचले पायदान पर बैठे सफाई कर्मचारियों के लिए सरकार के पास बजट का टोटा हो गया है. इसकी वजह से देहरादून शहर कूड़े के ढेर में तब्दील हो रहा है और अब बीमारियों का ख़तरा मंडराने लगा है.

देहरादून के सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सात मई से हड़ताल पर हैं. कर्मचारियों की मांग हैं कि उनको न्यूनतम वेतन मिले, संविदा पर उन्हें रखा जाए और न्यूनतम मजदूरी 285 रुपये प्रति दिन हो. लेकिन सरकार के कानों में पिछले 11 दिन से जूं तक नहीं रेंग रही.

सफ़ाई कर्मचारियों को दर्द इस बात का भी है कि उनके 109 रुपये बढ़ाने में शासन, प्रशासन और मंत्री तक को दिक्कत हो रही है, नियम-कानून के पेच लगाए जा रहे हैं लेकिन विधायकों, मंत्रियों का वेतन डेढ़ लाख रुपये तक बिना किसी आपत्ति के बढ़ा दिया गया.

हालांकि गैरसैंण विधानसभा सत्र में एक इन कर्मचारियों की मांग को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना भी सफ़ाईकर्मियों की ही बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि जब सरकार राजधानी तक में न्यूनतम मज़दूरी नहीं दे सकती है तो विधायकों और मंत्रियों की तनख्वाह 120 फीसदी बढ़ाने की क्या ज़रूरत थी.

सरकार के नुमाइंदे के रूप में कर्मचारियों से वार्ता करने आए सुनील उनियाल गामा से जब न्यूज़ 18 ने सवाल किए तो उनका कहना हैं कि विधायकों और मंत्री से इन मामले को जोड़ेंगे तो समाधान नहीं निकल पाएगा. उन्होंने तो यह तक कह दिया कि अब पत्रकार ही इसका हल निकालें हमसे नहीं हो पाएगा.

ज़ाहिर है सरकार को न सफ़ाई कर्मचारियों की चिंता है और न ही चारों तरफ़ फैले कूड़े से परेशान देहरादून के लोगों की. न ही इन नेताओं को यह ख़्याल है कि अपने ऐसे ग़ैरज़िम्मेदाराना बर्ताव से वह प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन का मज़ाक उड़ा रहे हैं और देहरादून की छवि भी देश भर में ख़राब कर रहे हैं.
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