उत्‍तराखंड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब ग्राम प्रधान पर कार्रवाई कर सकेंगे कलेक्‍टर

इसके साथ ही क्षेत्र पंचायत प्रमुख पर कार्रवाई का अधिकार निदेशक पंचायती राज व जिला पंचायत अध्यक्ष पर कार्रवाई का अधिकार सरकार ने अपने पास ही रखा था. (फाइल फोटो)
इसके साथ ही क्षेत्र पंचायत प्रमुख पर कार्रवाई का अधिकार निदेशक पंचायती राज व जिला पंचायत अध्यक्ष पर कार्रवाई का अधिकार सरकार ने अपने पास ही रखा था. (फाइल फोटो)

उत्‍तराखंड हाईकोर्ट (High Court) ने प्रदेश सरकार के स्‍टैंड को स्‍वीकार करते हुए फैसला दिया कि सरकार अपनी शक्तियां हस्‍तांतरित कर सकती है.

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देहरादून. उत्तराखंड हाईकोर्ट (High Court) ने राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के 9 जून 2017 के नोटिफिकेशन को संवैधानिक करार देते हुए कहा है कि सरकार को अधिकार है कि वो अपनी पावर को डेलीगेट (शक्तियों का हस्‍तांतरण) कर सकती है. दरअसल, 9 जून 2017 को राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन (Notification) जारी किया था, जिसमें उत्तराखंड पंचायती राज एक्ट (Uttarakhand Panchayati Raj Act) की धारा 138 के तहत ग्राम प्रधानों पर कार्रवाई का आदेश जिलाधिकारियों को दिया गया था.

इसके साथ ही क्षेत्र पंचायत प्रमुख पर कार्रवाई का अधिकार निदेशक पंचायती राज और जिला पंचायत अध्यक्ष पर कार्रवाई का अधिकार प्रदेश सरकार ने अपने पास ही रखा था. इस नोटिफिकेशन को हरिद्वार के मुकेश कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और इसको असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि सरकार को पूरा अधिकार है कि वो अपनी शक्तियों को डेलीगेट कर सकती है. हाईकोर्ट ने भी सरकार के रुख का समर्थन करते हुए अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया.

अब डीएम ही प्रधानों पर कर सकेंगे कार्रवाई
हालांकि, राज्य सरकार ने 9 जून 2017 को प्रधानों पर कार्रवाई के लिये नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, मगर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया. इस बीच, प्रधानों पर जिलाधिकारी भी कार्रवाई नहीं कर सके तो अब हाईकोर्ट ने अपना आदेश जारी कर दिया है. यानि अब प्रधानों को लेकर आने वाली शिकायतों पर डीएम सीधे तौर पर कार्रवाई कर सकेंगे. हांलाकि, याचिकाकर्ताओं के पास अभी सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है.
एक प्रधान पर कार्रवाई का आदेश


हाईकोर्ट ने हरिद्वार के एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान के घोटालों पर 4 हफ्तों के भीतर कार्रवाई के भी आदेश दिया है. दरअसल, याची ने याचिका दाखिल कर कहा था कि हरिद्वार के इमरती गांव में ग्राम प्रधान द्वारा लाखों का घोटाला किया है और अपात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है. पूर्व में डीएम द्वारा जांच की गई जिसमें ग्राम प्रधान दोषी पाया गया था मगर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई.

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